Hardeep Singh Puri Epstein Files: केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की 11 फरवरी 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने उनकी मुश्किलें कम करने की बजाय और बढ़ा दी हैं। जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स में नाम आने के बाद पुरी ने सफाई में जो कुछ कहा, उससे नए और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने एप्स्टीन से तीन-चार मुलाकातें स्वीकार कीं, ईमेल पत्राचार माना, उसके घर डिनर पार्टी में जाना कबूला — लेकिन कहा कि यौन अपराध से कोई लेना-देना नहीं था। सवाल यह है कि दुनियाभर में इसी स्तर के संपर्कों के कारण कई बड़ी हस्तियां इस्तीफा दे चुकी हैं, माफी मांग चुकी हैं — तो हरदीप सिंह पुरी क्यों नहीं?
क्या हरदीप पुरी बन सकते हैं दूसरे एम.जे. अकबर?
यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि मोदी सरकार में यौन शोषण से जुड़े मामले में पहले भी एक मंत्री का इस्तीफा हो चुका है। एम.जे. अकबर मोदी सरकार के पहले ऐसे मंत्री थे जिन्हें MeToo आंदोलन के दौरान यौन शोषण के गंभीर आरोपों के बाद अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। जब देश की बड़ी महिला पत्रकारों ने उनके संपादक काल के दौरान यौन शोषण के आरोप लगाए, तो अकबर को पद छोड़ना पड़ा।
अब हरदीप सिंह पुरी पर यौन शोषण में सीधे शामिल होने का आरोप नहीं है — यह बात स्पष्ट है। लेकिन नाबालिग बच्चियों की तस्करी और यौन शोषण के सजायाफ्ता सरगना एप्स्टीन से लगातार संपर्क रखने, उसके घर डिनर पार्टी में जाने और ईमेल पत्राचार करने के गंभीर आरोप हैं। मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोपों पर किसी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया, लेकिन यौन शोषण से जुड़े मामले में एम.जे. अकबर ने दिया। तो इसी आधार पर सवाल खड़ा होता है — क्या हरदीप सिंह पुरी को भी इस्तीफा नहीं देना चाहिए?
अगर पुरी का इस्तीफा होता है तो वे मोदी सरकार के दूसरे मंत्री होंगे जिन्हें यौन शोषण से जुड़े मामले के कारण पद छोड़ना पड़ेगा। और अगर इस्तीफा नहीं होता तो प्रधानमंत्री मोदी एम.जे. अकबर को क्या जवाब देंगे — यह सवाल भी बना रहेगा।
2008 में एप्स्टीन अपराध कबूल कर चुका था, फिर भी पुरी मिलते रहे
हरदीप सिंह पुरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक बयान उनके लिए सबसे बड़ा फांस बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2008 में एप्स्टीन ने जो अपराध स्वीकार किया वह सिर्फ यह था कि वह एक नाबालिग महिला से वैश्यावृत्ति करवा रहा था — “That was it” — बस इतना ही। और उन्हें आरोपों पर “शक” था।
लेकिन तथ्य यह हैं कि 2008 में एप्स्टीन ने खुद अपना गुनाह कबूल कर लिया था कि उसने नाबालिग लड़कियों की वैश्यावृत्ति कराई है। वह कई महीने जेल में रह चुका था। उसके बाद भी भारतीय विदेश सेवा का एक वरिष्ठ अधिकारी उससे मिलता रहा — यह सवाल गंभीर है।
2008 में हरदीप सिंह पुरी विदेश मंत्रालय में आर्थिक संबंधों के विभाग में सचिव स्तर के अधिकारी थे। उसके बाद न्यूयॉर्क गए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि बने। और वहां उनका मिलना-जुलना किससे हुआ? जेफ्री एप्स्टीन से। एक बार नहीं — तीन या चार बार।
यह मानसिकता कि नाबालिग लड़कियों की वैश्यावृत्ति “बस इतना ही” है — यह एक केंद्रीय मंत्री का बयान है। और इसके बावजूद उस व्यक्ति से प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों तरह के रिश्ते बनाए रखना — इस पर सवाल तो उठेंगे ही।
कॉफी का न्योता 9 महीने तक याद रखा
ईमेल रिकॉर्ड्स से एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आती है जो हरदीप सिंह पुरी और एप्स्टीन के बीच “सामान्य प्रोफेशनल” संबंध के दावे को कमजोर करती है।
25 मार्च 2015 को एप्स्टीन ने हरदीप सिंह पुरी को ईमेल किया — क्या कल कॉफी के लिए मिलना चाहोगे? पुरी ने जवाब दिया कि वे भारत आ गए हैं, 10 अप्रैल को वापस आएंगे। यहां तक ठीक है। लेकिन 9 महीने बाद — 25 दिसंबर 2015 को — न्यूयॉर्क लौटने पर हरदीप सिंह पुरी ने खुद एप्स्टीन को ईमेल किया कि मैं भारत से वापस आ गया हूं, जब भी आप शहर में हों और कॉफी के लिए समय हो तो बताइएगा।
9 महीने बाद कॉफी का प्रस्ताव याद रखना और खुद याद दिलाना — यह “सामान्य प्रोफेशनल” संबंध कैसा है?
इस ईमेल को एप्स्टीन ने हरदीप सिंह पुरी के बॉस इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) के प्रमुख टेरेंस “टेड” लार्सन को फॉरवर्ड किया। लार्सन ने जवाब में लिखा — “तुमने वो कहावत सुनी होगी, सांप और भारतीय मिल जाएं तो पहले भारतीय को मार दो।” एप्स्टीन ने पुरी को “टू-फेस्ड” यानी दोहरे चरित्र वाला बताया।
हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि ये लोग मुझे पसंद नहीं करते थे क्योंकि मैं उनके वैल्यू सिस्टम में फिट नहीं होता था। लेकिन सवाल यह है कि जो लोग आपके बारे में ऐसा सोचते थे, जो भारतीयों के बारे में अपमानजनक बातें लिखते थे — उनसे आप 25 दिसंबर 2015 के बाद भी मिलते रहे। 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को भी मुलाकातें हुईं।
एप्स्टीन के घर डिनर पार्टी — जून 2014
जून 2014 — यह तारीख बेहद अहम है। 7 जून 2014 को एप्स्टीन ने अमेरिका के पूर्व ट्रेजरी सचिव और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट रहे लैरी समर्स को ईमेल लिखा कि रविवार को उनके न्यूयॉर्क के घर पर डिनर है। मेहमानों में थे — पूर्व इसराइली प्रधानमंत्री एहुद बराक, संयुक्त राष्ट्र में काउंटर-टेररिज्म के पूर्व अध्यक्ष हरदीप सिंह पुरी, पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री केविन रड, फिल्म निर्माता वुडी एलन और MIT मीडिया लैब के पूर्व निदेशक जोई ईटो।
यह डिनर उस समय हो रही है जब दुनिया एप्स्टीन के अपराधों के बारे में जान चुकी थी। तब तक यह डिटेल सामने आ चुकी थी कि एप्स्टीन ने अपने दोस्त प्रिंस एंड्रयू के लिए तस्करी से लाई गई नाबालिग लड़कियों को उपलब्ध कराया था। और तब भी हरदीप सिंह पुरी उसके घर डिनर के लिए गए।
डिनर पार्टी के दूसरे मेहमानों का क्या हुआ?
तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने दिखाया कि एप्स्टीन के घर डिनर पर जाने वाले बाकी लोगों का क्या हुआ। लैरी समर्स को 2025 में एप्स्टीन फाइल्स के कारण इस्तीफा देना पड़ा — उनके और एप्स्टीन के बीच सैकड़ों ईमेल में महिलाओं का जिक्र सामने आया। एहुद बराक पर घूस लेने का अपराध साबित हुआ — उन्होंने एक पुलिस टेक स्टार्टअप में एप्स्टीन का 1 मिलियन डॉलर का निवेश करवाया था। MIT मीडिया लैब के निदेशक जोई ईटो को माफी मांगनी पड़ी और इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि उन्होंने एप्स्टीन से पैसे लिए थे। वुडी एलन का इतिहास तो जगजाहिर है — उन पर बच्चों के यौन शोषण के आरोप लग चुके हैं।
और भारत के मंत्री पुरी साहब? न माफी, न अफसोस, न इस्तीफा।
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा का सवाल सीधा है — हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि एप्स्टीन से उनका संपर्क पूरी तरह प्रोफेशनल था, फिर वे उसके घर पर डिनर पार्टी में क्या कर रहे थे? खेड़ा कहते हैं — “आपको इस्तीफा देना पड़ेगा। What happens in New York does not stay in New York.”
“एग्जॉटिक आइलैंड” — पुरी का ईमेल जो सबसे ज्यादा परेशान करता है
दिसंबर 2015 के एक ईमेल में हरदीप सिंह पुरी ने एप्स्टीन को लिखा कि वे भारत से जुड़ी कुछ किताबें उन्हें देना चाहते हैं। और फिर पूछा — “Please let me know when you are back from your exotic island.” यानी आपके अनोखे आइलैंड से कब वापस आ रहे हैं?
वही आइलैंड जिसे आज दुनिया “एप्स्टीन आइलैंड” के नाम से जानती है — जहां उसके सबसे जघन्य यौन अपराध हुए, जहां नाबालिग लड़कियों की तस्करी कर लाया जाता था।
हरदीप सिंह पुरी को इस आइलैंड के बारे में पता था। वे इसे “exotic” बता रहे हैं। किताबें भेजना चाहते हैं। कॉफी पीना चाहते हैं। और फिर कहते हैं कि एप्स्टीन के यौन अपराधों से कोई लेना-देना नहीं था। प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद पुरी ने कहा कि एप्स्टीन फाइल्स उसके आइलैंड पर पीडोफिलिया और यौन शोषण के बारे में हैं, उन पीड़ितों ने केस किए हैं — “My interaction is nothing to do with that.”
एप्स्टीन के जरिए रीड हॉफमैन से मुलाकात — पूरी बात नहीं बताई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 8 साल में उन्होंने एप्स्टीन को सिर्फ एक सब्सटैंटिव ईमेल भेजा। कुछ और ईमेल इसलिए भेजे क्योंकि किसी ने उन्हें LinkedIn के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से मिलवाया। लेकिन पुरी ने एक बात छुपा ली।
24 सितंबर 2014 का ईमेल दिखाता है कि एप्स्टीन ही वह इंसान था जिसने रीड हॉफमैन और हरदीप सिंह पुरी को एक-दूसरे के संपर्क में लाया। एप्स्टीन ने रीड से कहा कि भारत में हरदीप तुम्हारे आदमी हैं। यानी रीड हॉफमैन का परिचय करवाने वाला खुद एप्स्टीन था — लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुरी ने “किसी ने मिलवाया” कहकर बात टाल दी।
जून 2014 में एप्स्टीन के घर डिनर के कुछ दिन बाद ही पुरी ने एप्स्टीन से कहा कि वे रीड हॉफमैन से जरूर मिलना चाहेंगे। अक्टूबर 2014 में सैन फ्रांसिस्को में रीड से मिलने से पहले पुरी ने एप्स्टीन को ईमेल लिखा — “You my friend make things happen” — यानी तुम दोस्त, तुम चीजें करवा लेते हो। इस मुलाकात के लिए कोई सुझाव देना चाहोगे?
एप्स्टीन ने सुझाव दिया — रीड से कहो कि तुम उसका भारत दौरा करवा दोगे, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के लोगों से मिलवाओगे, सोशल मीडिया गुरु से मिलवाओगे।
एप्स्टीन की असिस्टेंट की शादी और “प्रायोरिटी बेसिस” पर काम
उसी दौरान एप्स्टीन ने पुरी को एक और ईमेल भेजा — उसकी असिस्टेंट को एक शादी के लिए भारत आना है, क्या कुछ मदद हो सकती है? हरदीप सिंह पुरी ने यह ईमेल रिटायर्ड राजदूत प्रमोद बजाज को फॉरवर्ड किया और कहा — “प्रायोरिटी बेसिस पर यह काम करवा दीजिए।”
एप्स्टीन के निर्देश पर हरदीप पुरी चल रहे थे। एप्स्टीन कह रहा था और पुरी कर रहे थे। रीड हॉफमैन की भारत यात्रा प्लान करना, उसकी असिस्टेंट के लिए व्यवस्था करना — यह सब एक “सामान्य प्रोफेशनल रिश्ता” कैसे हो सकता है?
डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया — लॉन्च से एक साल पहले कैसे पता?
हरदीप सिंह पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़े गर्व से कहा कि नवंबर 2014 में उन्होंने रीड हॉफमैन और एप्स्टीन को ईमेल में डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया के बारे में बताया। लिखा कि भारत इंटरनेट बेस्ड इकोनॉमिक एक्टिविटी के लिए जबरदस्त अवसर पेश करता है। मोदी सरकार का फोकस मेक इन इंडिया कैंपेन पर है।
लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है। डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया — दोनों योजनाएं 2015 में लॉन्च हुई थीं। नवंबर 2014 में ये योजनाएं अभी अस्तित्व में ही नहीं आई थीं। तो हरदीप सिंह पुरी को एक साल पहले इनकी जानकारी कैसे थी?
पुरी खुद कह रहे हैं — “Here I was, a farsighted private citizen who knows what kind of work the Modi government is going to do.” यानी वे इतने दूरदर्शी थे कि एक साल पहले जानते थे कौन सी योजना लॉन्च होगी। लेकिन इतने दूरदर्शी होते हुए भी यह नहीं देख पाए कि जिस इंसान से मिल रहे हैं, जिसके घर डिनर कर रहे हैं, वह दुनिया का सबसे कुख्यात यौन अपराधी है?
इसका जवाब तो प्रधानमंत्री मोदी को भी देना चाहिए — क्या डिजिटल इंडिया और मेक इन इंडिया लॉन्च करने से एक साल पहले उन्होंने हरदीप सिंह पुरी से इन योजनाओं पर चर्चा की थी? और पुरी ने यह जानकारी एप्स्टीन और रीड हॉफमैन को क्यों बताई?
रीड हॉफमैन की भारत यात्रा और मोदी से मुलाकात
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एप्स्टीन के जरिए रीड हॉफमैन की भारत यात्रा प्लान हुई, हरदीप सिंह पुरी ने व्यवस्थाएं कीं — और उस यात्रा के एक कार्यक्रम में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद थे।
सवाल यह है कि पुरी यह सब किस हैसियत से कर रहे थे? उस वक्त वे एक रिटायर्ड डिप्लोमैट थे। क्या भारतीय दूतावास बंद हो गया था? क्या न्यूयॉर्क में राजदूत नहीं था? क्या तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंत्रालय काम नहीं कर रहा था? विदेश मंत्रालय होते हुए, पूरा अमला होते हुए, एप्स्टीन और हरदीप पुरी रीड हॉफमैन की विजिट प्लान कर रहे हैं, फाइनलाइज कर रहे हैं — यह क्या हो रहा था?
क्या हरदीप पुरी एप्स्टीन और मोदी के बीच की कड़ी हैं? इसका जवाब अभी नहीं मिल सकता क्योंकि अभी सिर्फ 30 लाख फाइलें सार्वजनिक हुई हैं — 30 लाख और आनी बाकी हैं।
दुनियाभर में इस्तीफे, भारत में “बस इतना ही”
हरदीप सिंह पुरी जिस इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में काम करते थे, उसके प्रमुख टेड लार्सन ने 2020 में इस्तीफा दे दिया — क्योंकि उन्होंने अपनी संस्था के लिए एप्स्टीन से फंड लिया था। एप्स्टीन ने लार्सन के बच्चों के नाम पर 55 मिलियन डॉलर की वसीयत कर दी थी।
लार्सन की पत्नी मोना जूल को जॉर्डन में इराक की राजदूत के पद से इस्तीफा देना पड़ा। नॉर्वे में दोनों के खिलाफ जांच शुरू हो गई। नॉर्वे की राजकुमारी मेट-मारिट ने भी एप्स्टीन से दोस्ती के लिए सार्वजनिक माफी मांगी कि उनसे एप्स्टीन को समझने में गलती हो गई।
रीड हॉफमैन ने भी एप्स्टीन से मिलने और MIT मीडिया लैब के लिए उससे फंडिंग दिलवाने पर माफी मांगी। लार्सन भी यौन अपराध में सीधे शामिल नहीं था, न ही उसकी पत्नी — फिर भी इस्तीफा दिया। लेकिन भारत के केंद्रीय मंत्री सीना ताने खड़े हैं और कह रहे हैं — “मिला था, ईमेल भेजा था, तो क्या हो गया?”
सोरोस का भूत और दोहरा मानदंड
यहां बीजेपी के दोहरे मानदंड को समझना जरूरी है। बीजेपी किसी को टारगेट करने के लिए जॉर्ज सोरोस का नाम उछालती रही है — कि उसकी वेबसाइट या संगठन को सोरोस फंड करता है जो “भारत विरोधी” है। लेकिन एप्स्टीन भी “भारत विरोधी” था — उसका संगठन IPI को फंड करता था और उसी में पुरी साहब काम करते थे।
अगर राहुल गांधी का संबंध इसी इंस्टीट्यूट से होता, अगर राहुल गांधी एप्स्टीन के घर डिनर पर गए होते, अगर राहुल गांधी ने एप्स्टीन को “exotic island” वाला ईमेल भेजा होता — तो बीजेपी और गोदी मीडिया इस वक्त क्या कर रहा होता? यह सवाल अपने आप में जवाब है।
उसी दिन बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया कि उनकी सदस्यता समाप्त कर दी जाए — सोरोस फाउंडेशन, फोर्ड फाउंडेशन, USAID से जुड़ाव का हवाला देकर। कुछ घंटों बाद सूत्रों के हवाले से खबर आई कि सरकार विशेषाधिकार प्रस्ताव नहीं लाएगी, लेकिन राहुल गांधी के बयानों को सदन की कार्यवाही से हटाया जा सकता है।
क्या यह सब पुरी के मामले से ध्यान भटकाने के लिए किया जा रहा है? ताकि गोदी मीडिया इसे बड़ा बनाए और पुरी का मामला गायब हो जाए?
कानून अलग, नैतिकता अलग
एप्स्टीन सामान्य अपराधी नहीं था। वह दुनियाभर से नाबालिग लड़कियों की तस्करी करता था। उसके नेटवर्क में प्रभावशाली लोग थे — कुछ उसके प्रभाव के कारण, कुछ लड़कियों के कारण। उसका प्रभाव किससे बनता था? पैसे से और लड़कियों की सप्लाई से।
अगर आपने एप्स्टीन के प्रभाव का इस्तेमाल किया — किसी भी रूप में — उसके जरिए संपर्क साधे, काम करवाए, तो आपने परोक्ष रूप से उसके यौन अपराध को मान्यता तो दी ही है। यह नहीं कहा जा सकता कि संबंध साझा करते हैं मगर अपराध से कोई लेना-देना नहीं। सबको पता था। अपराध की बुनियाद पर ही एप्स्टीन का पूरा नेटवर्क खड़ा था।
कानून की किताब में अपराध में शामिल होना और अपराधी के संपर्क में रहना — दो अलग चीजें हो सकती हैं। लेकिन राजनीति जिस नैतिकता की बुनियाद पर खड़ी होती है, उसकी मर्यादाएं कानून से ऊपर होती हैं। इसीलिए दुनियाभर में लोगों ने इस्तीफे दिए — कानूनी अपराध में शामिल न होने के बावजूद।
मुख्य बातें (Key Points)
- प्रेस कॉन्फ्रेंस उलटी पड़ी: हरदीप सिंह पुरी ने 11 फरवरी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितना बोला उससे ज्यादा सवाल पैदा हो गए — एप्स्टीन से तीन-चार मुलाकातें, ईमेल, डिनर पार्टी और “exotic island” वाला ईमेल सब सामने आ गया।
- डिजिटल इंडिया-मेक इन इंडिया विरोधाभास: पुरी ने नवंबर 2014 में एप्स्टीन और रीड हॉफमैन को इन योजनाओं के बारे में बताया — जबकि दोनों योजनाएं 2015 में लॉन्च हुईं। यह जानकारी उन्हें कहां से मिली, इसका जवाब प्रधानमंत्री को देना चाहिए।
- दुनियाभर में इस्तीफे: IPI प्रमुख टेड लार्सन, उनकी पत्नी, MIT मीडिया लैब के निदेशक, लैरी समर्स — सबने एप्स्टीन से जुड़े कारणों से इस्तीफा दिया या माफी मांगी। भारत में मंत्री सीना ताने खड़े हैं।
- एम.जे. अकबर से तुलना: मोदी सरकार में यौन शोषण से जुड़े मामले पर पहले एम.जे. अकबर ने इस्तीफा दिया। अगर पुरी नहीं देते तो यह दोहरा मानदंड होगा — और अगर देते हैं तो मोदी सरकार के दूसरे ऐसे मंत्री होंगे।








