Governor System – Justice Nariman : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने राज्यपाल (Governor) व्यवस्था को लेकर बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसे लोगों को कभी राज्यपाल नियुक्त नहीं करना चाहिए, जिनके खिलाफ अदालत से कोई विपरीत आदेश आया हो। साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चुनी हुई सरकारों के कामकाज में अनावश्यक दखल देने वाले राज्यपालों को हटाने के लिए संवैधानिक व्यवस्था (Constitutional Provision) बनाई जानी चाहिए।
जस्टिस नरीमन ने कहा कि राज्यपाल का काम संविधान की शपथ और मर्यादा के तहत लोगों की सेवा करना है। अगर कोई व्यक्ति शपथ का उल्लंघन करता है, तो ऐसे व्यक्ति को राजभवन की जिम्मेदारी सौंपना देश और लोकतंत्र के खिलाफ होगा।
राज्यपालों की नियुक्ति पर सवाल : जस्टिस नरीमन ने राज्यपाल नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि आप अपने दल के किसी नेता को सीधे राज्यपाल नहीं बना सकते। इससे लोकतंत्र की परंपरा कमजोर होती है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों की ओर से दोषी ठहराए गए व्यक्ति को तुरंत पद से हटा देना चाहिए।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई राज्यपाल 10 विधेयकों को मंजूरी देने के बजाय सभी को राष्ट्रपति के पास भेज देता है और अदालत इसे गलत ठहराती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस प्रावधान नहीं है कि किसी राज्यपाल को उसके गलत फैसले की वजह से हटाया गया हो।
राज्यपाल और चुनी सरकारों के बीच खींचतान का मुद्दा नया नहीं है। तमिलनाडु (Tamil Nadu) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों में लंबे समय से विधायी प्रक्रिया में राजभवन और राज्य सरकार के बीच टकराव देखने को मिला है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी 8 अप्रैल को एक अहम फैसला दिया था। अदालत ने कहा था कि किसी भी राज्यपाल या राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर 90 दिन के भीतर फैसला लेना होगा। अगर मंजूरी नहीं दी जाती है, तो उचित कारण बताते हुए उसे वापस लौटाना होगा।
यही वजह है कि पूर्व जस्टिस नरीमन की यह टिप्पणी मौजूदा हालात में और भी अहम हो जाती है।
जस्टिस नरीमन की स्पष्ट राय : पूर्व जज का कहना है कि या तो अदालत को अधिकार मिले कि वह ऐसे राज्यपाल को हटा सके या फिर केंद्र सरकार को तत्काल एक्शन लेना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान की आत्मा और लोकतंत्र की सेहत के लिए यह कदम अनिवार्य है।
मुख्य बातें
जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन ने राज्यपालों की नियुक्ति और हटाने के लिए संवैधानिक प्रावधान की मांग की।
चुनी सरकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने वाले राज्यपालों को हटाने पर बल दिया।
अदालतों द्वारा दोषी ठहराए गए राज्यपाल को पद पर बने रहने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।
तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजभवन और सरकार के बीच विवाद की पृष्ठभूमि में यह टिप्पणी अहम।








