DigiLocker Driving License को लेकर अगर आप भी परेशान रहते हैं कि कहीं लाइसेंस घर पर ही न छूट जाए, तो यह खबर आपके बहुत काम की है। अक्सर ऐसा होता है कि घर से गाड़ी लेकर निकलते ही अचानक ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग शुरू हो जाती है और जेब टटोलने पर पता चलता है कि लाइसेंस साथ नहीं है।
देखा जाए तो कुछ ऐसी ही परेशानी मार्कशीट को लेकर भी होती है। कॉलेज एडमिशन हो या नौकरी का इंटरव्यू, 10वीं-12वीं की ओरिजिनल मार्कशीट की जरूरत अक्सर अचानक आ पड़ती है और कागज फटने या गुम होने का डर हमेशा बना रहता है। भारत सरकार ने इस समस्या का पक्का हल DigiLocker के रूप में पहले ही दे रखा है।
🔍 यह भी पढ़ें- 11 सितंबर: इतिहास का सबसे काला दिन और अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं
क्या है DigiLocker
समझने वाली बात है कि DigiLocker असल में आपके फोन के अंदर मौजूद एक सरकारी और सुरक्षित डिजिटल तिजोरी है। भारत सरकार ने साल 2015 में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत इस सुविधा की शुरुआत की थी।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें मौजूद सभी दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होते हैं। यानी अगर ट्रैफिक पुलिस फोन में DigiLocker खोलकर दिखाया गया ड्राइविंग लाइसेंस या RC देखती है, तो कोई भी पुलिसकर्मी उसे मानने से इनकार नहीं कर सकता।
DigiLocker में अकाउंट कैसे बनाएं
अगर गौर करें तो अकाउंट बनाने का तरीका बेहद आसान है और इसमें मुश्किल से दो मिनट लगते हैं। सबसे पहले Google Play Store या iPhone के App Store से DigiLocker ऐप डाउनलोड करना होगा, या फिर कंप्यूटर पर digilocker.gov.in वेबसाइट खोली जा सकती है।
ऐप खोलने के बाद साइन अप का विकल्प चुनें और नाम, जन्मतिथि, जेंडर, मोबाइल नंबर जैसी जानकारी भरें। इसके साथ छह अंकों का एक सिक्योरिटी पिन भी बनाना होगा। मोबाइल पर आए OTP और आधार नंबर डालकर एक और OTP वेरिफाई करते ही अकाउंट पूरी तरह तैयार हो जाता है।
ड्राइविंग लाइसेंस कैसे जोड़ें
दिलचस्प बात यह है कि इसमें किसी कागजात को स्कैन या अपलोड करने की मशक्कत बिल्कुल नहीं करनी पड़ती। यह सीधे परिवहन विभाग के सिस्टम से जुड़ा होता है।
लॉगिन करने के बाद सर्च बार में “ड्राइविंग लाइसेंस” टाइप करें। इसके बाद अलग-अलग राज्यों के परिवहन विभाग की सूची आ जाएगी, जिसमें अपना राज्य चुनना होगा। नाम और जन्मतिथि पहले से आधार से भरी होगी, बस लाइसेंस नंबर डालकर “Get Document” पर क्लिक करना है। कुछ ही सेकंड में डिजिटल लाइसेंस डाउनलोड होकर सेव हो जाएगा।
मार्कशीट जोड़ने की प्रक्रिया
इसका मतलब है कि मार्कशीट जोड़ने का तरीका भी लगभग वैसा ही है। सर्च बार में अपने एजुकेशन बोर्ड का नाम लिखें, जैसे CBSE, UP बोर्ड या बिहार बोर्ड।
नीचे दी गई टेबल में पूरी प्रक्रिया एक नजर में समझी जा सकती है:
| स्टेप | करना क्या है |
|---|---|
| 1 | बोर्ड का नाम सर्च करें |
| 2 | 10वीं या 12वीं कक्षा चुनें |
| 3 | रोल नंबर और पासिंग ईयर डालें |
| 4 | “Get Document” पर क्लिक करें |
बोर्ड के रिकॉर्ड से मार्कशीट और सर्टिफिकेट अपने आप फैच होकर डिजिटल साइन और QR कोड के साथ DigiLocker में सेव हो जाएगा।
पुरानी मार्कशीट न मिले तो क्या करें
समझने वाली बात है कि जिन लोगों ने कई साल पहले पढ़ाई पूरी की है, उनका डाटा कई बार ऑनलाइन सिस्टम पर उपलब्ध नहीं होता। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है।
DigiLocker में एक “DigiLocker Drive” नाम का अलग सेक्शन होता है, जो Google Drive की तरह काम करता है। इसमें सरकार 1 GB तक मुफ्त जगह देती है, जहां पुरानी मार्कशीट की फोटो या PDF सेव की जा सकती है।
DigiLocker इस्तेमाल करने के फायदे
वहीं इसके फायदों की बात करें तो सबसे पहला फायदा है भारी-भरकम फाइलें लेकर घूमने से छुटकारा। दूसरा बड़ा फायदा सुरक्षा का है, क्योंकि बारिश में कागज भीगने, दीमक लगने या बैग चोरी होने का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है।
तीसरा और सबसे बड़ा फायदा कानूनी मान्यता का है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत DigiLocker में मौजूद डिजिटल DL और RC को असली कागजी दस्तावेज जितना ही सम्मान मिला हुआ है, जिसे कोई भी अधिकारी अमान्य नहीं ठहरा सकता।
जानें पूरा मामला
DigiLocker भारत सरकार की एक पहल है जिसे 2015 में डिजिटल इंडिया मिशन के तहत शुरू किया गया था। इसका मकसद नागरिकों के जरूरी दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना है ताकि कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम हो और वेरिफिकेशन प्रक्रिया आसान बने।
मुख्य बातें (Key Points)
- DigiLocker ऐप या वेबसाइट से आधार OTP के जरिए दो मिनट में अकाउंट बनाया जा सकता है।
- ड्राइविंग लाइसेंस और मार्कशीट सरकारी रिकॉर्ड से सीधे जुड़ जाते हैं, सिर्फ सही नंबर डालना जरूरी है।
- पुरानी मार्कशीट ऑनलाइन न मिलने पर DigiLocker Drive में 1 GB मुफ्त स्टोरेज मिलती है।
- डिजिटल दस्तावेजों को कानूनी रूप से असली कागजात के बराबर मान्यता प्राप्त है।













