LIVE | ...
सोमवार, 6 जुलाई 2026
🏅 सोना ... | 🥈 चांदी ...
The News Air
📈 NIFTY 50 ... | 🏦 NIFTY BANK ...
No Result
View All Result
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
  • होम
  • राज्य
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
    • बिहार
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • राजस्थान
  • LIVE
  • राष्ट्रीय
  • अंतरराष्ट्रीय
  • पंजाब
  • सियासत
  • बिज़नेस
    • टेक्नोलॉजी
    • नौकरी
  • स्पेशल स्टोरी
  • धर्म
  • खेल
  • मनोरंजन
  • लाइफस्टाइल
    • काम की बातें
    • हेल्थ
  • WEB STORIES
No Result
View All Result
The News Air
No Result
View All Result

The News Air - Breaking News - Diabesity क्या है: Belly Fat से कैसे बढ़ता है Diabetes का खतरा, डॉक्टर्स ने बताया पूरा सच

Diabesity क्या है: Belly Fat से कैसे बढ़ता है Diabetes का खतरा, डॉक्टर्स ने बताया पूरा सच

तोंद सिर्फ दिखने की समस्या नहीं, यह एक साइलेंट मेटाबॉलिक वार्निंग है जो डायबिटीज, हार्ट अटैक और कई गंभीर बीमारियों की जड़ है, जानिए एक्सपर्ट्स से बचाव के उपाय

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
गुरूवार, 19 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, हेल्थ
A A
0
Diabetes
104
SHARES
691
VIEWS
ShareShareShareShareShare

Diabesity एक ऐसा शब्द है जो आजकल डॉक्टर्स के बीच तेजी से चर्चा में है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसे पहली बार सुना होगा। यह कोई नई बीमारी नहीं है, बल्कि Diabetes और Obesity यानी मोटापे के बीच के खतरनाक संबंध को दर्शाने वाला शब्द है। यह एक साइलेंट एपिडेमिक है जो हम सबकी नजरों के सामने होने के बावजूद छिपी हुई है। SGPGIMS लखनऊ की एंडोक्राइनोलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अंबिका टंडन, देहरादून की सीनियर कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टर सोनल श्रीवास्तव और जयपुर की कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉक्टर सुचित्रा यादव ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है, जो हर उस व्यक्ति के लिए जानना जरूरी है जिसका पेट बाहर निकला हुआ है।

Diabesity क्या है: सिर्फ मोटापा नहीं, यह एक मेटाबॉलिक बम है

डॉक्टर अंबिका टंडन के अनुसार Diabesity दो शब्दों से मिलकर बना है: Diabetes + Obesity। यह शब्द इसलिए बनाया गया है क्योंकि डायबिटीज और मोटापे के बीच एक गहरा लिंक पाया गया है। जो लोग ओवरवेट या ओबीस होते हैं, उन्हें डायबिटीज होने का रिस्क काफी ज्यादा होता है। लेकिन यह रिस्क खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा होता है जिनके पेट के आसपास मोटापा होता है।

हालांकि डॉक्टर अंबिका ने यह भी स्पष्ट किया कि हर मोटे व्यक्ति को Diabesity है, यह जरूरी नहीं। Diabesity का मतलब सिर्फ वजन ज्यादा होना नहीं है। इसका मतलब है कि जिन लोगों को मोटापा है और उसकी वजह से उन्हें कुछ मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स हो रही हैं, जो धीरे-धीरे शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर रहे हैं, उसे Diabesity कहा जाता है।

Belly Fat क्यों है सबसे खतरनाक: विसरल फैट की कहानी

डॉक्टर सोनल श्रीवास्तव ने बताया कि मोटापे के दो प्रकार होते हैं: मेटाबॉलिकली हेल्दी और मेटाबॉलिकली अनहेल्दी। जिन लोगों के पेट पर ज्यादा फैट जमा होता है, जिसे विसरल फैट (Visceral Fat) या सेंट्रल ओबेसिटी (Central Obesity) कहते हैं, वे मेटाबॉलिकली अनहेल्दी होते हैं। भले ही उनका बाकी शरीर मोटा न हो, लेकिन सिर्फ पेट का मोटापा ही उन्हें खतरे में डाल देता है। इन्हें “मेटाबॉलिकली अनहेल्दी नॉन ओबीस” कहा जाता है।

Diabesity को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि शरीर में दो तरह का फैट होता है: विसरल फैट और सबकटेनियस फैट। विसरल फैट पेट के अंदर के ऑर्गन्स जैसे लिवर और पैंक्रियाज के आसपास जमा होता है। यह फैट इनफ्लेमेशन पैदा करता है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक सिंड्रोम के सारे कॉम्प्लिकेशंस पैदा होते हैं। इसलिए वजन से ज्यादा यह मायने रखता है कि फैट कहां जमा है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस: Diabesity का असली खलनायक

डॉक्टर सुचित्रा यादव ने समझाया कि जब पेट पर चर्बी जमा होती है, तो शरीर के दो मुख्य ऑर्गन जो मेटाबॉलिज्म कंट्रोल करते हैं, लिवर और पैंक्रियाज, उनके आसपास फैट जमा हो जाता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस होती है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस का मतलब है कि शरीर में इंसुलिन तो सही मात्रा में बन रहा है, लेकिन सेल्स उसे रिकॉग्नाइज नहीं कर पा रहे हैं। जिसकी वजह से ब्लड शुगर बढ़ सकती है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और इनफ्लेमेशन बढ़ सकती है। ये सारी चीजें बढ़ने से हार्ट अटैक का रिस्क भी काफी बढ़ जाता है। यही Diabesity का सबसे खतरनाक पहलू है।

बिना लक्षण के भी हो सकती है Diabesity: सबसे बड़ा मिथक

डॉक्टर अंबिका ने एक बहुत अहम बात बताई जो Diabesity के बारे में लोगों की सबसे बड़ी गलतफहमी है। उन्होंने कहा कि रोजाना मरीज आते हैं और कहते हैं कि उन्हें तो कोई प्रॉब्लम महसूस ही नहीं होती, तो बीमारी कैसे हो सकती है?

सच्चाई यह है कि जब डायबिटीज या मोटापा शुरू होता है, तो शुरुआत में इसके कोई भी लक्षण महसूस नहीं होते। जब शुगर एक निश्चित स्तर से ऊपर चला जाता है, तभी ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना और थकान जैसे लक्षण सामने आते हैं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। इसीलिए डॉक्टर्स का कहना है कि जिन लोगों को मोटापा है, उन्हें जल्दी से जल्दी शुगर, लिवर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए ताकि Diabesity को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

कैसे मापें कि आपको सेंट्रल ओबेसिटी है या नहीं?

डॉक्टर सुचित्रा ने Diabesity से जुड़ी सेंट्रल ओबेसिटी मापने का सबसे आसान तरीका बताया। सुबह खाली पेट उठकर नाभि के लेवल पर वेस्ट सरकमफ्रेंस यानी कमर का घेरा मापें।

भारतीय लोगों के लिए मानक यह है: पुरुषों में 90 सेंटीमीटर से ज्यादा और महिलाओं में 80 सेंटीमीटर से ज्यादा अगर कमर का घेरा है, तो यह सेंट्रल ओबेसिटी का संकेत है। इसका मतलब है कि आपके शरीर में विसरल फैट ज्यादा है और इंसुलिन रेजिस्टेंस का रिस्क बढ़ा हुआ है।

हालांकि डॉक्टर सुचित्रा ने यह भी कहा कि सिर्फ तोंद होने से यह कंफर्म नहीं होता कि आपको डायबिटीज होगी ही। इसके साथ अन्य रिस्क फैक्टर्स भी मायने रखते हैं जैसे: फैमिली हिस्ट्री, सेडेंटरी लाइफस्टाइल (हफ्ते में 150 मिनट से कम एक्सरसाइज), बाहर का ज्यादा खाना, और 6 घंटे से कम नींद लेना।

जींस से ज्यादा लाइफस्टाइल है जिम्मेदार

Diabesity के बारे में एक और अहम सवाल उठता है: अगर परिवार में यह समस्या रही है, तो क्या इससे बचा जा सकता है? डॉक्टर अंबिका ने इसका बेहद स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जींस एक रिस्क फैक्टर जरूर है, लेकिन फाइनल फैसला लाइफस्टाइल करता है।

आज के दौर में एक चिंताजनक ट्रेंड देखा जा रहा है। अगर किसी के माता-पिता को 50 साल की उम्र में डायबिटीज हुई थी, तो उनके बच्चों में यह 35 से 40 साल की उम्र में ही हो रही है। इसका सबसे बड़ा कारण बदला हुआ लाइफस्टाइल है। पहले की पीढ़ी ज्यादा शारीरिक मेहनत करती थी, चलती-फिरती थी। आज एक्सरसाइज कम हो गई है, खानपान पूरी तरह बदल गया है। लेकिन अगर लाइफस्टाइल सुधार लिया जाए, तो Diabesity को रोका भले ही न जा सके, लेकिन काफी देर तक टाला जरूर जा सकता है।

स्ट्रेस कैसे बनता है Belly Fat और Diabetes की विशेस साइकिल

डॉक्टर अंबिका ने Diabesity में स्ट्रेस की भूमिका को भी विस्तार से समझाया। जब किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बहुत ज्यादा स्ट्रेस होता है, तो शरीर में कॉर्टिसॉल नाम का हार्मोन बढ़ जाता है। यह कॉर्टिसॉल चर्बी को पेट में जमा कराता है।

जब पेट के आसपास ज्यादा चर्बी जमा होती है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस होती है। इंसुलिन अपना काम नहीं कर पाती, ग्लूकोज को डिस्पोज नहीं कर पाती, जिससे शुगर बढ़ती है। शुगर बढ़ना अपने आप में एक स्ट्रेस है, जिससे फिर कॉर्टिसॉल बढ़ता है और फिर बेली फैट जमा होता है। यह एक विशेस साइकिल बन जाती है, जिसमें स्ट्रेस, बेली फैट और डायबिटीज एक-दूसरे को बढ़ाते रहते हैं।

मेटाबॉलिज्म स्लो होने के लक्षण: शरीर देता है ये इशारे

डॉक्टर सोनल ने बताया कि मेटाबॉलिज्म शरीर की वह प्रक्रिया है जो निर्धारित करती है कि शारीरिक क्रियाएं कितनी प्रभावी ढंग से चलेंगी। जब मेटाबॉलिज्म स्लो होता है, तो Diabesity का खतरा बढ़ जाता है और शरीर कई संकेत देता है:

कम खाना खाकर भी वजन बढ़ना, बहुत मेहनत करने पर भी वजन कम न होना, खासतौर पर बेली फैट बढ़ जाना, सुबह उठकर भी थकान महसूस होना जैसे नींद पूरी ही नहीं हुई, पूरे दिन बहुत ज्यादा फटीग लगना, बॉडी पेन और जॉइंट पेन होना, त्वचा पतली हो जाना, हेयर फॉल या बालों का पतला होना, मूड स्विंग्स होना, और मसल लॉस होना। अगर आपको ये लक्षण दिख रहे हैं, तो यह आपके मेटाबॉलिज्म के स्लो होने का संकेत है।

क्या सेंट्रल ओबेसिटी पूरी तरह ठीक हो सकती है?

डॉक्टर सोनल ने Diabesity से जुड़ी सेंट्रल ओबेसिटी के बारे में एक उम्मीद भरी बात बताई। उन्होंने कहा कि विसरल फैट एक मेटाबॉलिकली और एंडोक्राइनोलॉजिकली एक्टिव ऑर्गन की तरह है, जिसमें से हार्मोंस और इनफ्लेमेटरी केमिकल्स निकलते हैं। जिस तरह से यह बनता है, उसी तरह से यह घट भी सकता है।

अगर माइल्ड से मॉडरेट सेंट्रल ओबेसिटी है, तो यह पूरी तरह ठीक की जा सकती है। सीवियर मामलों में काफी हद तक कम की जा सकती है। सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ 5 से 10% वजन कम करने से भी मेटाबॉलिक कॉम्प्लिकेशंस में जबरदस्त सुधार देखने को मिलता है। डायबिटीज का रिस्क घटता है, कोलेस्ट्रॉल कम होता है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है और हार्ट की रिस्क भी कम होती है।

सेंट्रल ओबेसिटी कम करने में लोग करते हैं ये बड़ी गलतियां

डॉक्टर सुचित्रा ने Diabesity और सेंट्रल ओबेसिटी को कम करने के दौरान लोगों द्वारा की जाने वाली आम गलतियों के बारे में बताया:

पहली गलती: क्रैश डाइट। लोग अपना कैलोरी इंटेक इतना कम कर देते हैं कि यह प्रतिदिन 1200 किलो कैलोरी से भी नीचे चला जाता है। इससे मेटाबॉलिज्म 15 से 20% तक स्लो हो जाता है और मसल लॉस होने लगता है, जो मेटाबॉलिज्म को और धीमा कर देता है।

दूसरी गलती: सिर्फ कार्डियो पर निर्भर रहना। बहुत से लोग सिर्फ रनिंग, जॉगिंग या साइकिलिंग करते हैं और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग को शामिल नहीं करते। सेंट्रल ओबेसिटी कम करने के लिए रेजिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वेट्स के साथ एक्सरसाइज बेहद जरूरी है।

तीसरी गलती: स्पॉट रिडक्शन का भरोसा। लोग सोचते हैं कि सिर्फ क्रंचेज या एब्स की कोई खास एक्सरसाइज करने से पेट का फैट कम हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि पूरी बॉडी का फैट जब कम होता है, तभी पेट का फैट भी कम होता है। इसके लिए कैलोरी डेफिसिट डाइट और एक कॉम्प्रिहेंसिव एक्सरसाइज प्लान दोनों जरूरी हैं।

यह भी पढे़ं 👇

history

5 July History: इस दिन बदल गई दुनिया, न्यूटन से लेकर Amazon तक की कहानी

रविवार, 5 जुलाई 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

रविवार, 5 जुलाई 2026
rain

बड़ी चेतावनी: Heavy Rainfall Alert, गुजरात-महाराष्ट्र में 7 जुलाई तक भारी बारिश

रविवार, 5 जुलाई 2026
Breaking News Live Updates 5 July 2026

Breaking News Live Updates 5 July 2026: Big Headlines, हर अपडेट सबसे तेज

रविवार, 5 जुलाई 2026
घर पर ऐसे करें अपनी Diabesity स्क्रीनिंग

डॉक्टर सोनल ने Diabesity से बचाव के लिए घर पर किए जा सकने वाले आसान चेक्स बताए जो हर व्यक्ति को नियमित रूप से करने चाहिए:

पहला: वजन चेक करें। अगर आप ओवरवेट हैं तो हर हफ्ते, और नॉर्मल वेट हैं तो हर महीने अपना वजन चेक करें। यह सुबह नाश्ते से पहले करें। अगर एक साल में 5 किलो वजन बढ़ जाए, तो यह रैपिड वेट गेन है और रेड फ्लैग है।

दूसरा: कमर का घेरा मापें। एक साधारण मेजरिंग टेप से, आखिरी पसली और हिप बोन के बीच में, बिल्कुल बीचों-बीच मापें। महिलाओं में 80 सेंटीमीटर और पुरुषों में 90 सेंटीमीटर से ज्यादा होने पर यह Diabesity का रेड फ्लैग है।

तीसरा: ब्लड प्रेशर चेक करें। 35 से ऊपर की उम्र के लोगों को नियमित रूप से BP चेक करना चाहिए। 130/85 से ऊपर होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

चौथा: गर्दन के पीछे की त्वचा देखें। अगर गर्दन के पीछे या बगल में त्वचा काली हो रही है, या छोटे-छोटे स्किन टैग्स (मस्से जैसे) निकल रहे हैं, तो यह एकेंथोसिस कहलाता है जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का बहुत बड़ा मार्कर है।

लैब टेस्ट: 35 साल से ऊपर के लोगों को हर साल लिपिड प्रोफाइल, फास्टिंग शुगर, HbA1c, लिवर फंक्शन टेस्ट और थायरॉइड फंक्शन टेस्ट जरूर कराना चाहिए।

एक्सपर्ट्स की सलाह: Diabesity से बचाव के लिए क्या करें

डॉक्टर सुचित्रा ने Diabesity से बचाव के लिए एक कॉम्प्रिहेंसिव प्लान बताया जिसे हर व्यक्ति फॉलो कर सकता है। प्रतिदिन 500 कैलोरी का डेफिसिट मेंटेन करें, एकदम से खाना कम न करें। प्रोटीन का सेवन 1.2 से 1.6 ग्राम प्रति किलो वजन के हिसाब से रखें। रोज 7 से 9 घंटे की नींद लें और समय पर सोएं-जागें। बाहर का खाना, पैक्ड फूड, प्रोसेस्ड फूड जैसे ब्रेड, बिस्किट, कोल्ड ड्रिंक, मीठी और तली हुई चीजें अवॉइड करें। हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करें। हफ्ते में तीन दिन रेजिस्टेंस ट्रेनिंग यानी वेट्स के साथ एक्सरसाइज जरूर करें। हाईली रिफाइंड कार्ब्स से बचें और कुल कैलोरी इंटेक पर नजर रखें।

डॉक्टर सुचित्रा ने आखिर में एक बहुत जरूरी बात कही: जब भी आप अपना पेट कम करने की सोचें, तो सिर्फ लुक्स के लिए न सोचें। यह सोचें कि आप अपनी बहुत सी बीमारियों का रिस्क कम कर रहे हैं। तोंद सिर्फ दिखने की समस्या नहीं है, यह गंभीर बीमारियों की जड़ है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • Diabesity डायबिटीज और मोटापे के बीच का खतरनाक लिंक है, जिसमें विसरल फैट (Belly Fat) इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करके डायबिटीज, हार्ट अटैक और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का रिस्क बढ़ाता है।
  • कमर का घेरा पुरुषों में 90 सेमी और महिलाओं में 80 सेमी से ज्यादा होने पर सेंट्रल ओबेसिटी का संकेत है, सिर्फ 5-10% वजन कम करने से भी मेटाबॉलिक स्थिति में बड़ा सुधार होता है।
  • क्रैश डाइट से मेटाबॉलिज्म 15-20% स्लो हो जाता है, स्पॉट रिडक्शन एक मिथक है, सेंट्रल ओबेसिटी कम करने के लिए रेजिस्टेंस ट्रेनिंग जरूरी है।
  • स्ट्रेस से कॉर्टिसॉल बढ़ता है जो पेट में चर्बी जमा कराता है, यह बेली फैट-डायबिटीज की विशेस साइकिल बनाता है; गर्दन पीछे कालापन इंसुलिन रेजिस्टेंस का बड़ा मार्कर है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: Diabesity क्या होती है और यह कैसे पहचानें?

Diabesity डायबिटीज और ओबेसिटी (मोटापा) के बीच के लिंक को दर्शाने वाला शब्द है। अगर आपके पेट के आसपास ज्यादा चर्बी है (पुरुषों में कमर 90 सेमी से ज्यादा, महिलाओं में 80 सेमी से ज्यादा), गर्दन के पीछे त्वचा काली हो रही है, या बिना कारण वजन बढ़ रहा है, तो यह Diabesity का संकेत हो सकता है।

Q2: क्या सिर्फ पेट की एक्सरसाइज करने से बेली फैट कम होता है?

नहीं, यह एक मिथक है। स्पॉट रिडक्शन संभव नहीं है। पूरी बॉडी का फैट जब कम होता है तभी पेट का फैट भी कम होता है। इसके लिए कैलोरी डेफिसिट डाइट के साथ-साथ कार्डियो और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग दोनों जरूरी हैं।

Q3: Belly Fat कम करने के लिए रोजाना कितनी एक्सरसाइज करनी चाहिए?

डॉक्टर्स के अनुसार हफ्ते में कम से कम 150 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज (जैसे ब्रिस्क वॉकिंग, जॉगिंग) और सप्ताह में 3 दिन रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (वेट्स के साथ एक्सरसाइज) करनी चाहिए। रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करने से विसरल फैट कम करने में काफी मदद मिलती है।

ताज़ा खबरों के लिए हमसे जुड़ें
Google News
WhatsApp
Telegram
Previous Post

France Economic Crisis: कैसे दुनिया के सबसे अमीर देश ने अपनी Economy तबाह कर ली, चौंकाने वाला खुलासा

Next Post

Knee Pain Ayurvedic Kadha: घुटनों के दर्द में राजीव दीक्षित ने बताया पारिजात का चमत्कारी काढ़ा

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

Related Posts

history

5 July History: इस दिन बदल गई दुनिया, न्यूटन से लेकर Amazon तक की कहानी

रविवार, 5 जुलाई 2026
Breaking News Live Updates

Breaking News Live Updates: आज की हर बड़ी खबर, हर पल अपडेट

रविवार, 5 जुलाई 2026
rain

बड़ी चेतावनी: Heavy Rainfall Alert, गुजरात-महाराष्ट्र में 7 जुलाई तक भारी बारिश

रविवार, 5 जुलाई 2026
Breaking News Live Updates 5 July 2026

Breaking News Live Updates 5 July 2026: Big Headlines, हर अपडेट सबसे तेज

रविवार, 5 जुलाई 2026
Aaj Ka Rashifal

आज का राशिफल 5 July 2026: रविवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत

रविवार, 5 जुलाई 2026
Diljit Dosanjh Satluj

Diljit Dosanjh की Satluj रिलीज, 25,000 अवैध हत्याओं की कहानी

शनिवार, 4 जुलाई 2026
Next Post
Knee Pain Ayurvedic Kadha

Knee Pain Ayurvedic Kadha: घुटनों के दर्द में राजीव दीक्षित ने बताया पारिजात का चमत्कारी काढ़ा

Chaitra Navratri 2026

Chaitra Navratri 2026: कल से शुरू, घट स्थापना का मुहूर्त सिर्फ 50 मिनट, जानें पूरी पूजा विधि

Land Registry New Rule

Land Registry New Rule: 1 अप्रैल से बदलेगा जमीन रजिस्ट्री का नियम, Time Slot मिस किया तो नहीं होगी रजिस्ट्री

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

The News Air

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।

Google News Follow us on Google News

  • About
  • Editorial Policy
  • Privacy & Policy
  • Disclaimer & DMCA Policy
  • Contact

हमें फॉलो करें

No Result
View All Result
  • प्रमुख समाचार
    • राष्ट्रीय
    • अंतरराष्ट्रीय
    • सियासत
  • राज्य
    • पंजाब
    • चंडीगढ़
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
    • नई दिल्ली
    • महाराष्ट्र
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • उत्तराखंड
    • मध्य प्रदेश
    • राजस्थान
  • काम की बातें
  • नौकरी
  • बिज़नेस
  • टेक्नोलॉजी
  • मनोरंजन
  • धर्म
  • हेल्थ
  • स्पेशल स्टोरी
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
  • WEB STORIES

© 2026 The News Air | सटीक समाचार। सर्वाधिकार सुरक्षित।