अकाली दल ने बसपा को पिंजरे में किया क़ैद, शिअद+बसपा गठबंधन को लेकर उठने लगे सवाल

चंडीगढ़, 16 जून (The News Air)
Shiromani Akali Dal + Bahujan Samaj Party:
पंजाब में होने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले ही अकाली दल व बसपा के बीच गठबंधन होने के बाद सवाल भी खड़े होने शुरू हो गए हैं। अगर चुनाव विशेषज्ञों की बात माने तों अकाली दल ने बसपा को पिंजरे में क़ैद कर लिया है। एससी वर्ग की पार्टी मानी जाने वाली बहुजन समाज पार्टी ने आरक्षित सीटों के स्थान पर अकाली दल से 12 सीटें ऐसी ली हैं, जो सामान्य वर्ग से संबंध रखती हैं और इन पर बसपा का जनाधार बहुत ही कम है। बाकी 8 सीटें आरक्षित हैं, जिनमें से 5 पर बसपा भी कमज़ोर मानी जा रही है। महज़ 3 सीटों पर ही बसपा विरोधियों को टक्कर देने की स्थिति में नज़र आ रही है। कुल मिलाकर 17 सीटों पर बसपा का जनाधार काफी कम दिखाई दे रहा है।
वहीं हिंदू वोट बैंक माने जाने वाली कंडी क्षेत्र की सीटें बसपा को देकर अकाली दल ने खेला खेल दिया है। इन पर अकाली दल का कैडर काफी कम है, क्योंकि 25 वर्ष से इन पर अकाली दल के उम्मीदवार नहीं हैं, बल्कि भाजपा के प्रत्याशी खड़े होते थे। यहां 2017 व 2019 के चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक ही रहा है।
गठबंधन को लेकर बसपा में विरोधी सुर उठने शुरू हो गए हैं कि पार्टी का केंद्र बिंदु मानी जाने वाली फिल्लौर, आदमपुर विधानसभा सीट क्यों छोड़ दी गई, जहां बसपा की जीत निश्चित थी। पंजाब में 34 आरक्षित सीटें हैं और गठबंधन से पहले क़यास लगाए जा रहे थे कि बसपा को अधिकतर आरक्षित सीटें ही मिलेंगी, परन्तु गठबंधन के बाद सभी क़यास धरे के धरे रह गए। 
बसपा कई आरक्षित सीटें जीतने की क्षमता रखती है, जहां एससी वर्ग के वोट का बहुत ही अच्छा जनाधार है। इसमें चब्बेवाल, शाम चौरासी, गढ़शंकर, बंगा, फिल्लौर, आदमपुर व बलाचौर प्रमुख हैं। बसपा ने इन सीटों को हासिल करने के लिए अकाली दल से जिद नहीं की और उन सीटों पर हामी भर दी, जिन सीटों पर बसपा बहुत ही कमज़ोर है। खासकर कंडी क्षेत्र की पठानकोट, दसूहा, टांडा जैसी सीटों पर हिंदू बहुसंख्यक वोट हैं और पार्टी का कैडर काफी कमज़ोर है। 
मोहाली, होशियारपुर सिटी, जालंधर नॉर्थ, जालंधर वेस्ट सीट पर बसपा का प्रदर्शन आज तक अच्छा नहीं रहा है। बसपा ने 20 सीटों में से 8 ही आरक्षित सीटों पर लड़ने का फैसला किया है। अब पार्टी के दिग्गज नेताओं के अनुसार बसपा करतारपुर, फगवाड़ा और नवांशहर सीट पर चुनाव लड़ सकती है, लेकिन बाकी 17 सीटों पर पार्टी काफी कमज़ोर स्थिति में नज़र आ रही है। खुद अकाली दल भी चुनाव लड़कर इन सीटों को जीतने की स्थिति में नहीं था। इनमें से अधिकतर सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ती रही है। जिसमें सुजानपुर, भोआ, पठानकोट, होशियारपुर सिटी, फगवाड़ा, जालंधर नॉर्थ, जालंधर वेस्ट की सीटें प्रमुख हैं। 
बसपा के टकसाली नेता सुखविंदर कोटली ने कहा सीटों का बंटवारा गलत हुआ है – बसपा के टकसाली नेता सुखविंदर कोटली का कहना है कि बसपा-शिअद गठबंधन का तो वर्कर पिछले 25 साल से इंतजार कर रहे थे। समझौता जरूरी था, ताकि पंजाब में बसपा आगे बढ़ सके, लेकिन सीटों का बंटवारा ही गलत हुआ है। अकाली दल के साथ समझौते के बाद बसपा कई सीटों पर स्पष्ट रूप से जीतती दिखाई दे रही थी, लेकिन 17 सीटों पर तो बसपा काफी कमज़ोर हालत में है। सीटों का बंटवारा वर्करों का मनोबल गिराने वाला है

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