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The News Air - पंजाब - Akali Unity: Sikandar Maluka ने दिया एकता का संदेश, पंथक धड़ों से की एकजुट होने की अपील

Akali Unity: Sikandar Maluka ने दिया एकता का संदेश, पंथक धड़ों से की एकजुट होने की अपील

सीट बंटवारे में मुश्किलों के बीच अकाली नेता ने कहा - अलग-अलग चुनाव लड़े तो फायदा विरोधियों को, वडाला ने बताई बातचीत की रणनीति

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 8 सितम्बर 2026
in पंजाब, NEWS-TICKER
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Sikandar Maluka
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Akali Dal Unity: पंजाब की राजनीति में एकता की एक नई पुकार उठी है। सूबे की आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शिरोमणी अकाली दल के विभिन्न गुटों को एकजुट करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में सिकंदर सिंह मलूका ने सभी पंथक धड़ों को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने का सार्वजनिक आह्वान किया है।

देखा जाए तो, यह पहल ऐसे समय आई है जब शिरोमणी अकाली दल (पुनर्सुरजीत) के सीनियर नेता गुरप्रताप सिंह वडाला ने सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई वाले मुख्य अकाली दल और अमृतपाल सिंह के वारिस पंजाब दे के साथ बातचीत की पुष्टि की है।

🔍 यह भी पढ़ें- BJP और Shiromani Akali Dal (Punar Surjit) के बीच गठबंधन की संभावना

BJP के साथ सीट शेयरिंग में अटकन, एकता जरूरी

मलूका ने अपने बयान में कहा कि पारंपरिक और क्षेत्रीय सिख समूहों में फैली धड़ेबंदी और आंतरिक फूट के कारण पंजाब में उनका सामूहिक राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव कमजोर हो रहा है।

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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पंथक धड़ें अलग-अलग होकर चुनाव मैदान में उतरीं, तो इससे वोटों की बंटवारे होगी। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी – विरोधी पार्टियों को सीधा फायदा मिलेगा।

सूत्रों के अनुसार, मलूका एकता पर इसलिए भी जोर दे रहे हैं क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ सीटों की बंटवारे को लेकर सुखबीर बादल की अगुवाई वाले अकाली दल के लिए बातचीत करना मुश्किल हो रहा है।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि गठबंधन के हालात में अकाली दल बड़े भाई की भूमिका निभाने का मौका गंवाता नजर आ रहा है।

🔍 यह भी पढ़ें- बड़ा झटका: Akali Dal से Rajmahindra Singh Majithia निकले, AAP में हुए शामिल

वडाला ने बताया – बादल को छोड़ना होगा अध्यक्ष पद

इससे पहले वडाला ने स्वीकार किया था कि सुखबीर बादल की अगुवाई वाले अकाली दल और अमृतपाल सिंह की अगुवाई वाले अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के साथ समझौते के लिए बातचीत जारी है।

दिलचस्प बात यह है कि वडाला ने साफ कहा: “कुछ नेताओं को अपने निजी हित छोड़कर सिख पंथ की चढ़दी कला के लिए काम करना होगा। हमने पहले भी सुखबीर बादल को कहा था और अब भी दोहराते हैं कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ना होगा, ताकि पंथ द्वारा चुना गया कोई नया नेता पार्टी चला सके।”

अगर गौर करें, तो वडाला की शर्त बेहद कड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव के बाद अगर सभी धड़ें सहमत हों तो बादल मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बन सकते हैं।

समझने वाली बात है कि वारिस पंजाब दे को भी उन्होंने कहा है कि वे चुनाव के बाद ही मुख्यमंत्री पद का दावा करें, जबकि वे पहले चेहरा घोषित करना चाहते थे।

गुटनेताप्रमुख शर्त
शिरोमणी अकाली दलसुखबीर सिंह बादलअध्यक्ष पद छोड़ें
अकाली दल (वारिस पंजाब दे)अमृतपाल सिंहCM चेहरा बाद में घोषित करें
अकाली दल (पुनर्सुरजीत)गुरप्रताप सिंह वडालासभी का सामूहिक नेतृत्व
मलूका की वापसी का इतिहास

जिक्रयोग है कि शिरोमणी अकाली दल ने साल 2024 में मलूका को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बाहर निकाल दिया था। लेकिन जून 2025 में उनकी फिर से पार्टी में वापसी करवाई गई।

2024 की लोकसभा चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद मलूका समेत कई नेताओं ने सुखबीर बादल के खिलाफ बगावत करते हुए उनसे अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग की थी।

पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से अकाली दल सिर्फ एक सीट ही जीत सकी थी। बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल (सुखबीर बादल की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री) की जीत ही एकमात्र सांत्वना थी।

आगे की चुनौतियां और संभावनाएं

राहत की बात यह है कि कम से कम बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया है। लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं:

पहली समस्या: सुखबीर बादल क्या अध्यक्ष पद छोड़ने को तैयार होंगे?

दूसरी समस्या: BJP के साथ गठबंधन में सीटों का बंटवारा कैसे होगा?

तीसरी समस्या: अमृतपाल सिंह जेल में हैं, उनकी पार्टी के साथ समन्वय कैसे होगा?

चौथी समस्या: क्या सभी गुट वाकई अपने अहं को छोड़कर एक मंच पर आ सकेंगे?

इससे साफ होता है कि अकाली राजनीति में आने वाले महीने बेहद अहम होंगे। अगर एकता हो गई तो पंजाब की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन अगर धड़ेबंदी बनी रही तो 2027 का चुनाव अकाली दल के लिए और भी बुरा साबित हो सकता है।


मुख्य बातें (Key Points)

• सिकंदर सिंह मलूका ने सभी पंथक धड़ों से एकजुट होने की अपील की, वोट बंटवारे का खतरा बताया

• गुरप्रताप सिंह वडाला ने सुखबीर बादल से अध्यक्ष पद छोड़ने की शर्त रखी, तभी एकता संभव

• 2024 लोकसभा में 13 में से सिर्फ 1 सीट जीतने के बाद अकाली दल में उथल-पुथल

• BJP के साथ सीट शेयरिंग में मुश्किलें, अकाली दल ‘बड़े भाई’ की भूमिका खोता नजर आ रहा

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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