ED Raids Punjab को लेकर रियल एस्टेट सेक्टर में हड़कंप मच गया है। मोहाली की एक अदालत ने GMADA (Greater Mohali Area Development Authority) जमीन घोटाले के मामले में Royale Estate जीरकपुर के डायरेक्टरों परवीन कांसल और नीरज कांसल को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। इस रियल्टर जोड़ी को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 26 मई को चंडीगढ़, जीरकपुर और पंजाब के अन्य हिस्सों में मैसर्स चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (CRCPL) और Royale Estate Group से जुड़े कई ठिकानों पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत छापेमारी अभियान चलाया था।
देखा जाए तो यह मामला करीब 32.67 करोड़ रुपए के बाउंस हुए चेकों और जानबूझकर वित्तीय देनदारियों में चूक करने का है। दिलचस्प बात यह है कि यह रिहायशी प्रोजेक्ट मोहाली के पिंड करला में विकसित किया जा रहा था।
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ED की छापेमारी: 26 मई को कई ठिकानों पर एक्शन
ईडी ने 26 मई को चंडीगढ़, जीरकपुर और पंजाब के विभिन्न हिस्सों में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस अभियान में मैसर्स चंडीगढ़ रॉयल सिटी प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड (CRCPL) और Royale Estate Group के कार्यालय, डायरेक्टरों के घर और अन्य संपत्तियां शामिल थीं।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि ईडी की टीमें सुबह से ही एक्शन में आ गई थीं और देर शाम तक तलाशी अभियान जारी रहा। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत जब्त किए गए।
19 जुलाई 2025 के FIR से शुरू हुआ मामला
ईडी का यह केस 19 जुलाई 2025 को मोहाली में दर्ज किए गए धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले से शुरू हुआ है। पुलिस केस ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) को कानूनी देनदारियों की अदायगी में जानबूझकर डिफॉल्ट करने और लगभग 32.67 करोड़ रुपए के बाउंस हुए चेक जमा करवाने के संबंध में है।
अगर गौर करें तो यह रकम काफी बड़ी है। 32.67 करोड़ रुपए किसी भी विकास प्राधिकरण के लिए महत्वपूर्ण राशि है और इसकी वसूली न होने से सार्वजनिक धन का नुकसान होता है।
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मोहाली के करला में था रिहायशी प्रोजेक्ट
यह रिहायशी प्रोजेक्ट मोहाली के पिंड करला में सीआरसीपीएल (CRCPL) द्वारा विकसित किया जा रहा था। प्रोजेक्ट का नाम “Chandigarh Royal City” था और इसमें कई आवासीय प्लॉट और अपार्टमेंट बनाए जाने थे।
समझने वाली बात यह है कि यह प्रोजेक्ट GMADA की जमीन पर था और कंपनी को नियमानुसार समय-समय पर किश्तें और शुल्क जमा करने थे। लेकिन कंपनी ने अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं किया।
32.67 करोड़ के बाउंस चेक जमा करवाए
आरोप है कि Royale Estate Group ने GMADA को करीब 32.67 करोड़ रुपए के चेक जमा करवाए जो बाउंस हो गए। यानी इन चेकों के पीछे पर्याप्त बैंक बैलेंस नहीं था।
दिलचस्प बात यह है कि बाउंस चेक जारी करना एक आपराधिक अपराध है और नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दंडनीय है। ऐसा लगता है कि कंपनी जानबूझकर इस तरीके से समय खरीदने की कोशिश कर रही थी।
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मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई
ED ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्रवाई की है। इसका मतलब है कि जांच एजेंसी का मानना है कि धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे को वैध दिखाने की कोशिश की गई।
मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सजा काफी कड़ी होती है और संपत्ति जब्त करने के भी प्रावधान हैं। यही कारण है कि ED की छापेमारी इतनी गंभीर मानी जा रही है।
मोहाली कोर्ट ने दिया पांच दिन का रिमांड
शुक्रवार को गिरफ्तारी के बाद दोनों डायरेक्टरों को मोहाली की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने ED की दलीलें सुनने के बाद परवीन कांसल और नीरज कांसल को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि रिमांड के दौरान ED इन डायरेक्टरों से गहन पूछताछ करेगी। पैसे के लेन-देन, बैंक खाते, संपत्तियां और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी ली जाएगी।
ED की पूछताछ में क्या होगा
पांच दिन के पुलिस रिमांड के दौरान ED निम्नलिखित बिंदुओं पर फोकस करेगी:
- 32.67 करोड़ रुपए का पैसा कहां गया
- क्या जानबूझकर चेक बाउंस करवाए गए
- GMADA के साथ किए गए समझौते का उल्लंघन क्यों हुआ
- क्या अन्य लोग भी इस घोटाले में शामिल हैं
- कंपनी की अन्य संपत्तियों का ब्योरा
- पैसे को वैध दिखाने के लिए क्या तरीके अपनाए गए
अगर गौर करें तो यह पूछताछ काफी व्यापक होगी और कई अन्य खुलासे भी हो सकते हैं।
GMADA को हुआ भारी नुकसान
ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) एक सरकारी निकाय है जो मोहाली क्षेत्र के नियोजित विकास के लिए जिम्मेदार है। इस घोटाले से GMADA को करीब 32.67 करोड़ रुपए का सीधा नुकसान हुआ है।
समझने वाली बात यह है कि यह सार्वजनिक धन है और इसका दुरुपयोग या नुकसान अंततः आम जनता पर ही पड़ता है। विकास परियोजनाएं प्रभावित होती हैं और सुविधाओं में कमी आती है।
रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती धोखाधड़ी
हाल के वर्षों में पंजाब और चंडीगढ़ के आसपास रियल एस्टेट सेक्टर में धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं। बिल्डर्स बड़े-बड़े वादे करते हैं, ग्राहकों से पैसे लेते हैं, लेकिन समय पर प्रोजेक्ट पूरा नहीं करते।
दिलचस्प बात यह है कि कई बार सरकारी विकास प्राधिकरणों के साथ भी धोखाधड़ी होती है, जैसा कि इस मामले में दिखाई दे रहा है।
निवेशकों और खरीदारों को भी नुकसान
इस प्रोजेक्ट में जिन लोगों ने प्लॉट या अपार्टमेंट बुक करवाए थे, उन्हें भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। प्रोजेक्ट अधूरा पड़ा है और उनका पैसा फंसा हुआ है।
कई खरीदारों ने कर्ज लेकर पैसा निवेश किया था और अब वे EMI तो चुका रहे हैं लेकिन मकान या प्लॉट का कब्जा नहीं मिल रहा।
RERA में भी शिकायतें दर्ज
सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के खिलाफ RERA (Real Estate Regulatory Authority) में भी कई शिकायतें दर्ज हैं। खरीदारों ने समय पर कब्जा न मिलने और बिल्डर के वादों को पूरा न करने की शिकायत की है।
RERA ने कुछ मामलों में कंपनी पर जुर्माना भी लगाया है, लेकिन अभी तक खरीदारों को राहत नहीं मिली है।
ED की जांच से और खुलासे संभव
ED की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, और भी खुलासे होने की संभावना है। यह देखना होगा कि क्या अन्य कंपनियां या व्यक्ति भी इस घोटाले में शामिल हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि कई बार ऐसे मामलों में राजनीतिक संरक्षण भी सामने आता है। देखना होगा कि यह जांच किस दिशा में जाती है।
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संपत्ति कुर्की की भी संभावना
PMLA के तहत ED के पास संदिग्ध संपत्तियों को अटैच (कुर्क) करने की शक्ति है। अगर जांच में यह साबित होता है कि कोई संपत्ति अपराध की आय से खरीदी गई है, तो उसे जब्त किया जा सकता है।
संभावना है कि आने वाले दिनों में Royale Estate Group की कुछ संपत्तियां कुर्क की जा सकती हैं।
पंजाब में रियल एस्टेट घोटाले पर सख्ती जरूरी
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट सेक्टर में बेहतर निगरानी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।
विकास प्राधिकरणों को भी अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है ताकि ऐसे घोटाले न हों। समय-समय पर ऑडिट और प्रगति की निगरानी जरूरी है।
मुख्य बातें (Key Points)
- मोहाली कोर्ट ने Royale Estate के डायरेक्टरों परवीन कांसल और नीरज कांसल को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा
- ED ने 26 मई को चंडीगढ़, जीरकपुर और पंजाब में कई ठिकानों पर छापेमारी की
- GMADA को करीब 32.67 करोड़ रुपए के बाउंस चेक जमा करवाने का आरोप
- मामला 19 जुलाई 2025 को मोहाली में दर्ज FIR से शुरू हुआ
- मोहाली के करला में रिहायशी प्रोजेक्ट विकसित किया जा रहा था
- PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी













