Harsimrat Badal Privilege Notice: शिरोमणि अकाली दल की बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब के मानसा जिले के SSP वैभव चौधरी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का मामला उठाने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है। पत्र में नियम 222 और 223 के तहत कार्रवाई की अनुमति मांगी गई है।
मामला 29 अक्टूबर, 2026 का है। उस दिन मानसा के गांव भम्मे कलां में एक किसान परिवार से मुलाकात के दौरान हरसिमरत ने पुलिस की कार्रवाई पर SSP से जवाब मांगा था। उनका आरोप है कि अधिकारी ने सवालों को गंभीरता से नहीं लिया और बातचीत में बार-बार टोकते रहे।
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भम्मे कलां में दलजीत सिंह की मौत और परिवार का धरना
कहानी शुरू होती है गांव के सीमांत किसान दलजीत सिंह की मौत से। उनके बाद परिवार धरने पर बैठ गया। परिवार का आरोप था कि दलजीत की मौत का संबंध नशा कारोबार से है, और वे जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई चाहते थे।
हरसिमरत बादल के मुताबिक यहीं से मामला बिगड़ा। उनका आरोप है कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना दलजीत का शव जबरन अपने कब्जे में ले लिया।
शव और जरनैल सिंह को लेकर परिवार के सवाल
हरसिमरत का दावा है कि इस दौरान पुलिस ने कथित तौर पर बल प्रयोग और डराने-धमकाने का सहारा लिया। परिवार को न शव ले जाने की ठोस वजह बताई गई, न यह बताया गया कि शव वापस कब और कैसे मिलेगा।
एक और आरोप है जो ज्यादा चिंता का विषय लगता है। मृतक के पिता जरनैल सिंह मधुमेह के मरीज हैं। बादल के अनुसार वर्दीधारी पुलिसकर्मी उन्हें बिना परिवार को बताए वहां से ले गए, और उनके ठिकाने की जानकारी भी नहीं दी गई।
अब जरा सोचिए। घर में बेटे की मौत हुई हो, उसका शव भी हाथ में न हो, और बुजुर्ग बीमार पिता का भी पता न चले। ऐसे परिवार पर क्या बीती होगी, यह समझना मुश्किल नहीं है।
SSP वैभव चौधरी से फोन पर क्या बात हुई
नोटिस में बादल ने बताया है कि पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान उन्होंने SSP को फोन किया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई और शव ले जाने पर स्पष्टीकरण मांगा। उनके आरोप के मुताबिक रिकॉर्डेड बातचीत में SSP ने बार-बार उनकी बात काटी। उन्होंने उनके पक्ष को “गलत नैरेटिव” और चिंताओं को “भ्रामक” बताया।
पत्र में दर्ज बातों के अनुसार SSP ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए शव कब्जे में लेना स्वीकार किया, पर परिवार से ही शव लेने को कहा। जरनैल सिंह को ले जाने की बात से उन्होंने इनकार किया और परिवार को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने की सलाह दी। पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवाल कथित तौर पर टाल दिए गए।
लोकसभा स्पीकर से क्या मांगा गया
हरसिमरत ने स्पीकर से मामला सदन की विशेषाधिकार समिति को भेजने और पंजाब सरकार से तथ्यात्मक रिपोर्ट मंगवाने की मांग की है। उन्होंने कई दस्तावेज भी मांगे हैं।
| मांगा गया रिकॉर्ड | मकसद |
|---|---|
| FIR, इनक्वेस्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट | दलजीत सिंह की मौत की स्थिति समझना |
| शव ले जाने की परिस्थितियां | जबरन कब्जे के आरोप की जांच |
| शव परिवार को सौंपने की व्यवस्था | परिवार को क्या बताया गया, यह जानना |
| जरनैल सिंह से जुड़े रिकॉर्ड | लापता होने या हिरासत में होने की पुष्टि |
सवाल एक फोन कॉल से बड़ा है
देखा जाए तो विवाद के दो हिस्से हैं। पहला, एक सांसद के सवालों का जवाब कैसे दिया गया। दूसरा, एक गरीब किसान परिवार के साथ पुलिस ने कैसा बर्ताव किया। हरसिमरत ने दोनों को एक साथ जोड़ा है, और इसी वजह से मामला विशेषाधिकार हनन के नोटिस तक पहुंचा।
दिलचस्प बात यह है कि पूरे विवाद में कई बातें एक-दूसरे से टकराती हैं। SSP ने बकौल पत्र शव कब्जे में लेने की बात मानी, पर परिवार का कहना है कि यह सहमति के बिना हुआ। जरनैल सिंह के मामले में पुलिस इनकार करती दिखती है, जबकि परिवार के पास उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। जब तक FIR, पोस्टमार्टम और बाकी रिकॉर्ड सामने नहीं आते, सच्चाई साफ नहीं होगी।
आम आदमी के लिए इसका मतलब सीधा है। अगर किसी परिवार के सदस्य की मौत हो जाए, तो वह जानना चाहेगा कि शव कहां है, क्यों ले जाया गया और कब मिलेगा। इन सवालों का जवाब न मिले, तो भरोसा टूटता है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ये सभी बातें हरसिमरत कौर बादल के पत्र में लिखे आरोप हैं। पुलिस या पंजाब सरकार का कोई विस्तृत पक्ष फिलहाल सामने नहीं आया है।
क्या है पृष्ठभूमि
मानसा जिले के भम्मे कलां गांव के सीमांत किसान दलजीत सिंह की मौत के बाद परिवार धरने पर बैठा था। परिवार का आरोप था कि मौत का संबंध नशा कारोबार से है। 29 अक्टूबर को हरसिमरत कौर बादल परिवार से मिलीं, और इसी दौरान उनकी SSP वैभव चौधरी से फोन पर बात हुई। इसके बाद उन्होंने लोकसभा स्पीकर को नियम 222 और 223 के तहत नोटिस भेजा।
मुख्य बातें (Key Points)
- हरसिमरत कौर बादल ने SSP मानसा वैभव चौधरी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन और सदन की अवमानना का नोटिस दिया है।
- आरोप है कि भम्मे कलां के दलजीत सिंह का शव परिवार की सहमति के बिना पुलिस ने कब्जे में लिया।
- पिता जरनैल सिंह को पुलिस ले जाने का आरोप है, जबकि SSP ने इससे इनकार किया।
- बादल ने मामला विशेषाधिकार समिति को भेजने और पंजाब सरकार से रिपोर्ट मंगवाने की मांग की है।













