LIVE | ...
शनिवार, 4 जुलाई 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Epstein Files: यूरोप में इस्तीफ़ों की झड़ी, ब्रिटेन की सरकार ख़तरे में, भारत में चुप्पी क्यों?

Epstein Files: यूरोप में इस्तीफ़ों की झड़ी, ब्रिटेन की सरकार ख़तरे में, भारत में चुप्पी क्यों?

एप्स्टीन फाइल्स से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की कुर्सी डोली, यूरोप भर में नाम आने पर इस्तीफे और जांच के आदेश — लेकिन भारत में केंद्रीय मंत्री का नाम आने पर भी सन्नाटा

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, सियासत
A A
0
Epstein Files
104
SHARES
696
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Epstein Files Europe Resignations: जेफ्री एप्स्टीन फाइल्स ने पूरी दुनिया में भूचाल ला दिया है। ब्रिटेन में इस्तीफों की झड़ी लग गई है और प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार खतरे में है। यूरोप के कई देशों में सिर्फ नाम आने भर से ही नेताओं और राजनयिकों ने इस्तीफे दे दिए हैं और जांच के आदेश जारी हो गए हैं। अमेरिका में रोज नए-नए पर्दाफाश हो रहे हैं। लेकिन भारत में — जहां केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम सामने आए हैं — चुप्पी पसरी हुई है। न मीडिया में कवरेज, न सरकार से जवाब, न इस्तीफे की बात।

ब्रिटेन: एक ही तरह का मामला, बिल्कुल अलग नतीजा

ब्रिटेन में पीटर मेंडलसन का नाम एप्स्टीन फाइल्स में आया। मेंडलसन पर भी यौन अपराध में सीधे शामिल होने का कोई आरोप नहीं था। उन पर इतना ही आरोप था कि वे एप्स्टीन के करीबी दोस्त थे और एप्स्टीन के अपराध सामने आने के बाद भी उससे दोस्ती बनाए रखी। कुछ तस्वीरें सामने आईं। लेकिन किसी अपराध की पुष्टि नहीं हुई।

इसके बावजूद मेंडलसन को लेबर पार्टी और हाउस ऑफ लॉर्ड्स से इस्तीफा देना पड़ा। सितंबर में ही जैसे ही नाम आया, प्रधानमंत्री स्टारमर ने उन्हें पद से हटा दिया। उसके बाद भी नई जानकारियां आती रहीं और अब स्टारमर से खुद जवाब मांगे जा रहे हैं — क्योंकि मेंडलसन उनके करीबी थे। स्टारमर के इस्तीफे की मांग हो रही है और लेबर पार्टी की सरकार खतरे में है।

स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैक्स्विनी ने इस्तीफा दे दिया। स्टारमर के डायरेक्टर ऑफ कम्युनिकेशंस टिम मेलन ने भी इस्तीफा दे दिया। और प्रधानमंत्री स्टारमर का नाम तो कहीं है ही नहीं — सिर्फ उनके सहयोगी के नाम आने से उनकी कुर्सी डोल रही है।

अब इसकी तुलना भारत से कीजिए। हरदीप सिंह पुरी खुद सब कुछ स्वीकार कर रहे हैं — एप्स्टीन से मुलाकात, ईमेल, डिनर पार्टी — लेकिन इस्तीफा नहीं दे रहे। मेंडलसन पर भी इतने ही आरोप थे जितने पुरी पर हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मेंडलसन ब्रिटेन में थे और पुरी भारत में हैं। एक ही तरह के मामले के लिए ब्रिटेन में अलग पैमाना और भारत में अलग पैमाना।

यूरोप भर में इस्तीफों की सूची — सिर्फ संपर्क के आधार पर

एप्स्टीन फाइल्स के कारण यूरोप के कई देशों में इस्तीफे हुए हैं, जांच शुरू हुई है और कार्रवाई हुई है। इन सभी मामलों में एक बात कॉमन है — इन लोगों का नाम भी यौन अपराध में सीधे शामिल होने के रूप में नहीं आया, सिर्फ संपर्क, संबंध और मुलाकात के स्तर पर आया। फिर भी इस्तीफे हुए।

ब्रिटेन के राजकुमार एंड्रयू — एप्स्टीन के साथ उनके संबंध और लड़कियों को लेकर जुड़ाव उजागर होने पर किंग चार्ल्स तृतीय ने उनकी राजकुमार की पदवी छीन ली और उस महल से भी निकाल दिया जहां वे करदाताओं के पैसे पर रह रहे थे।

यह भी पढे़ं 👇

Diljit Dosanjh Satluj

Diljit Dosanjh की Satluj रिलीज, 25,000 अवैध हत्याओं की कहानी

शनिवार, 4 जुलाई 2026
water

Water Level Rise: गाहलड़ी हाइडल में अचानक बढ़ा पानी

शनिवार, 4 जुलाई 2026
Farmers

Land Pooling Policy के खिलाफ किसानों का ऐलान-ए-जंग

शनिवार, 4 जुलाई 2026
BJP Punjab President Sunil Jakhar

BJP ने मांगा ‘इक मौका’, अकाली दल से गठजोड़ खारिज

शनिवार, 4 जुलाई 2026

स्लोवाकिया के पूर्व विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार ने इस्तीफा दिया — ईमेल में प्रमाण सामने आए कि वे एप्स्टीन के रास्ते लड़कियों से मिल रहे थे।

स्वीडन में संयुक्त राष्ट्र की रिफ्यूजी हाई कमीशन की अध्यक्ष जोआना रूबिनस्टीन ने अपने पद से इस्तीफा दिया — ईमेल में सामने आया कि उन्होंने एप्स्टीन के आइलैंड का दौरा किया था।

नॉर्वे की राजनयिक मोना जूल ने अपने पद से इस्तीफा दिया — वे जॉर्डन और इराक की राजदूत थीं। एप्स्टीन ने उनके और उनके परिवार के लिए अपनी वसीयत में 55 मिलियन डॉलर छोड़े थे।

न्यूयॉर्क में स्कूल ऑफ विजुअल आर्ट्स के प्रोफेसर डेविड रॉस ने इस्तीफा दिया — उजागर हुआ कि वे लंबे समय से एप्स्टीन के दोस्त थे।

लैरी समर्स — अमेरिका के पूर्व ट्रेजरी सचिव, OpenAI (ChatGPT बनाने वाली कंपनी) के बोर्ड में थे। एप्स्टीन से संबंध सामने आने के बाद इस्तीफा दे दिया।

नॉर्वे की राजकुमारी मेट-मारिट ने एप्स्टीन से दोस्ती के लिए सार्वजनिक माफी मांगी।

इन सभी मामलों में नाम संपर्क और संबंध के स्तर पर ही आया — ठीक वैसे ही जैसे हरदीप सिंह पुरी का आया है। तो क्या इन लोगों ने इस्तीफा देकर गलती की? या भारत में जवाबदेही का बोध ही समाप्त हो गया है?

अमेरिका: सवाल तो उठ रहे, लेकिन एक्शन नहीं

अमेरिका में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। बॉस्टन ग्लोब में यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के प्रोफेसर रफोर्ड ने कहा कि ब्रिटेन में अभी भी मीडिया कुछ हद तक बचा हुआ है जो सवाल उठा रहा है और राजनीति में थोड़ी शर्म बची है — इसीलिए वहां इस्तीफे हो रहे हैं। लेकिन अमेरिका में अमीर लोग चुप्पी साधकर बच निकल रहे हैं।

कैरोल कैडवालाडर — डेमोक्रेसी और मीडिया पर काम करने वाली मशहूर पत्रकार — कहती हैं कि यूरोप में कुछ जवाबदेही बची है, लेकिन अमेरिका में इस घिनौने अपराध को सामान्य बना दिया गया है। कैरोल कहती हैं — “मैंने अपनी सारी जिंदगी टेक टाइकून्स, राजनेताओं और अरबपतियों के नेटवर्क की छानबीन में बिताई है। एप्स्टीन फाइल्स देखकर लगता है कि इन सब लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने वाला आदमी एप्स्टीन ही था। वो इनकी निजी और आर्थिक जिंदगी में शामिल था। और आज ये सभी लोग एक-दूसरे के बचाव में उतर आए हैं। इन्होंने पूरे सिस्टम को चुप्पी के पर्दे से ढक दिया है।”

डोनाल्ड ट्रंप का नाम इन फाइलों में 1000 से अधिक बार आया है। लेकिन उन्हें कोई चिंता नहीं दिखती। ट्रंप ने खुद कहा है — “कागजात प्रकाशित करना समय बर्बाद करने जैसा है। हमारे पास करने के लिए और काम हैं।” दूसरी तरफ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टारमर का नाम कहीं नहीं है — फिर भी सिर्फ सहयोगी के नाम आने से उनकी सरकार खतरे में है।

अमेरिका के वाणिज्य सचिव भी घिरे

अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लटनिक की भी सफाई देते-देते हालत खराब है। लटनिक ने कांग्रेस के सामने माना कि एप्स्टीन को सजा मिलने के 4 साल बाद उसके द्वीप पर उसके साथ लंच किया — उस समय लटनिक का परिवार भी साथ था। लटनिक ने कहा कि 14 साल में 10 बार ईमेल से बात हुई, तीन बार मुलाकात हुई — इसके अलावा कोई संबंध नहीं।

गौर करने लायक बात यह है कि हरदीप सिंह पुरी भी बिल्कुल इसी तरह की दलील देते हैं — “8 साल में तीन-चार बार मिले, एक-दो ईमेल भेजे।” लेकिन मिलना ही तो सवाल पैदा करता है — जो व्यक्ति इतना बड़ा अपराधी हो, उसके नेटवर्क से कोई क्यों मिल रहा है? व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलाइन लेविट ने कहा कि लटनिक को ट्रंप का भरोसा हासिल है — यानी अमेरिका में भी एक्शन नहीं होने वाला।

भारत: चुप्पी का पर्दा — मीडिया से लेकर सरकार तक

भारत में स्थिति सबसे चिंताजनक है। एप्स्टीन फाइल्स में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम कई बार आया है। लेकिन भारत का मीडिया इसे आमतौर पर अनदेखा कर रहा है। केवल द वायर में एक पूरी रिपोर्ट छपी — बाकी मीडिया में सन्नाटा।

कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने 11 फरवरी को एक गंभीर खुलासा किया। उन्होंने ट्वीट किया कि एक बड़े अखबार के पत्रकार ने उन्हें बताया कि सभी को कहा गया है कि एप्स्टीन फाइल को लेकर कवरेज नहीं करना है। किसी भी आर्टिकल में मोदी और एप्स्टीन का जिक्र एक साथ नहीं होना चाहिए। खेड़ा ने लिखा कि उस अखबार ने अपने सिस्टम में “एप्स्टीन” और “मोदी” कीवर्ड को ब्लॉक कर दिया है — किसी रिपोर्ट में दोनों का नाम एक साथ नहीं आ सकता। खेड़ा ने कहा — “यह संपादकीय विवेक नहीं, सेंसरशिप है।”

मोदी से जुड़ा एक और नाम — ईमेल से सामने आया

पवन खेड़ा ने एक और जानकारी सामने रखी। 11 जनवरी 2017 को जीनो यू नाम के एक व्यक्ति ने एप्स्टीन को ईमेल किया कि एक व्यक्ति है जो प्रधानमंत्री मोदी के साथ काम कर चुका है — क्या तुम मिलना चाहते हो? इस ईमेल में किसी का नाम स्पष्ट नहीं पढ़ा जा सकता। लेकिन दो दिन बाद रवि मंथा नाम के एक व्यक्ति ने एप्स्टीन को मेल किया जिसमें एक Facebook लिंक और अपनी दो किताबों की PDF कॉपी भेजी।

फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर ने इसके आधार पर उस शख्स का नाम निकाल लिया जिसकी चर्चा ईमेल में हो रही है। खेड़ा ने सवाल किया — अगर वह व्यक्ति प्रधानमंत्री का चुनावी सलाहकार रहा है तो उसे सफाई देनी चाहिए। चुपके से वीडियो डिलीट करवाकर, पोस्ट हटवाकर, पत्रकारों को डराकर इन खबरों पर पर्दा क्यों डाला जा रहा है?

संसद में भी रोका गया — लेकिन बात फैल गई

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कई अलग-अलग तरीकों से एप्स्टीन फाइल्स की चर्चा करने की कोशिश की। लेकिन स्पीकर ने कहा कि यह बजट का हिस्सा नहीं है। जब भी राहुल ने हरदीप सिंह पुरी, अनिल अंबानी का नाम लिया — कार्यवाही से हटा दिया गया। अनिल अंबानी की गिरफ्तारी की मांग भी कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनी।

लेकिन राहुल गांधी के बोलने का असर हुआ — हरदीप सिंह पुरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सफाई देनी पड़ी। और सदन से बाहर आकर राहुल ने वही बात दोहरा दी — “Department of Justice files हैं, हरदीप पुरी का नाम है, अनिल अंबानी का नाम है, अडानी का केस चल रहा है, 18 महीने से सरकार ने जवाब नहीं दिया। Direct pressure है Prime Minister पर।”

गिलेन मैक्सवेल की ट्रंप से सौदेबाजी

एप्स्टीन की पार्टनर और मुख्य सह-आरोपी गिलेन मैक्सवेल — जो यौन तस्करी के मामले में 20 साल की सजा काट रही हैं — ने अमेरिकी संविधान के फिफ्थ अमेंडमेंट का सहारा लेते हुए एक चौंकाने वाली पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप उनकी सजा माफ कर दें तो वे दुनिया से कह देंगी कि ट्रंप और पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने कुछ गलत नहीं किया। साथ ही एप्स्टीन की सारी जानकारी सरकार को बता देंगी। यह एक तरह का क्विड प्रो क्वो है — “मुझे माफ करो, मैं तुम्हारा नाम साफ कर दूंगी।”

पीड़ित लड़कियां आज भी इंसाफ की तलाश में

इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक पहलू वह है जिसे दुनिया भूलने की कोशिश कर रही है — 1000 से अधिक बालिग और नाबालिग लड़कियां जिनका एप्स्टीन और उसके नेटवर्क ने यौन शोषण किया। मानव तस्करी और यौन शोषण के खिलाफ काम करने वाली अमेरिकी संस्था वर्ल्ड विदाउट एक्सप्लॉइटेशन ने सुपर बॉल के दौरान 40 सेकंड का एक विज्ञापन प्रकाशित किया। इस विज्ञापन में एप्स्टीन द्वारा शोषित महिलाएं दिखाई देती हैं जो मांग कर रही हैं — “Because this girl deserves the truth. Because she deserves the truth. Because we all deserve the truth.”

मायामी हेरल्ड की पत्रकार जूली के. ब्राउन ने अपनी शुरुआती जांच में 60 पीड़ितों को ढूंढा — उनमें से सिर्फ चार बात करने को तैयार हुईं। उनमें से एक ने बाद में अपनी जिंदगी समाप्त कर ली। वर्जिनिया जुफ्रे ने प्रिंस एंड्रयू पर बलात्कार का आरोप लगाया। ब्राउन बार-बार कहती हैं कि यह केस अमेरिका के आपराधिक न्याय विभाग की नाकामी का सबूत है।

कई पीड़ित लड़कियां नशे की लत का शिकार हुईं, अपराध में धकेल दी गईं, या कुछ ने अपनी जान दे दी। एप्स्टीन फाइल्स इन लड़कियों की त्रासदी का दस्तावेज हैं — और दुनिया के ताकतवर लोग सिर्फ सफाई देकर निकल रहे हैं।

भारत का संदर्भ: और कौन-कौन?

भारत में सिर्फ हरदीप सिंह पुरी और अनिल अंबानी के नाम नहीं आए। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के दीपक चोपड़ा का भी नाम आया है — उन्होंने जवाब दिया है। राजस्थान के पूर्व राजघराने से जुड़े जयपुर के महाराजा पद्मनाभ सिंह का भी कथित रूप से नाम आया है — जिनके लिए एप्स्टीन ने रोम में पार्टी का आयोजन किया था। इन सभी नामों का संदर्भ भी संपर्क और पार्टी के स्तर पर है — ठीक वैसे ही जैसे यूरोप में इस्तीफा देने वालों का था।

भारत में बड़े पैमाने पर लड़कियां गायब होती हैं। वो कहां चली जाती हैं? क्या उनकी जिंदगी भी किसी एप्स्टीन जैसे नेटवर्कर की बनाई सुरंग में खो जाती है? यह सवाल पूछना जरूरी है।

विश्लेषण: “एप्स्टीन क्लास” और सड़ती अंतरात्मा

एप्स्टीन फाइल्स को जारी करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में बिल लाने वाले रिप्रेजेंटेटिव रो खन्ना इन लोगों को “एप्स्टीन क्लास” कहते हैं। ये वो लोग हैं जो दुनिया चलाते हैं — राजनेता, अरबपति, राजकुमार, राजनयिक — और इन सबका संबंध एक ऐसे व्यक्ति से था जो नाबालिग लड़कियों की यौन तस्करी करता था।

दुनिया के 1% अरबपति किस तरह की जिंदगी जीते हैं, अपने मनोरंजन के लिए क्या कर सकते हैं, कैसे आम लोगों का शारीरिक और आर्थिक शोषण करते हैं और फिर उन्हीं के नाम पर नीतियां बनाते हैं — यह एप्स्टीन फाइल्स ने उजागर कर दिया है। लेकिन इसने यह भी दिखा दिया है कि सब कुछ सामने होते हुए भी दुनिया के अमीरों का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। जैसे ही किसी एक पर आंच आती है, एक-दूसरे के बचाव में कई खड़े हो जाते हैं।

भारत में तो स्थिति और भी दयनीय है। न मीडिया सवाल पूछ रहा है, न सरकार जवाब दे रही है। कीवर्ड ब्लॉक हो रहे हैं, रिपोर्ट नहीं छप रही, और केंद्रीय मंत्री हंसकर कह रहे हैं — “मेरा नाम लिया, शुक्रिया, दुनिया मुझे जान गई।”


मुख्य बातें (Key Points)
  • यूरोप में इस्तीफे: ब्रिटेन में पीटर मेंडलसन, स्टारमर के चीफ ऑफ स्टाफ और कम्युनिकेशंस डायरेक्टर ने इस्तीफा दिया; प्रिंस एंड्रयू की पदवी छीनी गई; नॉर्वे, स्वीडन, स्लोवाकिया में भी इस्तीफे और जांच — सब सिर्फ संपर्क के आधार पर।
  • भारत में चुप्पी: हरदीप सिंह पुरी सब कुछ स्वीकार कर रहे हैं लेकिन इस्तीफा नहीं दे रहे। मीडिया में कवरेज नहीं हो रहा। पवन खेड़ा ने खुलासा किया कि एक बड़े अखबार ने “एप्स्टीन” और “मोदी” कीवर्ड ब्लॉक कर दिए हैं।
  • गिलेन मैक्सवेल की डील: एप्स्टीन की सह-आरोपी ने ट्रंप से सौदेबाजी की पेशकश की — सजा माफ करो, मैं तुम्हारा और क्लिंटन का नाम साफ कर दूंगी।
  • 1000+ पीड़ित लड़कियां: एप्स्टीन नेटवर्क द्वारा शोषित लड़कियां आज भी इंसाफ के लिए भटक रही हैं — कई नशे का शिकार हुईं, कुछ ने जान दे दी। अमेरिका का न्याय विभाग उन्हें इंसाफ देने में विफल रहा है।
ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

Mahashivratri 2026: दरगाह में शिवलिंग पूजा को अदालत की मंजूरी, जानें पूरा विवाद

Next Post

Propose Day Murder: प्रेमिका को दिया वैलेंटाइन सरप्राइज, फिर कुल्हाड़ी से काट डाला

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

Diljit Dosanjh Satluj

Diljit Dosanjh की Satluj रिलीज, 25,000 अवैध हत्याओं की कहानी

शनिवार, 4 जुलाई 2026
water

Water Level Rise: गाहलड़ी हाइडल में अचानक बढ़ा पानी

शनिवार, 4 जुलाई 2026
Farmers

Land Pooling Policy के खिलाफ किसानों का ऐलान-ए-जंग

शनिवार, 4 जुलाई 2026
BJP Punjab President Sunil Jakhar

BJP ने मांगा ‘इक मौका’, अकाली दल से गठजोड़ खारिज

शनिवार, 4 जुलाई 2026
EWS Quota Admission

EWS Quota Admission: 20 जुलाई तक दाखिला पूरा करें

शनिवार, 4 जुलाई 2026
Traffic Advisory

Traffic Advisory Chandigarh: 5 जुलाई तक सड़क बंद

शनिवार, 4 जुलाई 2026
Next Post
Propose Day Murder

Propose Day Murder: प्रेमिका को दिया वैलेंटाइन सरप्राइज, फिर कुल्हाड़ी से काट डाला

Harpal Singh Cheema

Guru Ravidas Jayanti: पंजाब सरकार का साल भर का प्लान, जानें क्या होगा खास?

Gangsteran Te Vaar

Gangsteran Te Vaar: पंजाब पुलिस का एक्शन, 888 ठिकानों पर छापे, 256 गिरफ्तार

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।