Ram Mandir Donation Row: श्रीराम मंदिर के चढ़ावे और दान वस्तुओं में कथित हेराफेरी से जुड़े विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों को मंजूर कर लिया। ट्रस्ट ने सदस्य कृष्णा मोहन को नए जनरल सेक्रेटरी की चुनाव तक कार्यवाहक के रूप में सेवाएं निभाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
तीन घंटे तक चली बैठक के बाद ट्रस्ट के खजांची गोविंद गिरी ने मंदिर के चढ़ावे से चोरी को ट्रस्ट के लिए ‘दुख और शर्मिंदगी’ का विषय बताया। उन्होंने कहा कि इस विवाद ने सदियों के संघर्ष और अनगिनत कुर्बानियों पर बुरा असर डाला है।
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तीन घंटे की बैठक: इस्तीफे मंजूर, नई व्यवस्था की घोषणा
अयोध्या में राम मंदिर कॉम्प्लेक्स के अंदर गेस्ट हाउस में हुई बैठक में ट्रस्ट के चेयरमैन नृत्य गोपाल दास सहित नौ स्थायी सदस्यों में से सात मौजूद थे। चंपत राय और अनिल मिश्रा बैठक में शामिल नहीं हुए।
ट्रस्टियों ने मंदिर ट्रस्ट के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की चुनाव के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने का भी ऐलान किया। इस समिति में सेवानिवृत्त जज प्रमोद कोहली, सेवामुक्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और ट्रस्टी सुरेश हवारे शामिल होंगे।
देखा जाए तो यह ट्रस्ट के लिए एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव है। CEO की नियुक्ति से प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आने की उम्मीद है।
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गोविंद गिरी का बयान: ‘दुख और शर्मिंदगी का विषय’
ट्रस्ट के खजांची गोविंद गिरी ने कहा: “यह हमारे लिए दुख और शर्मिंदगी का विषय है। सदियों के संघर्ष, अनगिनत कुर्बानियों के बाद बना यह मंदिर और इस तरह का विवाद—यह दुखद है।”
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट ने चंपत राय के इस्तीफे को स्वीकार करने के बावजूद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण में उनके योगदान की सर्वसम्मति से सराहना की है।
गिरी ने कहा: “चंपत राय जी ने स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया है। उनके योगदान को हम सभी सम्मान देते हैं।”
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चढ़ावे में चोरी का आरोप: क्या हुआ था?
विवाद तब शुरू हुआ जब आरोप लगे कि मंदिर में चढ़ाई गई कीमती वस्तुओं—सोने-चांदी के गहने, मूर्तियां, नकदी—में से कुछ गायब हो गईं। कुछ कर्मचारियों पर चोरी और हेराफेरी का आरोप लगा।
पुलिस ने अब तक आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जो चढ़ावे की देखभाल और गणना में शामिल थे। FIR में किसी भी ट्रस्टी का नाम शामिल नहीं है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह विवाद सिर्फ चोरी का नहीं है, बल्कि यह जनता के भरोसे का मामला है। करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था से मंदिर को दान दिया है और अब उन्हें लग रहा है कि उनके विश्वास के साथ धोखा हुआ है।
ट्रस्ट का दावा: सारा रिकॉर्ड सुरक्षित, कुछ नहीं गायब
गोविंद गिरी ने दावा किया कि ट्रस्ट मंदिर को चढ़ावे में मिली वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड रखता है और दान में मिली हरेक वस्तु सुरक्षित है। “अगर कोई सत्यापन करना चाहता है तो ट्रस्ट सारा रिकॉर्ड और दान में मिली वस्तुएं दिखाने के लिए तैयार है।”
समझने वाली बात यह है कि ट्रस्ट और पुलिस के बयानों में अंतर है। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन ट्रस्ट कह रहा है कि कुछ गायब नहीं हुआ। यह विरोधाभास सवाल खड़े करता है।
कृष्णा मोहन अंतरिम जनरल सेक्रेटरी: पूरी टीम चुनने की छूट
खजांची ने बताया कि कृष्णा मोहन, जिन्हें अंतरिम जनरल सेक्रेटरी की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, को अपनी टीम चुनने की पूरी छूट रहेगी। वह पारदर्शिता सुनिश्चित करने और प्रशासकीय प्रबंध को मजबूत करने के उपायों की देख-रेख करेंगे।
यह एक अहम कदम है। नई टीम को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगे ऐसी कोई घटना न हो और श्रद्धालुओं का विश्वास फिर से कायम हो।
22 जुलाई को अगली बैठक: SIT की रिपोर्ट का इंतजार
गिरी ने कहा कि ट्रस्ट 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा। उम्मीद की जाती है कि तब तक विशेष जांच टीम (SIT) अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप देगी। अगली बैठक में अतिरिक्त ट्रस्टियों की नियुक्ति पर भी चर्चा की जाएगी।
दिलचस्प बात यह है कि SIT की रिपोर्ट से साफ होगा कि वास्तव में क्या हुआ और किसकी गलती थी। तभी आगे की कार्रवाई तय होगी।
श्रद्धालुओं से अपील: झूठे प्रचार से बचें
गिरी ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे झूठे प्रचार से बचें। अगर किसी को दान की गई वस्तुओं के बारे में शंका है तो वह ट्रस्ट कार्यालय से संपर्क कर सकता है। ट्रस्ट पूरा रिकॉर्ड दिखाने के लिए तैयार है।
यह अपील जरूरी थी क्योंकि सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैल रही थीं। कुछ लोग कह रहे थे कि करोड़ों का सोना गायब हो गया, जबकि ट्रस्ट इससे इनकार कर रहा है।
कृष्ण मोहन का बयान: दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
नवनियुक्त अंतरिम जनरल सेक्रेटरी कृष्ण मोहन ने बैठक के बाद कहा: “जो भी दोषी पाया गया, उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। सारे ट्रस्टी लोगों का भरोसा बहाल करने और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे का सही प्रबंधन करने के लिए काम करेंगे।”
राम मंदिर का इतिहास: सदियों का संघर्ष
राम मंदिर का निर्माण सदियों के संघर्ष के बाद हुआ है। 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस, दशकों की कानूनी लड़ाई और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2020 में मंदिर निर्माण शुरू हुआ।
22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम लला की प्राण प्रतिष्ठा की। तब से लाखों श्रद्धालु रोज मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।
अगर गौर करें तो यह विवाद उस मंदिर के लिए बेहद दुखद है जिसके लिए इतने सालों तक संघर्ष हुआ। श्रद्धालुओं को उम्मीद थी कि यह मंदिर पारदर्शिता और आस्था का प्रतीक होगा।
चंपत राय कौन हैं? राम मंदिर आंदोलन के योद्धा
चंपत राय दशकों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद (VHP) में कई पदों पर काम किया। मंदिर निर्माण के दौरान उन्होंने जनरल सेक्रेटरी के रूप में अहम भूमिका निभाई।
उनका योगदान निर्विवाद है, लेकिन इस विवाद के बाद उन्होंने स्वेच्छा से पद छोड़ने का फैसला किया।
मुख्य बातें (Key Points):
- श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार किया
- कृष्णा मोहन को अंतरिम जनरल सेक्रेटरी बनाया गया
- CEO चुनने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित
- पुलिस ने चढ़ावे में हेराफेरी के आरोप में 8 लोगों को गिरफ्तार किया
- 22 जुलाई को अगली बैठक, SIT रिपोर्ट का इंतजार











