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The News Air - Breaking News - Hemkund Sahib Yatra 2026: मॉनसून ने रोकी यात्रा, 30% घटे श्रद्धालु!

Hemkund Sahib Yatra 2026: मॉनसून ने रोकी यात्रा, 30% घटे श्रद्धालु!

उत्तराखंड में बारिश का असर, हेमकुंड साहिब और चार धाम यात्रा पर भारी पड़ा, केदारनाथ में 65 फीसदी की गिरावट दर्ज

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 7 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Hemkund Sahib Yatra
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Hemkund Sahib Yatra Monsoon Impact: उत्तराखंड में सक्रिय हुए दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून का सीधा असर सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब और चार धाम यात्रा पर देखने को मिल रहा है। पिछले पांच दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में 30 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। 1 जुलाई को जहां 27,232 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे, वहीं 5 जुलाई तक यह संख्या घटकर महज 19,202 रह गई।

लगातार हो रही बारिश के कारण यात्रियों की संख्या तेजी से घट रही है। देखा जाए तो मॉनसून ने इस बार तीर्थयात्रियों की योजनाओं पर पानी फेर दिया है। सबसे ज्यादा असर केदारनाथ धाम पर पड़ा है, जहां श्रद्धालुओं की संख्या 65 फीसदी तक कम हो गई है।

🔍 यह भी पढ़ें- Hemkund Sahib निहंग हमला, उत्तराखंड में दूसरे गुट पर भी केस

मॉनसून का असर: पहली जुलाई से लगातार बारिश

राज्य में 1 जुलाई से मॉनसून पूरी तरह सक्रिय हो गया था। इसके बाद से लगातार हो रही बारिश के कारण यात्रियों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। सरकारी अंकड़ों के मुताबिक, हेमकुंड साहिब और चार धामों में 1 जुलाई को कुल 27,232 श्रद्धालु पहुंचे थे। लेकिन 5 जुलाई तक यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 19,202 रह गया।

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जैसे-जैसे मॉनसून तेज हो रहा है, श्रद्धालुओं की आमद में लगातार गिरावट आ रही है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सिर्फ एक या दो दिन का मामला नहीं है, बल्कि पिछले पांच दिनों से यह ट्रेंड जारी है।

🔍 यह भी पढ़ें- Hazur Sahib Act में बदलाव पर पंजाब में सियासी उबाल

केदारनाथ धाम सबसे ज्यादा प्रभावित: 65% की गिरावट

सबसे ज्यादा असर केदारनाथ धाम में देखने को मिला है। बारिश शुरू होने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या 65 फीसदी तक घट गई है। 1 जुलाई को केदारनाथ में 6,553 श्रद्धालु पहुंचे थे, जबकि 5 जुलाई को यह संख्या सिर्फ 2,297 रह गई।

अधिकारी ने समझाया कि केदारनाथ की यात्रा पैदल और बेहद मुश्किल रास्ते वाली होने के कारण मॉनसून के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। लैंडस्लाइड का खतरा, खराब मौसम और फिसलन भरे रास्ते यात्रियों को डराते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि केदारनाथ में ट्रेक काफी कठिन है। 16 किलोमीटर का पैदल मार्ग है जो गौरीकुंड से शुरू होता है। बारिश में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है।

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बदरीनाथ धाम में भी यात्री घटे: 28% की कमी

हेमकुंड साहिब के साथ-साथ बदरीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ी कमी आई है। 1 जुलाई को बदरीनाथ धाम में 13,192 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे, जबकि 5 जुलाई को यह संख्या लगभग 28 फीसदी की गिरावट के साथ 9,484 रह गई।

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बदरीनाथ तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग है, लेकिन भारी बारिश के कारण रास्ते में कई जगह लैंडस्लाइड हो जाती है। कभी-कभी घंटों तक यात्री फंसे रहते हैं।

मौसम विभाग की चेतावनी: आने वाले दिनों में और बारिश

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में राज्य के कई पहाड़ी जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में यात्रा पर मौसम का असर और भी बढ़ने की संभावना है।

मौसम विभाग ने चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा की योजना बनाएं।

फिर भी बना रिकॉर्ड: 41.56 लाख से ज्यादा श्रद्धालु

खराब मौसम के बावजूद इस साल की चार धाम और हेमकुंड साहिब यात्रा ने एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। 19 अप्रैल को यात्रा शुरू होने से लेकर अब तक महज ढाई महीनों के अंदर 41.56 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं।

इसी तरह 23 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के बाद अब तक 1.76 लाख श्रद्धालु पवित्र स्थान पर नतमस्तक हो चुके हैं।

तीर्थस्थल1 जुलाई (श्रद्धालु)5 जुलाई (श्रद्धालु)गिरावट %
केदारनाथ6,5532,29765%
बदरीनाथ13,1929,48428%
कुल (सभी धाम)27,23219,20230%
मुख्यमंत्री धामी ने बताई सफलता का राज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार, यह ऐतिहासिक सफलता राज्य सरकार द्वारा विकसित किए गए बुनियादी ढांचे, बेहतर सड़क संपर्क, मजबूत सुरक्षा प्रबंधों और श्रद्धालुओं को दी जा रही बेहतरीन सुविधाओं का नतीजा है।

अगर गौर करें तो पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड सरकार ने चार धाम यात्रा को सुगम बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। हेलीपैड सेवाएं, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं, स्वच्छ शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था और आपातकालीन बचाव दल तैनात किए गए हैं।

हेमकुंड साहिब: सिखों का पवित्र तीर्थस्थल

हेमकुंड साहिब समुद्र तल से 4,632 मीटर (15,197 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यह सिखों के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी रचना “बचित्र नाटक” में इस स्थान का उल्लेख किया है।

यहां एक खूबसूरत सरोवर (झील) है जो सात पहाड़ों से घिरा हुआ है। श्रद्धालु इस पवित्र सरोवर में स्नान करते हैं, भले ही पानी बर्फीला ठंडा हो। यहां का गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब बेहद खूबसूरत है।

समझने वाली बात यह है कि हेमकुंड साहिब की यात्रा केवल मई से अक्टूबर तक ही संभव है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यह स्थान पूरी तरह बंद रहता है।

चार धाम यात्रा: हिंदुओं की आस्था का केंद्र

चार धाम यात्रा में चार पवित्र स्थल शामिल हैं:

  1. यमुनोत्री: यमुना नदी का उद्गम स्थल
  2. गंगोत्री: गंगा नदी का उद्गम स्थल
  3. केदारनाथ: भगवान शिव का मंदिर (12 ज्योतिर्लिंगों में से एक)
  4. बदरीनाथ: भगवान विष्णु का मंदिर

हर साल लाखों श्रद्धालु इन चार धामों के दर्शन के लिए आते हैं। 2013 की केदारनाथ त्रासदी के बाद सरकार ने सुरक्षा के कई उपाय किए हैं।

मॉनसून में यात्रा के खतरे और सावधानियां

मॉनसून के दौरान हिमालयी क्षेत्र में यात्रा करना खतरनाक हो सकता है। लैंडस्लाइड, बादल फटना, सड़कें टूटना, पुल बहना—ये सब आम बात है। 2013 में केदारनाथ में आई भीषण बाढ़ में हजारों लोगों की जान गई थी।

विशेषज्ञों की सलाह:

  • मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें
  • आपातकालीन नंबर अपने पास रखें
  • भारी बारिश में यात्रा से बचें
  • गाइड के साथ यात्रा करें
  • पर्याप्त गर्म कपड़े और बारिश से बचाव के उपकरण रखें

मुख्य बातें (Key Points):

  • हेमकुंड साहिब और चार धाम यात्रा में 30% श्रद्धालु कम हुए
  • केदारनाथ में सबसे ज्यादा 65% की गिरावट
  • 1 जुलाई से मॉनसून सक्रिय होने के बाद लगातार गिरावट
  • इस साल अब तक 41.56 लाख श्रद्धालुओं ने चार धाम के दर्शन किए
  • मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भारी बारिश की चेतावनी दी
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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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