Central Pivot Irrigation System Punjab के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पंजाब के भूमि एवं जल संरक्षण, खान एवं भू-विज्ञान तथा जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बुधवार को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना में उत्तरी भारत की पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली (Central Pivot Irrigation System) का उद्घाटन किया। नाबार्ड की वित्तीय सहायता से स्थापित यह अत्याधुनिक स्वचालित सिंचाई तकनीक पूरे उत्तरी भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना है।
एक चक्र में 3 एकड़ की सिंचाई, बिना किसी मजदूर के
Central Pivot Irrigation System Punjab की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूर्णतः स्वचालित सिंचाई समाधान प्रदान करती है। इस प्रणाली को किसी भी मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होती। किसान को बस आवश्यक डेटा दर्ज करना होता है और 3 एकड़ के पूरे खेत की सटीक सिंचाई केवल एक चक्र में पूरी हो जाती है।
मंत्री गोयल ने कहा कि यह तकनीक विशेष रूप से पंजाब के उन खेतों के लिए वरदान साबित होगी जो श्रमिकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जहां पारंपरिक सिंचाई में कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब यह पूरा काम बिना किसी मजदूर के एक मशीन से हो जाएगा।
AI और नवाचार अपनाने की अपील
इस अवसर पर बोलते हुए कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने वैज्ञानिकों, अधिकारियों और विद्यार्थियों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उभरते युग में नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने और अत्याधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने पंजाब में भूजल की नाजुक स्थिति को उजागर करते हुए जल संरक्षण के लिए आधुनिक सिंचाई तरीकों को बढ़ावा देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।
60 मीटर लंबी स्वचालित आर्म से गोलाकार सिंचाई
मुख्य मिट्टी संरक्षण अधिकारी महिंदर सिंह सैनी ने Central Pivot Irrigation System Punjab की तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस सिस्टम में उल्टे स्प्रिंकलर 60 मीटर लंबी आर्म पर लगाए गए हैं, जो एक केंद्रीय धुरी बिंदु के चारों ओर घूमते हैं और बिना किसी मानवीय श्रम के 3 एकड़ के गोलाकार क्षेत्र की सिंचाई करते हैं।
उन्होंने बताया कि यह प्रणाली जल उपयोग दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाती है, फसल उत्पादन बढ़ाती है और पूरे राज्य में आधुनिक सिंचाई पद्धतियों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य करेगी।
भूजल संरक्षण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता
मंत्री गोयल ने पंजाब सरकार की भूजल संरक्षण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कृषि में सतही जल के उपयोग को बढ़ाने के लिए किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस अग्रणी प्रदर्शन परियोजना के लिए मृदा एवं जल संरक्षण विभाग की प्रशंसा की और नाबार्ड को वित्तीय सहायता देने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने पंजाब के कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं पर भी प्रकाश डाला और इस प्रकार की नवाचारी पहलों के लिए पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।
पंजाब के किसानों के लिए क्यों जरूरी है यह तकनीक
पंजाब में लगातार गिरता भूजल स्तर एक गंभीर संकट बन चुका है। राज्य के अधिकांश खेतों में टयूबवेल के जरिए ही सिंचाई होती है, जिससे भूजल का भारी दोहन हो रहा है। Central Pivot Irrigation System Punjab जैसी आधुनिक तकनीक न सिर्फ पानी की बचत करती है बल्कि पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में काफी कम पानी में बेहतर फसल उत्पादन देती है। PAU में स्थापित यह प्रदर्शन मॉडल पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणा बनेगा।
इस अवसर पर PAU के वाइस चांसलर डॉ. सतबीर सिंह गोसल, डीजीएम नाबार्ड अमित गर्ग, प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
मुख्य बातें (Key Points)
- PAU लुधियाना में उत्तरी भारत की पहली केंद्रीय धुरवी सिंचाई प्रणाली का उद्घाटन, NABARD की सहायता से स्थापित
- 60 मीटर लंबी स्वचालित आर्म से एक चक्र में 3 एकड़ की सिंचाई, मजदूर की जरूरत नहीं
- मंत्री गोयल ने AI और नवाचार अपनाने की अपील, भूजल संरक्षण पर दिया जोर
- पंजाब के गिरते भूजल स्तर से निपटने में यह तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित होगी











