CBI Raid On Punjab CM OSD Rajbir Ghuman –CBI की टीमों ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ शिकंजा पूरी तरह से कस दिया है। आज शाम जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने Chandigarh के सेक्टर 2 स्थित मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस, राजबीर सिंह घुम्मन की गांव घराचों स्थित रिहाइश और Mohali के फेज़ 11 में उनके एक करीबी रिश्तेदार के निजी मकान पर एक साथ छापेमारी की।
देखा जाए तो सीबीआई की इस आक्रामक कार्रवाई के बाद से ही पंजाब का राजनीतिक तापमान अचानक से काफी बढ़ गया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो चुकी हैं।
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‘ट्रांसफर-पोस्टिंग और टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप’
दरअसल मामला बेहद गंभीर है। Punjab and Haryana High Court ने हाल ही में राज्य में सरकारी तबादलों व पोस्टिंग में कथित लेन-देन, मनमाफिक नीतियां बनाने और सरकारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।
अदालत ने केंद्रीय जांच एजेंसी को तुरंत एफआईआर दर्ज कर मामले की गहराई से जांच शुरू करने और दो महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने का सख्त आदेश दिया था। इस पूरे मामले पर अब अगली अहम सुनवाई 7 दिसंबर को होनी तय हुई है।
अदालत के निर्देश और छापेमारी की स्थिति
| बिंदु | विवरण |
| छापेमारी के मुख्य स्थान | सीएम कैंप ऑफिस (सेक्टर 2, चंडीगढ़), गांव घराचों रिहाइश, फेज़ 11 मोहाली |
| मुख्य आरोपी/अधिकारी | राजबीर सिंह घुम्मन (मुख्यमंत्री के ओएसडी) |
| जांच का कानूनी आधार | PMLA की धारा 66(2) के तहत ED द्वारा साझा जानकारी के आधार पर FIR |
| अदालती समय-सीमा | 2 महीने के भीतर CBI को रिपोर्ट सौंपने का आदेश (अगली सुनवाई 7 दिसंबर) |
| पंजाब सरकार का अगला कदम | सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का फैसला |
‘हाईकोर्ट का कड़ा रुख और पुलिस जांच पर गंभीर टिप्पणी’
अगर गौर करें तो उच्च न्यायालय की पीठ ने स्पष्ट कहा है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पंजाब पुलिस को सीबीआई के साथ पूरा सहयोग करना होगा। हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 66(2) के तहत साझा की गई पुख्ता जानकारियों को आधार बनाते हुए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
समझने वाली बात यह है कि सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने Punjab सरकार की उस अर्जी को पूरी तरह से खारिज कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता की योग्यता पर सवाल खड़े किए गए थे। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा याचिकाकर्ता निखिल सराफ की निजी संपत्ति को बुलडोजर से ढहाने की कार्रवाई को साफ तौर पर ‘बदलाखोरी’ करार दिया।
और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि ‘पंजाब ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन’ द्वारा इस मामले को शुरुआती जांच के नाम पर जानबूझकर लटकाया गया था: और ऐसा केवल सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने व दोषियों को बचाने के इरादे से किया गया था।
‘सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में राज्य सरकार’
दूसरी ओर, इस पूरी अदालती कार्रवाई और सीबीआई रेड के बाद राज्य सरकार ने भी कानूनी लड़ाई तेज कर दी है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को Supreme Court में चुनौती देने का फैसला किया है।
चंडीगढ़ में पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों से रूबरू होते हुए वित्त मंत्री Harpal Singh Cheema ने साफ किया कि राज्य में पिछली सरकारों द्वारा सीबीआई के सीधे हस्तक्षेप पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है। इसी पुरानी नीति को कानूनी आधार बनाकर सरकार शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और सीबीआई जांच का कड़ा विरोध करेगी।
‘जानें क्या है पूरा मामला’
पंजाब में सरकारी नौकरियों के तबादलों, मनपसंद पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों में हेरफेर और सरकारी टेंडरों में रिश्वतखोरी को लेकर निखिल सराफ नाम के व्यक्ति द्वारा याचिका दायर की गई थी। इस मामले में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा साझा किए गए इनपुट के बाद हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई को सौंप दी: जिसके बाद आज ओएसडी राजबीर घुम्मन के ठिकानों पर ताबड़तोड़ रेड पड़ी है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
CBI की बड़ी कार्रवाई: पंजाब सीएम के ओएसडी राजबीर घुम्मन के चंडीगढ़, घराचों और मोहाली ठिकानों पर सीबीआई की रेड।
हाईकोर्ट के सख्त आदेश: ट्रांसफर-पोस्टिंग और टेंडर रिश्वत मामले में सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर 2 महीने में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश।
पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी: कोर्ट ने माना कि सबूत मिटाने और आरोपियों को बचाने के लिए शुरुआती जांच में देरी की गई।
सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार: वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राज्य में सीबीआई के सीधे प्रवेश पर रोक के आधार पर शीर्ष अदालत में अपील होगी।












