Driving License Training Mandatory Bihar : अगर आप बिहार में नया ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की तैयारी कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। अब केवल ऑनलाइन आवेदन और ड्राइविंग टेस्ट से काम नहीं चलेगा। राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिसके तहत पहले प्रशिक्षण लेना और उसका प्रमाण पत्र हासिल करना अनिवार्य किया जा सकता है।
देखा जाए तो यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास है। जानकारी के अनुसार बिहार सरकार ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
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नई व्यवस्था: पहले ट्रेनिंग, फिर लाइसेंस
नई व्यवस्था लागू होने के बाद लर्निंग लाइसेंस और परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आवेदन करने से पहले आवेदकों को मान्यता प्राप्त मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण लेना होगा और उसका प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा।
समझने वाली बात यह है कि यह नियम केवल कमर्शियल या भारी वाहनों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार निजी दो पहिया और चार पहिया वाहन चालकों पर भी यह नियम लागू होगा।
यानी अगर आप बाइक या कार का लाइसेंस बनवाना चाहते हैं तो पहले ट्रेनिंग पूरी करनी पड़ सकती है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह बदलाव आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
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21 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य: वाहन के अनुसार अलग अवधि
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक निजी दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए 21 दिनों की ट्रेनिंग अनिवार्य होगी। वहीं भारी और व्यावसायिक वाहनों के लिए 30 दिनों की ट्रेनिंग का प्रावधान पहले की तरह जारी रहेगा।
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| वाहन की श्रेणी | ट्रेनिंग अवधि | प्रमाण पत्र |
|---|---|---|
| निजी दो पहिया (बाइक/स्कूटी) | 21 दिन | अनिवार्य |
| निजी चार पहिया (कार) | 21 दिन | अनिवार्य |
| व्यावसायिक/भारी वाहन | 30 दिन | अनिवार्य |
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही आवेदक को प्रमाण पत्र मिलेगा, जिसके आधार पर वह लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकेगा। अगर गौर करें तो यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि हर व्यक्ति को वाहन चलाने की उचित जानकारी हो।
उद्देश्य: केवल प्रक्रिया बढ़ाना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करना
इस बदलाव का उद्देश्य केवल प्रक्रिया बढ़ाना नहीं है बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करना भी है। सरकार चाहती है कि हर नया चालक ट्रैफिक नियम, सड़क पर सुरक्षित ड्राइविंग और दुर्घटना से बचाव के तरीकों की व्यावहारिक जानकारी लेकर ही वाहन चलाए।
दिलचस्प बात यह है कि ट्रेनिंग में सिर्फ वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित चीजें भी सिखाई जाएंगी:
- ट्रैफिक नियमों की पूरी जानकारी
- सड़क संकेतों और चिह्नों की समझ
- आपातकालीन स्थितियों में वाहन नियंत्रण
- दुर्घटना से बचाव के उपाय
- इंजन और बेसिक मेंटेनेंस की जानकारी
इससे सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। समझने वाली बात यह है कि बिहार में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या काफी अधिक है और यह कदम इसे कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
1 अगस्त से लागू होने की संभावना, विभागीय तैयारियां पूरी
बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर विभागीय स्तर पर तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं। बिहार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल ओनर एसोसिएशन के अनुसार परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस व्यवस्था पर सहमति बन चुकी है।
इसे 1 अगस्त 2026 से लागू किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि जिला परिवहन कार्यालयों का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जब तक सरकारी अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी।
वर्तमान व्यवस्था: अभी ऐसे मिलता है लाइसेंस
वर्तमान में निजी वाहनों के लिए लर्निंग लाइसेंस का ऑनलाइन टेस्ट और परमानेंट लाइसेंस के लिए निर्धारित ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट की मौजूदा व्यवस्था जारी है।
अभी की प्रक्रिया इस प्रकार है:
- ऑनलाइन आवेदन करें
- लर्निंग लाइसेंस टेस्ट दें (ऑनलाइन/ऑफलाइन)
- लर्निंग लाइसेंस प्राप्त करें (30 दिन की वैधता)
- 30 दिन बाद परमानेंट लाइसेंस के लिए ड्राइविंग टेस्ट दें
- परमानेंट लाइसेंस जारी हो जाता है
जैसे ही सरकार की अधिसूचना जारी होगी, नए नियमों को उसी के अनुसार लागू किया जाएगा। समझने वाली बात यह है कि जो लोग पहले से आवेदन प्रक्रिया में हैं, उन पर नए नियम लागू होंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ट्रेनिंग सेंटर की मान्यता जरूरी
नए नियमों के तहत केवल मान्यता प्राप्त मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर से ही प्रशिक्षण मान्य होगा। किसी भी अमान्य या गैर-पंजीकृत संस्थान से लिया गया प्रमाण पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दिलचस्प बात यह है कि इससे ड्राइविंग स्कूलों का भी व्यवसाय बढ़ेगा और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। परिवहन विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त सेंटरों की सूची जल्द ही जारी की जा सकती है।
लागत में बढ़ोतरी की संभावना
हालांकि अभी तक ट्रेनिंग की फीस के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अनुमान है कि 21 दिन की ट्रेनिंग के लिए ₹3,000 से ₹5,000 तक का खर्च आ सकता है।
यह अतिरिक्त खर्च जरूर है, लेकिन अगर गौर करें तो यह एक बार का निवेश है जो जीवन भर सुरक्षित ड्राइविंग में मदद करेगा। समझने वाली बात यह है कि सुरक्षा की कोई कीमत नहीं होती।
क्या करें इच्छुक आवेदक?
अगर आप आने वाले समय में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की योजना बना रहे हैं तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
1. आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करें: नए नियम कब से लागू होंगे, इसकी पुष्टि करें
2. मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटर की जानकारी लें: परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाकर approved centers की सूची देखें
3. अगर जल्दी है तो अभी आवेदन करें: यदि नए नियम लागू होने से पहले प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं तो बेहतर है
4. बजट तैयार रखें: ट्रेनिंग के लिए अतिरिक्त खर्च की तैयारी करें
आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण लेना आपकी लाइसेंस प्रक्रिया का जरूरी हिस्सा बन सकता है।
मुख्य बातें (Key Points)
• बिहार में ड्राइविंग लाइसेंस के लिए अब मान्यता प्राप्त ट्रेनिंग अनिवार्य हो सकती है
• निजी दो पहिया और चार पहिया वाहनों के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग जरूरी
• भारी और व्यावसायिक वाहनों के लिए 30 दिन की ट्रेनिंग
• 1 अगस्त 2026 से लागू होने की संभावना, आधिकारिक आदेश का इंतजार
• उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना और दुर्घटनाओं में कमी लाना













