Akali BJP alliance Punjab: पंजाब में दिवाली के बाद शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान हो सकता है। दोनों दलों में फिलहाल सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत चल रही है। BJP 45 से 50 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
BJP से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गठबंधन फाइनल होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बठिंडा का दौरा करेंगे। वहां एक बड़ी रैली में वे इस गठजोड़ की घोषणा करेंगे।
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अमित शाह के बयान के बाद गठजोड़ तय माना जा रहा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली और चंडीगढ़ में 2027 में NDA सरकार बनने की बात कही थी। उसके बाद से ही गठजोड़ तय माना जा रहा है। इस बयान ने पंजाब की सियासत में हलचल बढ़ा दी।
सीट शेयरिंग में BJP का नया फॉर्मूला: 1997 से 2017 से कितना अलग
यहीं से शुरू होती है असली कहानी। सूत्रों के मुताबिक इस बार BJP सीट शेयरिंग में बराबरी पर रहना चाहती है। वह करीब 50 सीटें मांग रही है, और बाकी करीब 67 सीटों पर अकाली दल लड़ेगा।
पुराना गठजोड़ 1997 से 2017 तक चला था। उसमें BJP को 117 में से सिर्फ 23 सीटें मिलती थीं, जबकि 94 पर अकाली दल खुद लड़ता था।
| पहलू | 1997 से 2017 का गठजोड़ | इस बार की चर्चा |
|---|---|---|
| कुल सीटें | 117 | 117 |
| BJP की सीटें | 23 | 45 से 50 (करीब 50 की मांग) |
| अकाली दल की सीटें | 94 | करीब 67 |
अकाली दल के दूसरे गुटों से गठजोड़ क्यों नहीं
चर्चा थी कि सारे अकाली दल BJP के साथ आ सकते हैं। इसमें बड़ा नाम अकाली दल से टूटकर बने अकाली दल पुनर्सुरजीत का है। पर अब इसकी संभावना कम नजर आ रही है।
वजह तकनीकी है, पर अहम है। यह गुट अभी रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी नहीं बना है। ऐसे में इसके नेताओं को अकाली दल या BJP के चुनाव चिन्ह पर ही लड़ना होगा।
हरसिमरत कौर बादल फिर बन सकती हैं केंद्रीय मंत्री
सूत्रों की मानें तो गठबंधन हुआ तो अकाली दल को केंद्र सरकार में जगह मिल सकती है। प्रधान सुखबीर बादल की पत्नी और सांसद हरसिमरत कौर बादल फिर मंत्री बन सकती हैं।
समझने वाली बात है कि पंजाब के पास अभी केंद्र में कोई मंत्री नहीं है। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत बिट्टू के हटने के बाद यह जगह खाली है। नया गठजोड़ चुनाव से पहले पंजाब को केंद्र में प्रतिनिधित्व दे सकता है।
सुखबीर बादल ने भी दरवाजे बंद नहीं किए
सुखबीर बादल भी BJP के साथ गठजोड़ को खुलकर नहीं नकार रहे। उन्होंने चंडीगढ़ में दो बार कहा कि AAP और कांग्रेस उनके कट्टर दुश्मन हैं। उनके मुताबिक जिससे भी सोच मिलती है, उसके लिए गठबंधन के दरवाजे खुले हैं। हरसिमरत भी एक रैली में इसके संकेत दे चुकी हैं।
सीटों का गणित और पंजाब की सियासत
देखा जाए तो इस खबर की सबसे दिलचस्प बात सीटों का आंकड़ा है। 23 से सीधे 45-50 सीटें, यानी BJP की हिस्सेदारी दोगुनी से ज्यादा। इसका मतलब है कि BJP इस बार जूनियर पार्टनर की भूमिका से बाहर निकलना चाहती है।
अगर गौर करें तो “बराबरी” की बात और 50 बनाम 67 का बंटवारा पूरी तरह मेल नहीं खाते। अंतिम आंकड़े बातचीत से तय होंगे, और अभी सब कुछ सूत्रों पर टिका है। किसी भी दल ने औपचारिक घोषणा नहीं की है।
आम वोटर के लिए इसका मतलब यह है कि चुनाव का मुकाबला काफी हद तक साफ होता दिख रहा है। एक तरफ अकाली-BJP का संभावित गठजोड़, दूसरी तरफ AAP और कांग्रेस, जिन्हें सुखबीर बादल अपना कट्टर दुश्मन बता चुके हैं।
क्या है पृष्ठभूमि
अकाली दल और BJP का गठजोड़ 1997 से 2017 तक चला था। उस दौरान BJP 117 में से 23 सीटों पर लड़ती थी और अकाली दल 94 पर। अब 2027 के चुनाव से पहले दोबारा गठबंधन की बातचीत चल रही है, जिसे अमित शाह के NDA सरकार बनाने वाले बयान से और बल मिला है।
मुख्य बातें (Key Points)
- दिवाली के बाद अकाली दल और BJP के गठबंधन का ऐलान हो सकता है, सीट शेयरिंग पर बातचीत जारी है।
- BJP 45 से 50 सीटें चाहती है और अकाली दल करीब 67 सीटों पर लड़ेगा। पहले BJP को सिर्फ 23 सीटें मिलती थीं।
- प्रधानमंत्री मोदी बठिंडा की रैली में गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं।
- अकाली दल पुनर्सुरजीत से गठजोड़ की संभावना कम है, और हरसिमरत कौर बादल फिर केंद्रीय मंत्री बन सकती हैं।













