GST Registration Rules Change को लेकर देशभर के व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। 1 नवंबर से जीएसटी पंजीयन से लेकर फ्रॉड नोटिस भेजने तक के सारे नियम बदलने जा रहे हैं, जिसकी जानकारी अप्रत्यक्ष कर विभाग ने सर्कुलर जारी कर दी है।
देखा जाए तो यह बदलाव उन हजारों छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए राहत की बात है, जो अब तक अफसरों की मनमानी और बेवजह के नोटिसों से परेशान रहते थे। नए नियमों के तहत अब बिना ठोस सबूत के किसी को फ्रॉड का नोटिस नहीं थमाया जा सकेगा।
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स्टार्टअप्स के लिए क्या है नया नियम
समझने वाली बात है कि अगर कोई युवा को-वर्किंग स्पेस से अपना नया कारोबार शुरू कर रहा है, तो अब उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेज या बड़े पते ढूंढने की जरूरत नहीं होगी।
अब सिर्फ दो काम करने होंगे। पहला, को-वर्किंग मेंबरशिप की कॉपी अपलोड करनी होगी, और दूसरा, उस कॉपी में साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि स्पेस कहां है और कौन सा डेस्क अलॉट किया गया है।
आधार से रजिस्ट्रेशन पर फिजिकल वेरिफिकेशन खत्म
दिलचस्प बात यह है कि अगर आधार नंबर के जरिए रजिस्ट्रेशन लिया गया है, तो कोई भी जीएसटी अफसर पते की छानबीन यानी फिजिकल वेरिफिकेशन करने दरवाजे पर नहीं आएगा। यह तभी होगा जब किसी बड़ी धोखाधड़ी का ठोस शक हो।
इसका मतलब है कि अगर जगह किसी पूर्वज के नाम पर है, तो सिर्फ डेथ सर्टिफिकेट और पते के सबूत के तौर पर बिजली बिल या हाउस टैक्स बिल जमा करना काफी होगा। इससे साफ होता है कि बाबुओं की अतिरिक्त फाइल मांगने वाली पुरानी आदत पर अब ताला लग चुका है।
फ्रॉड नोटिस पर अब नहीं चलेगी मनमानी
अब आते हैं सबसे गंभीर मुद्दे पर, जिसने देश के व्यापारियों का जीना मुश्किल कर रखा था। पहले क्या होता था कि टैक्स जमा करने में देरी होते ही अफसर तुरंत धारा 74 के तहत फ्रॉड का नोटिस थमा देते थे।
लेकिन 1 नवंबर से यह राज बिल्कुल नहीं चलेगा। नियम साफ कर दिया गया है कि टैक्स बकाया होने का मतलब फ्रॉड करना नहीं होता। नीचे दी गई टेबल में पुराने और नए नियम का फर्क साफ देखा जा सकता है:
| पुराना नियम | नया नियम (1 नवंबर से) |
|---|---|
| बकाया होते ही फ्रॉड नोटिस | पक्के सबूत के बिना नोटिस नहीं |
| अफसर की मर्जी से नोटिस | सीनियर अफसर की मंजूरी जरूरी |
| कॉपी-पेस्ट भाषा में नोटिस | हर साल का अलग तथ्य लिखना जरूरी |
8 अक्टूबर की बैठक में हुआ था फैसला
इसका सीधा मतलब है कि अब कोई अफसर अपनी मर्जी से किसी शरीफ व्यापारी को जालसाज बताकर डरा-धमका नहीं सकेगा। आपको बता दें कि 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापार को आसान बनाने का फैसला लिया गया था।
उसी फैसले पर अमल करते हुए 27 अक्टूबर को सरकार ने यह सर्कुलर जारी कर दिया है। इसमें रजिस्ट्रेशन और नोटिस के अलावा अपील की फीस जमा करने की प्रक्रिया सरल बनाने और रिफंड प्रक्रिया तेज करने जैसे कुल आठ बड़े नियम शामिल किए गए हैं।
कब से लागू होंगे यह नियम
वहीं काउंसिल के जिन फैसलों के लिए जीएसटी कानून में संशोधन की जरूरत है, वे 1 अप्रैल से लागू होंगे। लेकिन राहत देने वाले यह आठ सर्कुलर सीधे 1 नवंबर से ही लागू हो रहे हैं।
इससे यह साफ झलकता है कि सरकार ने अफसरशाही को सख्त संदेश दे दिया है कि ईमानदार कारोबारियों को डराना बंद किया जाए।
जानें पूरा मामला
जीएसटी काउंसिल लंबे समय से व्यापार को आसान बनाने और अफसरशाही की मनमानी पर लगाम कसने के लिए सुधारों पर काम कर रही थी। 8 अक्टूबर की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर 27 अक्टूबर को जारी सर्कुलर के जरिए यह बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर देशभर के छोटे-बड़े व्यापारियों पर पड़ेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- 1 नवंबर से GST रजिस्ट्रेशन और नोटिस भेजने के सारे नियम बदल जाएंगे।
- को-वर्किंग स्पेस वाले स्टार्टअप्स को अब सिर्फ मेंबरशिप कॉपी दिखानी होगी।
- आधार से रजिस्ट्रेशन पर अब बेवजह फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं होगा।
- बिना ठोस सबूत और सीनियर अफसर की मंजूरी के फ्रॉड नोटिस नहीं भेजा जा सकेगा।












