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The News Air - Breaking News - Chandra Grahan 2026: चंद्रग्रहण में गर्भवती महिलाएं इन कामों से बचें!

Chandra Grahan 2026: चंद्रग्रहण में गर्भवती महिलाएं इन कामों से बचें!

3 मार्च 2026 को साल का पहला Lunar Eclipse भारत में दिखेगा - सूतक काल मान्य, दोपहर 3:19 से शाम 6:47 तक रहेगा ग्रहण, गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष परहेज जरूरी

अभिनव कश्यप by अभिनव कश्यप
मंगलवार, 3 मार्च 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, धर्म
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Chandra Grahan 2026
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Chandra Grahan 2026 Pregnant Women Precautions : 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है और यह ग्रहण भारत में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3:19 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक रहेगा। चूँकि यह भारत में दृश्य है, इसलिए इसका सूतक काल भी पूरी तरह मान्य होगा। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि परंपरागत मान्यताओं में इसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी माना जाता है।


सूतक काल — जब मंदिरों के पट हो जाते हैं बंद

ग्रहण से करीब 9 घंटे पहले ही सूतक काल शुरू हो जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी शुभ कार्य से दूरी बनाई जाती है। इस पूरे समय को ईश्वर की आराधना, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप के लिए उपयुक्त माना गया है।

बुजुर्ग और बीमार लोग सुबह के समय हल्का भोजन कर सकते हैं, लेकिन दिन और शाम के समय संयम बरतना और ध्यान-साधना में मन लगाना अधिक उचित बताया गया है।

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गर्भवती महिलाओं के लिए क्या हैं परहेज

परंपरागत मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को कुछ खास बातों का ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भोजन पकाने और खाने से बचना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करके ही भोजन करना उचित माना गया है।

इसके साथ ही सुई, चाकू और कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का उपयोग करने से भी मना किया जाता है। सिलाई और कढ़ाई जैसे काम भी इस दौरान नहीं करने की सलाह दी जाती है। चंद्रमा की सीधी रोशनी में जाने से बचें और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें — यह सब परंपरागत सावधानियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं।


केवल परहेज नहीं, आध्यात्मिक साधना का भी समय

ज्योतिष विद्वानों का कहना है कि ग्रहण का यह समय केवल परहेज का नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर है। इस दौरान अपने इष्टदेव का स्मरण करें, मंत्र जाप करें और सकारात्मक सोच बनाए रखें। चंद्रदेव से जुड़े मंत्रों का उच्चारण मानसिक शांति प्रदान करता है और वातावरण की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक माना जाता है।


एक पारंपरिक उपाय जो सदियों से चला आ रहा है

एक पुराने और प्रचलित पारंपरिक उपाय के रूप में गर्भवती महिला अपनी लंबाई के बराबर एक धागा लेकर घर में रख सकती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद उस धागे को बहते जल में प्रवाहित कर दें। मान्यता है कि इस उपाय से नकारात्मकता दूर होती है और गर्भ में पल रहे शिशु पर किसी प्रकार का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता।


आस्था और परंपरा का संगम है चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण भारतीय संस्कृति में केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, ज्योतिषीय महत्व और पारंपरिक परहेज का एक संपूर्ण संगम है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए बताई गई सावधानियाँ सदियों पुरानी परंपराओं पर आधारित हैं। चाहे वैज्ञानिक दृष्टिकोण हो या आध्यात्मिक — इस अवसर पर सतर्कता और मन की शांति दोनों ही जरूरी हैं।


क्या है पृष्ठभूमि

भारत में चंद्रग्रहण का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। जब भी कोई ग्रहण भारत में दृश्य होता है, तो उसका सूतक काल स्वतः मान्य हो जाता है। 3 मार्च 2026 का यह ग्रहण साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण है जो भारत में पूरी तरह दिखाई देगा। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण की ऊर्जा में विशेष परिवर्तन होता है, इसलिए इस दौरान सावधानी बरतना आवश्यक बताया जाता है।


मुख्य बातें (Key Points)
  • 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण, दोपहर 3:19 से शाम 6:47 तक रहेगा।
  • भारत में दृश्य होने के कारण सूतक काल मान्य रहेगा, ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू।
  • गर्भवती महिलाएं भोजन पकाने, नुकीली वस्तुओं और घर से बाहर जाने से बचें।
  • मंत्र जाप, भजन-कीर्तन और इष्टदेव का स्मरण इस समय लाभकारी माना गया है।
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अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप

अभिनव कश्यप 'The News Air' के संस्थापक और मुख्य संपादक (Chief Editor) हैं। डिजिटल मीडिया में उनके अनुभव में ग्राउंड रिपोर्टिंग, न्यूज़ डेस्क ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप शामिल है। वे हर खबर की फैक्ट-चेकिंग और संपादन की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करते हैं। राजनीति, चुनाव विश्लेषण, सामाजिक मुद्दे और डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स उनकी विशेषज्ञता के प्रमुख क्षेत्र हैं। अभिनव का संपादकीय सिद्धांत है "सनसनी नहीं, सच्चाई; तेज़ी नहीं, तथ्य।"

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