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The News Air - Breaking News - Bihar Pension Update: 37 लाख पेंशनधारकों को झटका, मार्च से पेंशन रुकी, जीवन प्रमाणीकरण जरूरी

Bihar Pension Update: 37 लाख पेंशनधारकों को झटका, मार्च से पेंशन रुकी, जीवन प्रमाणीकरण जरूरी

मुजफ्फरपुर में 1.74 लाख, पटना में 21,000 का सत्यापन लंबित, बुजुर्गों-विधवाओं-दिव्यांगों में हाहाकार, मृत लोगों के खाते में भी जा रहा पैसा

The News Air Team by The News Air Team
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in Breaking News, NEWS-TICKER, काम की बातें, बिहार
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Bihar Pension Update
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Bihar Pension Life Certificate Update: बिहार में लाखों गरीब, बुजुर्ग, विधवा महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए यह बेहद मुश्किल का समय है। हर महीने उनके खाते में आने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन अचानक रुक गई है। वजह है “जीवन प्रमाणीकरण” (Life Certificate) अपडेट न होना।

देखा जाए तो, राज्यभर में करीब 37 लाख पेंशनधारकों की पेंशन प्रभावित हुई है। सिर्फ मुजफ्फरपुर जिले में अकेले लगभग 1.74 लाख लोगों का भुगतान अटक गया है। पटना में करीब 21,000 लोगों का सत्यापन लंबित है।

सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने मामले को गंभीर मानते हुए बिहार के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेज दिया है। पत्र में साफ कहा गया है कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों का जीवन प्रमाणीकरण लंबित है, इसलिए उनके खाते में पेंशन ट्रांसफर नहीं हो पाई।

समझने वाली बात यह है कि यह पेंशन उन लोगों के लिए जीवनरेखा है। कई बुजुर्गों के लिए यही पेंशन दवा और रोजमर्रा के खर्च का एकमात्र सहारा है। और अब यह सहारा अचानक छीन गया है।

मुजफ्फरपुर में सबसे गंभीर स्थिति – 1.74 लाख प्रभावित

मुजफ्फरपुर जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। यहां लगभग पौने दो लाख (1.74 लाख) लोगों का जीवन प्रमाणीकरण अपडेट नहीं हो पाया है।

हालांकि प्रशासन के अभियान के बाद लगभग 15,000 लोगों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है। लेकिन अब भी 1,74,284 लाभार्थियों का जीवन प्रमाणीकरण अपडेट नहीं हो पाया है।

दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा मामले मुशहरी प्रखंड के सामने आए हैं। यह इलाका आर्थिक रूप से पिछड़ा है और यहां के ज्यादातर लोग पेंशन पर ही निर्भर हैं।

इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने सभी BDO (Block Development Officer) को तुरंत पंचायत स्तर पर शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। इन कैंपों में लाभार्थियों का निःशुल्क जीवन प्रमाणीकरण कराया जाएगा, ताकि जल्द से जल्द रुकी हुई पेंशन दोबारा शुरू की जा सके।

पटना में 21,000 का सत्यापन लंबित – सूबे की राजधानी भी पीछे नहीं

पटना जिला इस मामले में सबसे ऊपर है। राजधानी होने के बावजूद यहां करीब 21,000 पेंशनधारकों का सत्यापन लंबित बताया गया है।

यह चौंकाने वाला है क्योंकि पटना में प्रशासनिक सुविधाएं सबसे ज्यादा हैं। फिर भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सत्यापन नहीं हो पाया।

इसकी कई वजहें हो सकती हैं:
• बुजुर्ग लोग सत्यापन केंद्र तक नहीं पहुंच पाए
• जागरूकता की कमी
• बायोमेट्रिक मशीनों में तकनीकी दिक्कत
• प्रशासनिक लापरवाही

अब सवाल यह है कि अगर राजधानी में यह हाल है, तो दूर-दराज के जिलों में क्या स्थिति होगी?

जीवन प्रमाणीकरण क्या है और क्यों जरूरी?

बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आता कि आखिर यह “जीवन प्रमाणीकरण” है क्या चीज?

दरअसल, सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जिस व्यक्ति के नाम पर पेंशन जारी हो रही है, वह जीवित है या नहीं। इसके लिए बायोमेट्रिक सत्यापन कराया जाता है।

बायोमेट्रिक सत्यापन का मतलब है – अंगूठे के निशान (fingerprint) या अन्य पहचान के जरिए लाभार्थी की पुष्टि हो जाती है। जब मशीन पर अंगूठा लगता है, तो सिस्टम में रिकॉर्ड हो जाता है कि यह व्यक्ति जीवित है।

यह प्रक्रिया हर साल करानी होती है। अगर किसी ने यह नहीं कराया, तो उसकी पेंशन रुक जाती है।

बुजुर्गों और बीमारों के लिए दिक्कत – अंगूठा नहीं पकड़ती मशीन

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई बुजुर्ग और बीमार लोगों को बायोमेट्रिक में दिक्कत आ रही है।

कई बार मशीन अंगूठे के निशान नहीं पकड़ती। खासकर बहुत बूढ़े लोगों में, जिनकी उंगलियों की त्वचा खुरदरी हो गई है, या जिन्हें कुष्ठ रोग जैसी बीमारियां हैं।

कई लाभार्थी कैंप तक नहीं पहुंच पाते। वे बीमार हैं, चल-फिर नहीं सकते, या दूर-दराज के गांव में रहते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) का विकल्प भी रखा है।

यानी अगर किसी पेंशनधारी का बायोमेट्रिक सत्यापन संभव नहीं हो पा रहा, तो अधिकारी व्यक्तिगत जांच और दस्तावेजों के आधार पर जीवन प्रमाणीकरण पूरा कर सकते हैं। इसके बाद जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जाएगी और पेंशन बहाल हो सकेगी।

मृत लोगों के खाते में भी पेंशन जा रही थी – बड़ा खुलासा

इस पूरे अभियान में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। प्रशासन को शक है कि कई ऐसे लोगों के खाते में भी पेंशन जा रही है जिनकी मौत हो चुकी है।

जीवन प्रमाणीकरण के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए। जब अधिकारी गांव में सत्यापन के लिए गए, तो पता चला कि फलां व्यक्ति तो दो साल पहले मर चुका है, लेकिन उसके खाते में अभी भी पेंशन आ रही है।

यह कैसे संभव है? कई बार परिवार वाले मृत व्यक्ति की मौत की सूचना नहीं देते, ताकि पेंशन आती रहे। या फिर भ्रष्ट अधिकारी खुद इसमें शामिल होते हैं।

अब सरकार ने सख्त निर्देश दिया है:

• मृत पेंशनधारकों के नाम के आगे “Death Mark” किया जाए
• अगर किसी मृत व्यक्ति के खाते में गलत तरीके से पेंशन की राशि गई है, तो उसकी वसूली भी शुरू की जाएगी

यानी सरकार अब पेंशन व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की कोशिश में है।

प्रशासन का अभियान – गांव-गांव में शिविर लगाए जाएंगे

प्रशासन ने अधिकारियों से कहा है कि गांव-गांव में इसका प्रचार-प्रसार किया जाए। पंचायत वार रोस्टर तैयार किया जाए और जरूरी कर्मचारियों के साथ Common Service Centre (CSC) के वालंटियर को भी तैनात किया जाए।

योजना यह है कि:

• हर पंचायत में कम से कम एक शिविर लगे
• जो लोग चल-फिर नहीं सकते, उनके घर पर ही टीम जाए
• CSC संचालकों को भी इस काम में लगाया जाए
• मोबाइल बायोमेट्रिक डिवाइस का इस्तेमाल किया जाए

मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी ने सभी BDO को निर्देश दिया है कि तुरंत शिविर शुरू करें और जल्द से जल्द सभी लाभार्थियों का सत्यापन पूरा करें।

पेंशन रुकने से परेशानी – दवा और खाने तक का संकट

जमीनी हकीकत यह है कि कई जरूरतमंद परिवार पेंशन रुकने से मुश्किल में आ गए हैं।

गांव में ऐसे बुजुर्ग भी हैं जिनके लिए यही पेंशन दवा और रोजमर्रा के खर्च का एकमात्र सहारा है। उनके बच्चे या तो नहीं हैं, या फिर गरीबी में खुद जी रहे हैं।

विधवा महिलाओं के लिए तो यह और भी कठिन है। पति की मौत के बाद यही पेंशन उनकी गुजर-बसर का जरिया होती है।

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दिव्यांग लोग भी इसी पेंशन पर निर्भर हैं। वे काम नहीं कर सकते, तो यही पैसा उनकी जिंदगी है।

और अब जब पेंशन रुक गई है, तो कई परिवारों में खाने तक का संकट आ गया है।

37 लाख प्रभावित – राज्यव्यापी समस्या

यह सिर्फ मुजफ्फरपुर या पटना की समस्या नहीं है। पूरे बिहार में करीब 37 लाख पेंशनधारियों की पेंशन प्रभावित हुई है।

यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। 37 लाख का मतलब है:
• 37 लाख परिवार
• करीब 1.5-2 करोड़ लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित
• राज्य की कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा

सवाल उठता है – इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सत्यापन एक साथ कैसे लंबित रह गया? क्या यह प्रशासनिक विफलता नहीं है?

प्रशासन का तर्क यह है कि:
• COVID के बाद से यह प्रक्रिया सख्त की गई है
• पहले भी सत्यापन होता था, लेकिन इतनी सख्ती नहीं थी
• अब डिजिटल सिस्टम है, इसलिए बिना सत्यापन के पेंशन नहीं जा सकती
• यह पारदर्शिता के लिए जरूरी है

लेकिन जमीन पर जो तकलीफ लोगों को हो रही है, उसे नकारा नहीं जा सकता।

कैसे कराएं जीवन प्रमाणीकरण – पूरी प्रक्रिया

अगर आप या आपके परिवार में कोई बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन पा रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि जीवन प्रमाणीकरण कैसे कराएं:

पहला तरीका – शिविर में जाना:
• अपने पंचायत या ब्लॉक में लगने वाले शिविर की जानकारी लें
• अपना आधार कार्ड साथ लेकर जाएं
• वहां बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाएं
• तुरंत सत्यापन हो जाएगा

दूसरा तरीका – CSC सेंटर जाना:
• अपने नजदीकी Common Service Centre जाएं
• CSC संचालक को आधार नंबर दें
• वे आपका बायोमेट्रिक सत्यापन करेंगे
• कुछ शुल्क ले सकते हैं (लेकिन सरकारी शिविरों में निःशुल्क है)

तीसरा तरीका – अगर बायोमेट्रिक नहीं हो रहा:
• अपने पंचायत सेवक या BDO से संपर्क करें
• बताएं कि आप बहुत बूढ़े/बीमार हैं और बायोमेट्रिक नहीं हो पा रहा
• वे आपके घर आकर Physical Verification करेंगे
• दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन पूरा करेंगे

जरूरी दस्तावेज:
• आधार कार्ड (अनिवार्य)
• बैंक पासबुक
• पेंशन का पुराना कार्ड (अगर है)

सरकारी लापरवाही या जरूरी सुधार?

अब सवाल यह है – क्या यह पूरा मामला सरकारी लापरवाही है या फिर एक जरूरी सुधार?

सरकार का पक्ष:
• मृत लोगों के खाते में पेंशन जा रही थी – यह रोकना जरूरी था
• फर्जी लाभार्थी भी थे – उन्हें छांटना जरूरी था
• जीवन प्रमाणीकरण से पारदर्शिता आएगी
• सरकारी पैसा बचेगा और असली जरूरतमंदों को मिलेगा

आलोचकों का पक्ष:
• एक साथ 37 लाख लोगों की पेंशन रोकना क्रूरता है
• बुजुर्गों और बीमारों को इतनी परेशानी क्यों?
• पहले से व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
• अभी भी शिविर पर्याप्त नहीं लग रहे

मेरी राय में, दोनों पक्षों में सच्चाई है। जीवन प्रमाणीकरण जरूरी है, लेकिन इसे और संवेदनशील तरीके से किया जाना चाहिए था।

आगे क्या होगा – कब तक बहाल होगी पेंशन?

प्रशासन का दावा है कि अगले 2-3 हफ्तों में ज्यादातर लोगों का सत्यापन पूरा हो जाएगा।

एक बार सत्यापन होने के बाद:
• जानकारी पोर्टल पर अपडेट होगी
• रुकी हुई पेंशन (मार्च, अप्रैल, मई की) एक साथ खाते में आएगी
• आगे नियमित रूप से हर महीने पेंशन मिलती रहेगी

लेकिन यह तभी संभव है जब:
• हर पंचायत में तुरंत शिविर लगें
• अधिकारी गंभीरता से काम करें
• बायोमेट्रिक की तकनीकी दिक्कतें दूर हों
• जागरूकता बढ़े

मुख्य बातें (Key Points)

• बिहार में 37 लाख पेंशनधारकों की पेंशन रुकी, जीवन प्रमाणीकरण अपडेट न होने से मार्च से भुगतान नहीं हुआ

• मुजफ्फरपुर में सबसे गंभीर: 1.74 लाख का सत्यापन लंबित, मुशहरी प्रखंड में सबसे ज्यादा मामले

• पटना में 21,000 प्रभावित: राजधानी में भी सत्यापन की समस्या, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय ने सभी जिलों को पत्र भेजा

• मृत लोगों के खाते में भी पेंशन: जीवन प्रमाणीकरण में बड़ा खुलासा, अब Death Mark और वसूली की कार्रवाई

• गांव-गांव में शिविर: बायोमेट्रिक या Physical Verification से निःशुल्क सत्यापन, CSC वालंटियर तैनात


FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बिहार में पेंशन क्यों रुक गई है?

बिहार में करीब 37 लाख पेंशनधारकों की पेंशन इसलिए रुक गई है क्योंकि उनका जीवन प्रमाणीकरण (Life Certificate) अपडेट नहीं हुआ। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पेंशन पाने वाला व्यक्ति जीवित है। इसके लिए बायोमेट्रिक या भौतिक सत्यापन जरूरी है। जिन लोगों ने समय पर यह नहीं कराया, उनकी पेंशन मार्च 2025 से रोक दी गई है।

प्रश्न 2: जीवन प्रमाणीकरण कैसे कराएं?

जीवन प्रमाणीकरण तीन तरीकों से कराया जा सकता है: (1) पंचायत/ब्लॉक स्तर पर लगने वाले शिविरों में जाकर निःशुल्क बायोमेट्रिक सत्यापन कराएं, (2) नजदीकी CSC (Common Service Centre) पर जाकर सत्यापन कराएं, (3) अगर बायोमेट्रिक संभव नहीं तो BDO या पंचायत सेवक से संपर्क कर Physical Verification कराएं। आधार कार्ड साथ रखना जरूरी है।

प्रश्न 3: पेंशन कब तक बहाल हो जाएगी?

प्रशासन का दावा है कि अगले 2-3 हफ्तों में ज्यादातर लोगों का सत्यापन पूरा हो जाएगा। एक बार जीवन प्रमाणीकरण होने के बाद पोर्टल पर जानकारी अपडेट होगी और रुकी हुई पेंशन (मार्च, अप्रैल, मई की) एक साथ खाते में आ जाएगी। मुजफ्फरपुर में 15,000 लोगों का सत्यापन पूरा हो चुका है, लेकिन अभी भी 1.74 लाख का काम बाकी है।

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