किसान अपने हको के लिए हर कुर्बानी के लिए तैयार

चंडीगढ़, 30 अप्रैल

किसानों के चल रहे आन्दोलन में आज सिखों के 9वें गुरु श्री तेगबहादुरजी का 400 वां जन्मोत्सव सिंघु मोर्चे पर मनाया गया। किसान नेताओ ने कहा कि यह गुरुओं व शहीदों के बलिदान की ही सीख है कि किसान इतनी मजबूती से लड़ रहे है। गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म व जात से परे इंसानियत के लिए लड़ाई लड़ी थी और अपना बलिदान दिया था। गुरु जी ने सत्ता द्वारा किये जा रहे शोषण के खिलाफ निडर होकर लड़ाई छेड़ी जिसे आज भी जनता लड़ रही है और लगातार जीतती आ रही है। आज के दिन किसानों ने गुरु तेगबहादुरजी को याद करते हुए उनकी लेखनी पर भी प्रकाश डाला। उन्हें कई स्कॉलर्स द्वारा मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाला योद्धा भी कहा गया।

किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर बैठे 5 महीनों से ज्यादा समय हो गया है। केंद्र सरकार किसानों पर जबरदस्ती कानूनो को थोप रही है। समूह सिख समाज इस शोषण के खिलाफ लड़ रहा है। किसानों की इस लड़ाई में किसानों के अलावा हर वर्ग की भागीदारी का कारण भी गुरु तेगबहादुर जी व अन्य शहीदों की प्रेरणा है. आज गुरु तेगबहादुर जी से प्रेरणा लेकर किसान जुल्म के खिलाफ लड़ रहे है वहीं कई संगठन कोरोना महामारी ने लोगों की सहायता कर रहे है। जिन किसानों व समाज कल्याण संगठनों को अपशब्द बोले गए थे व बदनाम किया जा रहा था वे आज समाज सेवा में लगे हैं।

सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चले समागम में किसान नेताओ समेत धार्मिक संगठनों ने भी हिस्सा लिया व मोर्चो को मजबूत करने का आह्वान किया। नेताओ का कहना है कि जब तक जुल्म।होता रहेगा गुरु के शिष्य उन जुल्मो के खिलाफ लड़ते रहेंगे।

जैसा कि सयुंक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय मजदूर यूनियनों की सयुंक्त बैठक में तय हुआ था कि 1 मई को मई दिवस को मजदूर किसान एकता दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। तीन कृषि कानून मजदूरो को भी पूरी तरह प्रभावित करेंगे इसलिए मजदूर भी किसानों के इस संघर्ष में कंधे से कंधे मिलाके लड़ रहे है। वहीं किसान भी केंद्र सरकार द्वारा लाये गए लेबर कोड के खिलाफ लामबंद हो रहे है। कल सभी मोर्चो पर मजदूर मजबूती से सरकार को चुनौती देंगे।

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