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The News Air - Breaking News - Trump ने H-1B Visa Fee $100,000 बढ़ाई, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर असर

Trump ने H-1B Visa Fee $100,000 बढ़ाई, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर असर

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा आवेदन के लिए एक लाख डॉलर की भुगतान शर्त एक और साल बढ़ाई, सितंबर 2027 तक लागू

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 19 सितम्बर 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, अंतरराष्ट्रीय, नौकरी, राष्ट्रीय
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H-1B Visa Fee
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H-1B Visa Fee Extension: अमेरिका में काम करने के सपने देखने वाले भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एक और झटका आया है। राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कुछ H-1B वीजा आवेदनों के लिए $100,000 (करीब 85 लाख रुपये) की भुगतान शर्त को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। यह नियम अब 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा।

देखा जाए तो यह फैसला अमेरिका में कुशल विदेशी कामगारों को लाने की इच्छा रखने वाली कंपनियों के लिए एक बड़ी रुकावट बनी हुई है। खासकर भारतीय IT कंपनियां और प्रोफेशनल्स इस नीति से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

🔍 यह भी पढ़ें- H-1B Visa Crisis: ’60 दिन में नौकरी खोजो या अमेरिका छोड़ो’, भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर संकट के बादल

क्या है H-1B वीजा प्रोग्राम?

H-1B वीजा प्रोग्राम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष कौशल वाले विदेशी कामगारों को नौकरी पर रखने की अनुमति देने के लिए बनाया गया था। यह मुख्य रूप से तकनीकी, इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में काम करता है।

अगर गौर करें तो भारत से सबसे ज्यादा H-1B वीजा आवेदन आते हैं। हर साल लाखों भारतीय तकनीकी पेशेवर अमेरिका में बेहतर करियर और वेतन की उम्मीद में H-1B वीजा के लिए आवेदन करते हैं।

$100,000 की शर्त क्यों लगाई गई?

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि H-1B प्रोग्राम का दुरुपयोग हो रहा था। कुछ नियोक्ता, खासकर IT स्टाफिंग और आउटसोर्सिंग कंपनियां, कम वेतन वाले विदेशी मजदूरों को रखकर अमेरिकी कामगारों की जगह ले रही थीं।

घोषणापत्र में दोष लगाया गया है कि कुछ नियोक्ताओं ने अमेरिकी कामगारों की जगह कम तनख्वाह वाले विदेशी कर्मचारियों को रखने के लिए इस प्रोग्राम का उपयोग किया। इससे अमेरिकी कामगारों की नौकरियां छीनी गईं और वेतन दबाव में रहे।

समझने वाली बात यह है कि $100,000 की भारी फीस लगाकर ट्रंप प्रशासन केवल उच्च-कुशल और उच्च-वेतन वाले कामगारों की भर्ती को प्रोत्साहित करना चाहता है।

किस पर लागू होती है यह शर्त?

यह $100,000 की भुगतान शर्त मुख्य रूप से अमेरिका से बाहर के कामगारों के लिए H-1B याचिकाओं पर लागू होती है। हालांकि, कुछ सीमित अपवाद भी हैं।

ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित घोषणापत्र के तहत, सितंबर 2025 में लगाई गई पाबंदियां 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेंगी। यानी अगले दो साल तक यह कड़ा नियम जारी रहेगा।

700 से ज्यादा याचिकाओं ने फीस भरी

प्रशासन ने बताया कि 21 सितंबर 2025 को मूल घोषणापत्र के लागू होने के बाद से अब तक 700 से अधिक याचिकाओं ने $100,000 की भुगतान की है।

यह संख्या बताती है कि बड़ी कंपनियां और उच्च-वेतन वाली नौकरियां इस शर्त को पूरा कर रही हैं। लेकिन छोटी और मध्यम आकार की कंपनियों के लिए यह बोझ असहनीय है।

IT आउटसोर्सिंग फर्मों पर सबसे बड़ा असर

प्रशासन ने नीति के अपने उद्देश्य को पूरा करने के सबूत के रूप में बड़ी IT आउटसोर्सिंग फर्मों द्वारा H-1B पंजीकरण में भारी गिरावट का हवाला दिया। उनकी संयुक्त पंजीकरण 24,946 से घटकर 2,055 रह गईं – जो 92 फीसदी की गिरावट है।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय IT दिग्गज कंपनियां जैसे TCS, Infosys, Wipro आदि इस श्रेणी में आती हैं। इन कंपनियों का बिजनेस मॉडल ही H-1B वीजा पर निर्भर रहा है।

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यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस नीति ने इन कंपनियों को मजबूर किया है कि वे अपनी भर्ती रणनीति बदलें। अब वे स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों को ज्यादा तरजीह दे रही हैं या फिर अन्य देशों में अपने ऑपरेशन बढ़ा रही हैं।

भारत की चिंता और प्रतिक्रिया

ताजा कदम एक ऐसी नीति को बढ़ाता है जिसने पहले ही भारत में चिंताएं पैदा कर दी हैं। पिछले साल, नई दिल्ली ने कहा था कि वह H-1B पाबंदियों के प्रभावों की जांच कर रहा है और प्रभावित परिवारों के लिए संभावित मानवतावादी चुनौतियों को उजागर किया है।

भारत सरकार ने तकनीकी विकास, नवीनता, आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धा में इसके योगदान का हवाला देते हुए, दोनों देशों के बीच कुशल प्रतिभा की गतिशीलता की महत्ता पर जोर दिया था।

भारत का तर्क है कि भारतीय पेशेवर अमेरिका की तकनीकी कंपनियों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। Google, Microsoft, Adobe जैसी कंपनियों के CEO भारतीय मूल के हैं। यह भारतीय प्रतिभा की ताकत को दर्शाता है।

नीति की समीक्षा का निर्देश

घोषणापत्र में State Department, Homeland Security, Justice और Labor विभागों को अगली H-1B लॉटरी के बाद नीति की समीक्षा करने और सिफारिश करने के लिए निर्देश दिए गए हैं कि क्या पाबंदी को बढ़ाया जाना चाहिए या नवीनीकृत किया जाना चाहिए।

यानी सितंबर 2027 के बाद भी यह नीति जारी रह सकती है या इसमें और कड़ाई आ सकती है। यह पूरी तरह समीक्षा के नतीजों पर निर्भर करेगा।

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए विकल्प

अब सितंबर 2027 तक $100,000 की शर्त के बढ़ने से, भारतीय तकनीकी पेशेवर और कंपनियां इन पाबंदियों के तहत काम करना जारी रखेंगी।

लेकिन कुछ विकल्प भी हैं:

  • कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी जैसे देशों में अवसर तलाशना
  • भारत में ही उच्च-वेतन वाली नौकरियों में बने रहना
  • रिमोट वर्क के माध्यम से अमेरिकी कंपनियों के लिए काम करना
H-1B नीति में पिछले बदलाव
वर्षबदलावप्रभाव
2020H-1B वेतन स्तर में वृद्धिकई आवेदन अस्वीकृत
2023लॉटरी सिस्टम में सुधारडुप्लीकेट आवेदन रोके गए
2025$100,000 फीस शर्त लागूIT आउटसोर्सिंग में 92% गिरावट
2026शर्त 2027 तक विस्तारनीति जारी
मुख्य बातें (Key Points)
  • ट्रंप ने H-1B वीजा के लिए $100,000 (85 लाख रुपये) की शर्त सितंबर 2027 तक बढ़ाई
  • IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B पंजीकरण में 92% की गिरावट दर्ज
  • 700 से अधिक याचिकाओं ने अब तक यह भारी फीस भरी है
  • भारत ने प्रभावित परिवारों के लिए मानवतावादी चिंताएं जताई हैं
  • अमेरिका का लक्ष्य केवल उच्च-कुशल और उच्च-वेतन वाले कामगारों की भर्ती करना है

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: H-1B वीजा के लिए $100,000 फीस किसे देनी होती है?

उत्तर: यह फीस नियोक्ता (कंपनी) को देनी होती है, कर्मचारी को नहीं। यह मुख्य रूप से अमेरिका से बाहर के कामगारों की भर्ती पर लागू होती है।

प्रश्न 2: क्या सभी H-1B आवेदनों पर यह शर्त लागू होती है?

उत्तर: नहीं, कुछ सीमित अपवाद हैं। लेकिन अधिकांश IT और तकनीकी क्षेत्र की नौकरियों पर यह लागू होती है।

प्रश्न 3: भारतीय IT कंपनियों पर क्या असर पड़ा है?

उत्तर: भारतीय IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B पंजीकरण में 92% की भारी गिरावट आई है। TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं।

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