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The News Air - Breaking News - Bengal SIR: SC में CJI सूर्यकांत ने वकील को लगाई फटकार

Bengal SIR: SC में CJI सूर्यकांत ने वकील को लगाई फटकार

Menaka Guruswami की दलीलों पर भड़के CJI; CAA आवेदकों का भी जिक्र; अगले दिन फिर होगी सुनवाई

The News Air Team by The News Air Team
सोमवार, 9 मार्च 2026
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CJI Surya Kant
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Bengal SIR Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल SIR मामले की सुनवाई के दौरान तनातनी का एक असाधारण दृश्य देखने को मिला। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलें सुनते-सुनते भड़क उठे और उन्होंने सीधे पूछ दिया कि “क्या सुप्रीम कोर्ट के पास पश्चिम बंगाल के अलावा और कोई काम नहीं है?” पश्चिम बंगाल में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के मामले को लेकर मेनका ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मुद्दा उठाया था, साथ ही सुनवाई के दौरान CAA आवेदकों की याचिका का जिक्र भी सामने आया।


‘पूरा माजरा: SIR मामला फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर’

Bengal SIR Supreme Court में सोमवार की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने चल रही थी। जैसे ही यह मामला बेंच के सामने पेश हुआ, बहस का सिलसिला शुरू हो गया। वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने CJI के सामने बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान कथित अनियमितताओं की बात उठाई।

मेनका ने कहा कि पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान कुछ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए और उनके दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं लिए गए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन लोगों ने पहले वोट डाला था, अब उनके दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा रहे, जो कि गंभीर चिंता का विषय है।

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‘CJI सूर्यकांत का तीखा सवाल: बंगाल के अलावा कोई काम नहीं?’

Bengal SIR Supreme Court सुनवाई में मेनका गुरुस्वामी की यह दलीलें सुनते ही CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि क्या सुप्रीम कोर्ट के पास पश्चिम बंगाल के अलावा और कोई काम नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया कि व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील की तरह सीधे नहीं बैठ सकता।

इस पर वकील ने पलटवार करते हुए दलील दी कि धारा 23 और धारा 24 के तहत अपील का प्रावधान है और इसीलिए मामले को टैग किया जा सकता है। यानी वह CJI को कानून के प्रावधानों की याद दिला रही थीं। अंत में CJI ने कहा कि मामले को अगले दिन लिया जाएगा।


‘CAA आवेदकों का जिक्र: और तेज हुई नाराजगी’

Bengal SIR Supreme Court की सुनवाई में उसी दौरान जैसे ही अधिवक्ता ने CAA आवेदकों का जिक्र करते हुए कहा कि वे SIR रिवीजन सूची में शामिल नहीं हो पाए क्योंकि वे पेश नहीं हो सकते, CJI सूर्यकांत ने एक बार फिर तीखे लहजे में कहा कि “क्या हमारे पास बंगाल के अलावा और कोई काम नहीं है?”

यह टिप्पणी उस दबाव को उजागर करती है जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में बंगाल से जुड़े मामले बार-बार और अलग-अलग कोणों से आते रहते हैं। CJI की यह बेबाक प्रतिक्रिया कोर्टरूम में मौजूद सभी के लिए एक स्पष्ट संकेत थी।


‘ममता बनर्जी का अनोखा कदम: मुख्यमंत्री बनीं वकील’

Bengal SIR Supreme Court मामले में ममता बनर्जी की भूमिका शुरू से ही असाधारण रही है। वह SIR का विरोध करती रही हैं। लेकिन 4 फरवरी 2026 को उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जो भारतीय राजनीति में पहले कभी नहीं हुआ था।

एक सिटिंग मुख्यमंत्री होने के बावजूद ममता बनर्जी खुद अधिवक्ता के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पेश हुईं और पश्चिम बंगाल की ओर से बंगाल SIR मामले में पहली बार व्यक्तिगत रूप से बहस की। हालांकि तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था और मामला अब भी अनसुलझा बना हुआ है।


‘SIR विवाद कहां-कहां तक फैला?’

Bengal SIR Supreme Court मामला दरअसल एक बड़े राष्ट्रीय विवाद का हिस्सा है। चुनाव आयोग ने जब से SIR की प्रक्रिया शुरू की है, तब से विरोध थमा नहीं है। इसकी शुरुआत बिहार से हुई थी और तब भी मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।

इसके बाद पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में SIR चलाया जा रहा है। विपक्ष लगातार SIR का विरोध कर रहा है और इसे संदेह की नजर से देख रहा है।


‘चुनाव की छाया में SIR: राजनीतिक दांव-पेच’

Bengal SIR Supreme Court का यह पूरा विवाद ऐसे नाजुक वक्त में और तेज हो गया है जब इसी साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। विपक्ष SIR के बहाने चुनाव आयोग और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साध रहा है।

ममता बनर्जी का खुद सुप्रीम कोर्ट में वकील बनकर पेश होना और अब बार-बार बंगाल से जुड़ी याचिकाओं पर CJI का ऐसे सवाल उठाना दोनों मिलकर यह बताते हैं कि SIR का मुद्दा अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। देखना यह होगा कि जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होंगे तो SIR का असर जमीन पर कैसा दिखता है।


‘मुख्य बातें (Key Points)’
  • Bengal SIR Supreme Court: CJI सूर्यकांत की बेंच ने सोमवार को सुनवाई की; वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने SIR के दौरान बंगाल में वोटर लिस्ट से नाम हटाने और दस्तावेज न स्वीकारे जाने का मुद्दा उठाया।
  • CJI ने तीखे लहजे में कहा: “क्या सुप्रीम कोर्ट के पास बंगाल के अलावा कोई काम नहीं है?”; यह भी कहा कि SC न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर अपील की तरह सीधे नहीं बैठ सकता; मामला अगले दिन की सुनवाई के लिए टाला।
  • सुनवाई में CAA आवेदकों का भी जिक्र आया जो SIR रिवीजन सूची में शामिल नहीं हो सके; ममता बनर्जी 4 फरवरी 2026 को सिटिंग CM होते हुए खुद अधिवक्ता के रूप में SC में पेश हुई थीं।
  • SIR पहले बिहार में शुरू हुआ, अब बंगाल, तमिलनाडु, असम, UP समेत कई राज्यों में; इसी साल बंगाल विधानसभा चुनाव; विपक्ष SIR को चुनावी हथियार बना रहा है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: Bengal SIR क्या है और सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?

SIR यानी मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण, जिसे चुनाव आयोग ने शुरू किया। बिहार से शुरुआत के बाद बंगाल, तमिलनाडु, असम, UP समेत कई राज्यों में इसे लागू किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इसमें वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं और दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जा रहे, इसीलिए यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

प्रश्न 2: CJI सूर्यकांत ने Bengal SIR सुनवाई में क्यों नाराजगी जताई?

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलें सुनते हुए और CAA आवेदकों का जिक्र आने पर CJI भड़क गए। उन्होंने कहा कि “क्या सुप्रीम कोर्ट के पास बंगाल के अलावा कोई काम नहीं है?” और यह भी स्पष्ट किया कि SC न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर सीधे अपीलीय बेंच की तरह नहीं बैठ सकता।

प्रश्न 3: ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में वकील के रूप में क्यों और कब पेश हुईं?

4 फरवरी 2026 को ममता बनर्जी एक सिटिंग मुख्यमंत्री होने के बावजूद खुद अधिवक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और बंगाल SIR मामले में व्यक्तिगत रूप से बहस की। यह किसी सिटिंग CM द्वारा SC में ऐसे पेश होने का पहला मामला था। तब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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