Assam Police Raid की बड़ी कार्रवाई में मंगलवार 7 अप्रैल को वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम क्राइम ब्रांच की टीम पहुंची। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिंकी शर्मा पर लगाए गए आरोपों के बाद हुई है।
राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित पवन खेड़ा के आवास पर छापेमारी के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद रही। यह घटनाक्रम उस राजनीतिक विवाद का नतीजा है जो रविवार को तब शुरू हुआ था जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम की मुख्यमंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे।
पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रिंकी शर्मा पर तीन देशों के पासपोर्ट रखने और विदेशों में बड़ी संपत्ति होने के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के तुरंत बाद असम की राजनीति में उबाल आ गया और अब मामला कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है।
तीन पासपोर्ट रखने का आरोप और विवाद की शुरुआत
रविवार को असम में एक राजनीतिक तूफान तब खड़ा हो गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिंकी शर्मा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि रिंकी शर्मा के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में बड़ी संपत्ति है।
यह आरोप पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए थे। इन आरोपों ने असम की राजनीति में सनसनी फैला दी। कांग्रेस नेता ने अपने आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेजों का हवाला भी दिया था।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पूरे असम में राजनीतिक बहस छिड़ गई। विपक्ष ने इन आरोपों को गंभीरता से लेने की मांग की, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया।
हिमंता बिस्वा शर्मा का तीखा पलटवार
पवन खेड़ा के आरोपों के तुरंत बाद ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने जोरदार पलटवार किया। उन्होंने इन आरोपों को बेबुनियाद, दुर्भावनापूर्ण मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताकर पूरी तरह खारिज कर दिया।
हिमंता बिस्वा शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की जिसमें उन्होंने लिखा, “पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पार्टी के अंदर गहरी हताशा और घबराहट को दर्शाती है। जैसे-जैसे असम एक ऐतिहासिक जनादेश की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है, इस तरह के हताश और बेबुनियाद हमले केवल उनके ढहते जनाधार को ही उजागर करते हैं।”
मुख्यमंत्री ने पवन खेड़ा के आरोपों को दुर्भावनापूर्ण मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि वह और उनकी पत्नी रिंकी शर्मा दोनों ही 48 घंटे के अंदर पवन खेड़ा के खिलाफ अपराधिक और दीवानी मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे।
जेल भेजने की धमकी और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
हिमंता बिस्वा शर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में पवन खेड़ा को जेल भेजने की भी धमकी दी थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेड़ा को उनके बयानों के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर और झूठे आरोप लगाना एक गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा कि जो लोग बिना किसी सबूत के किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं, उन्हें कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
हिमंता बिस्वा शर्मा की यह चेतावनी केवल शब्दों तक सीमित नहीं रही। उनकी पत्नी रिंकी शर्मा ने पवन खेड़ा के खिलाफ FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज करा दी। इसके साथ ही सिविल और अपराधिक दोनों तरह के मुकदमे दर्ज कराने की धमकी भी दी गई।
असम पुलिस की टीम पहुंची दिल्ली
मंगलवार 7 अप्रैल को सुबह असम क्राइम ब्रांच की एक टीम दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची। यह कार्रवाई उस FIR के संबंध में की गई जो रिंकी शर्मा ने दर्ज कराई थी।
सूत्रों के अनुसार, पवन खेड़ा की पत्नी ने असम पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी। इसी संबंध में जांच के लिए असम पुलिस उनके घर पर पहुंची।
छापेमारी के दौरान असम क्राइम ब्रांच की टीम के साथ दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद रही। यह प्रक्रिया अंतर-राज्यीय समन्वय के तहत की गई, क्योंकि कार्रवाई दिल्ली में हो रही थी जबकि मामला असम से संबंधित था।
असम की राजनीति में उबाल
पवन खेड़ा के वार और हिमंता बिस्वा शर्मा के पलटवार से असम की राजनीति में तीव्र उबाल आ गया है। यह मामला अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच यह टकराव असम में चुनावी माहौल को और भी गर्म कर सकता है। हिमंता बिस्वा शर्मा ने अपनी पोस्ट में जिस “ऐतिहासिक जनादेश” का जिक्र किया है, वह आगामी चुनावों की ओर इशारा करता है।
विपक्ष का आरोप है कि हिमंता बिस्वा शर्मा की सरकार विपक्षी नेताओं को डराने और धमकाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जो गलत आरोप लगाएगा, उसे जवाब देना होगा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति
कांग्रेस पार्टी ने पवन खेड़ा के घर असम पुलिस की छापेमारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया है। पार्टी के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की निंदा की है।
पवन खेड़ा एक वरिष्ठ कांग्रेस प्रवक्ता हैं और पार्टी की ओर से नियमित रूप से सरकार की आलोचना करते रहते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है।
हालांकि, हिमंता बिस्वा शर्मा और उनकी पत्नी रिंकी शर्मा का पक्ष साफ है कि यह मानहानि का मामला है और इसमें राजनीति नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का सवाल है।
प्रताड़ना की शिकायत और जांच प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, पवन खेड़ा की पत्नी ने असम पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी। यह शिकायत किस संदर्भ में और कब की गई थी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
असम क्राइम ब्रांच की टीम इसी शिकायत की जांच के सिलसिले में पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची थी। टीम ने घर की तलाशी ली और कुछ दस्तावेज भी जब्त किए होंगे, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस की उपस्थिति यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से हो और किसी तरह का कोई विवाद न हो। अंतर-राज्यीय पुलिस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
48 घंटे की समयसीमा और मुकदमे की तैयारी
हिमंता बिस्वा शर्मा ने अपनी चेतावनी में कहा था कि वह और उनकी पत्नी 48 घंटे के अंदर पवन खेड़ा के खिलाफ अपराधिक और दीवानी मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे। यह समयसीमा अब लगभग पूरी हो चुकी है।
रिंकी शर्मा ने पहले ही FIR दर्ज करा दी है, जो अपराधिक कार्रवाई का हिस्सा है। दीवानी मुकदमा भी जल्द ही दायर किए जाने की संभावना है, जिसमें मानहानि के लिए हर्जाने की मांग की जा सकती है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, मानहानि के मामलों में अगर आरोप झूठे साबित होते हैं तो आरोप लगाने वाले व्यक्ति को जेल भी हो सकती है और मोटी रकम का जुर्माना भी देना पड़ सकता है।
राजनीतिक दांव-पेच या कानूनी लड़ाई
यह पूरा मामला अब एक सवाल खड़ा करता है – क्या यह शुद्ध रूप से राजनीतिक दांव-पेच है या एक वास्तविक कानूनी लड़ाई? कांग्रेस का मानना है कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है, जबकि भाजपा और हिमंता बिस्वा शर्मा का पक्ष कहता है कि यह व्यक्तिगत मानहानि का मामला है।
असम में आगामी चुनावों को देखते हुए यह विवाद और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हिमंता बिस्वा शर्मा ने अपनी पोस्ट में “ऐतिहासिक जनादेश” का जिक्र किया है, जो बताता है कि वह इस मामले को चुनावी संदर्भ में भी देख रहे हैं।
दूसरी तरफ, पवन खेड़ा जैसे वरिष्ठ कांग्रेस नेता पर कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि सरकार के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने की कीमत चुकानी पड़ सकती है।
आम जनता पर असर
यह राजनीतिक विवाद और कानूनी कार्रवाई असम की आम जनता को भी प्रभावित कर सकती है। लोगों के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है। कांग्रेस समर्थक इसे सरकार की तानाशाही बता सकते हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे न्याय की जीत मान सकते हैं।
चुनावी माहौल में ऐसे विवाद अक्सर मतदाताओं की सोच को प्रभावित करते हैं। हिमंता बिस्वा शर्मा की छवि पर इसका क्या असर होगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा।
एक बात तय है कि यह मामला अभी और भी लंबा चलने वाला है। कानूनी लड़ाई में महीनों या सालों लग सकते हैं, लेकिन राजनीतिक असर तात्कालिक होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- 7 अप्रैल 2026 को असम क्राइम ब्रांच की टीम पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित निजामुद्दीन आवास पर पहुंची
- पवन खेड़ा ने असम CM हिमंता बिस्वा शर्मा की पत्नी रिंकी शर्मा पर तीन देशों के पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति के आरोप लगाए थे
- हिमंता बिस्वा शर्मा ने आरोपों को बेबुनियाद बताया और 48 घंटे में मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी
- रिंकी शर्मा ने पवन खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज कराई और सिविल तथा अपराधिक मुकदमे की धमकी दी
- पवन खेड़ा की पत्नी ने असम पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की थी, जिसकी जांच के लिए पुलिस पहुंची
- छापेमारी के दौरान दिल्ली पुलिस की टीम भी मौजूद रही
- यह विवाद असम की राजनीति में तीव्र उबाल ला सकता है













