Gold Silver Rate Today : सोने की कीमतों को सहारा देने वाली दुनियाभर की केंद्रीय बैंकों की खरीद में अचानक भारी गिरावट आ गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2026 में केंद्रीय बैंकों ने कुल मिलाकर सिर्फ 5 टन सोना खरीदा, जबकि पूरे 2025 में औसतन हर महीने 27 टन की खरीद हो रही थी। यानी खरीद की रफ्तार में करीब 80% की तेज गिरावट देखने को मिली है। इसके बाद बाजार में यह बड़ा सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की तेजी रुकने वाली है, क्या सोना एक बार फिर ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे आ सकता है, या फिर यह सिर्फ एक अस्थायी ब्रेक है।
80% गिरी खरीद: आखिर क्यों रुके केंद्रीय बैंक
Gold Silver Rate Today की इस खबर में सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर केंद्रीय बैंकों ने अचानक सोना खरीदना इतना कम क्यों कर दिया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एशिया पैसिफिक सीनियर रिसर्च लीड मारिसा सलीम के मुताबिक इसके पीछे दो बड़े कारण हैं। पहला कारण है सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव। हाल के महीनों में भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता की वजह से सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। जब कीमतें इतनी तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं तो रिजर्व मैनेजर अक्सर खरीद को कुछ समय के लिए टाल देते हैं ताकि बेहतर कीमत पर सोना खरीदा जा सके।
दूसरा कारण है मौसमी रुझान। साल की शुरुआत यानी जनवरी अक्सर कई केंद्रीय बैंकों के लिए शांत अवधि होती है। नए साल में बजट आवंटन, नीतिगत समीक्षा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की वजह से खरीद के फैसले थोड़ी देर से लिए जाते हैं। इसलिए जनवरी के आंकड़ों से यह नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी कि केंद्रीय बैंकों ने सोने से मुंह मोड़ लिया है।
2022 से लगातार बढ़ रहे गोल्ड रिजर्व: डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश
Gold Silver Rate Today के संदर्भ में एक बड़ी बात यह है कि जनवरी 2026 की गिरावट के बावजूद विशेषज्ञ मान रहे हैं कि केंद्रीय बैंक सोने को रणनीतिक रिजर्व के रूप में छोड़ने वाले नहीं हैं। 2022 के बाद से दुनियाभर के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है पारंपरिक रिजर्व मुद्राओं, खासकर अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब अमेरिका ने रूस के डॉलर भंडार को फ्रीज कर दिया, तब से कई देशों को यह एहसास हुआ कि डॉलर में रिजर्व रखना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए चीन, रूस, भारत, तुर्की और कई अन्य देशों ने अपने सोने के भंडार तेजी से बढ़ाए। यह प्रवृत्ति अभी भी जारी है और एक महीने की कम खरीद से यह लंबी अवधि का ट्रेंड नहीं बदलने वाला।
रूस से चीन खरीद रहा सोना: कीमतों पर क्या होगा असर
Gold Silver Rate Today में एक और अहम खबर यह है कि रूस से अब चीन बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है। यह व्यापार पश्चिमी प्रतिबंधों की वजह से पारंपरिक बाजारों से बाहर हो रहा है, जिसका असर वैश्विक सोने की कीमतों पर भी पड़ सकता है। जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आपस में सोने का व्यापार करती हैं तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई और डिमांड दोनों प्रभावित होते हैं।
अगर चीन बड़े पैमाने पर रूसी सोना खरीदता रहा तो इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की उपलब्धता कम हो सकती है, जो कीमतों को ऊपर धकेल सकता है। दूसरी तरफ अगर चीन और रूस के बीच यह व्यापार अपने अलग चैनलों से होता रहा तो लंदन और न्यूयॉर्क के पारंपरिक सोना बाजारों पर इसका सीधा असर कम पड़ सकता है।
क्या ₹1 लाख से नीचे आएगा सोना: विशेषज्ञों की राय
Gold Silver Rate Today को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सोने की कीमतें एक बार फिर ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे आ सकती हैं। केंद्रीय बैंकों की खरीद में 80% की गिरावट एक बड़ा संकेत है, लेकिन सिर्फ इसी आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोना भरभराकर गिरेगा।
सोने की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं: केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक तनाव, ब्याज दरों की दिशा, मुद्रास्फीति और डॉलर की मजबूती या कमजोरी। अभी मिडिल ईस्ट में जंग जारी है, वैश्विक अनिश्चितता बनी हुई है और ब्याज दरों को लेकर साफ तस्वीर नहीं है। ऐसे माहौल में सोना “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है और निवेशक इसकी तरफ भागते हैं।
हालांकि अगर केंद्रीय बैंकों की खरीद लंबे समय तक धीमी रही, भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ और डॉलर मजबूत हुआ, तो सोने में कुछ गिरावट आ सकती है। लेकिन ₹1 लाख से नीचे आना फिलहाल मुश्किल लग रहा है क्योंकि जो बुनियादी कारण सोने को ऊपर ले गए, वे अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। आने वाला समय ही बताएगा कि यह गिरावट अस्थायी है या कोई बड़ा ट्रेंड रिवर्सल होने वाला है।
आम निवेशक के लिए क्या मतलब है
Gold Silver Rate Today की इस खबर का आम निवेशक पर सीधा असर पड़ता है। जो लोग सोने में निवेश करने की सोच रहे हैं या जिनकी शादियां आने वाली हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि केंद्रीय बैंकों की खरीद में गिरावट का मतलब तत्काल भाव गिरना नहीं है। सोने का बाजार कई कारकों से चलता है और एक महीने के आंकड़ों से लंबी अवधि की दिशा तय नहीं होती। हालांकि जो लोग सोना खरीदने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए आने वाले कुछ हफ्तों में कीमतों में थोड़ी नरमी आने की संभावना बन सकती है, बशर्ते कोई नया भू-राजनीतिक संकट न खड़ा हो।
मुख्य बातें (Key Points)
- 80% गिरी खरीद: जनवरी 2026 में केंद्रीय बैंकों ने सिर्फ 5 टन सोना खरीदा, जबकि 2025 में औसतन 27 टन प्रति माह की खरीद हो रही थी, यानी 80% की तेज गिरावट।
- कारण: सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और साल की शुरुआत में मौसमी शांत अवधि दो बड़े कारण, रिजर्व मैनेजर बेहतर कीमत का इंतजार कर रहे।
- डॉलर से दूरी: 2022 से केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं ताकि अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो, एक महीने की गिरावट से लंबी अवधि का ट्रेंड नहीं बदलेगा।
- रूस-चीन सोना व्यापार: रूस से चीन बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहा है, जिसका वैश्विक कीमतों पर असर पड़ सकता है।








