जानकारी दी।
प्रतिभा का कहना था कि उनके पिता को भारत रत्न से सम्मानित किया जायेगा, इस तरफ तो उन लोगों का कभी ख्याल ही नहीं गया था, न ही उन्होंने कभी इस बारे में किसी से कोई बात की थी। एकदम से जब यह जानकारी मिली तो पूरे परिवार को बेहद खुशी हुई। दरअसल, खुशी दूनी होने जैसा आलम था। एक तो हाल ही में अयोध्या में राममंदिर में प्राण–प्रतिष्ठा हुई, जोकि बरसों से उनके पिता का सपना पूरा होने जैसा था, उसपर भारत रत्न मिलने की बात सामने आई। तो खुशी तो दुगुनी होनी ही थी।
जब पूछा कि खबर सुनकर आडवाणी जी ने क्या कहा तो कहती हैं कि बोले तो कुछ नहीं बस, आंखों से आंसू टपक पड़े। बोलते तो शुरू से ही बहुत कम हैं।
तो कैसे सेलिब्रेट किया इस मौके को? इस पर बड़े उत्साह से कहती हैं कि घर पर आये सभी मीडियावालों और अन्य लोगों को खूब लड्डू खिलाये। आडवाणी जी को भी लड्डू खिलाया कि नहीं, इस पर हंसते हुए कहती हैं वह तो मीठे के बहुत शौकीन हैं, उन्हें खिलाये बगैर कहां गुजर थी।फिर तनिक उदास होकर अपनी मां कमला आडवाणी को याद करते हुए मायूसी से प्रतिभा कहती हैं कि सारी उम्र मां एक मज़बूत आधार की तरह उनके पीछे खड़ी रही, इस मौके पर उनकी कमी बेतरह महसूस हो रही है।
अच्छा तो किन–किन लोगों के बधाई फोन और मैसेज आये? : “फोन तो बीजेपी के सभी छोटे–बड़े नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों और तमाम जानने वालों के आये। मैसेज तो इतने कि सभी को जवाब देना भारी पड़ रहा है।
पूछने पर प्रतिभा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन भी आया था। उन्होंने बहुत भावुक होते हुए कहा कि सम्मान की घोषणा करके वह बहुत खुश हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी फोन करके अपनी खुशी जाहिर की।
तो अब अयोध्या दर्शन के लिये फिर कब का प्रोग्राम है? : तो उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ फिक्स नहीं हुआ है। जाना तो जरूर ही है क्योंकि उनका इतना बड़ा सपना पूरा हुआ है, जिसके लिये उन्होंने अथक मेहनत की थी। बस, भारत रत्न मिलने का काम पूरा हो जाये और मौसम भी कुछ ठीक हो जाये।बातचीत के दौरान प्रतिभा ने 96 वर्षीय एलके आडवाणी के डेली रूटीन के बारे में भी बताया कि वेजिटेरियन आडवाणी वैसे तो अल्पाहारी हैं पर, उनकी खाने–पीने, सोने–जागने की रूटीन बिल्कुल फिक्स है। खाने के बाद मीठा लेना कभी नहीं भूलते। वह आज भी पहले की तरह ही अखबारें और किताबें पढ़ते हैं, फिल्में भी देखते हैं। उनकी पर्सनल लाइब्रेरी में तकरीबन 13 हजार किताबें हैं।अलबत्ता एक्सरसाइज़ वगैरह का ज्यादा शौक कभी नहीं रहा। हां, 20 एक मिनट सैर जरूर करते हैं। गुरु ग्रंथ साहिब की गुरुबाणी सुनने का भी उन्हें बहुत शौक है।एलके आडवाणी कभी खुद भी बतौर मीडियाकर्मी फिल्म समीक्षा लिखते रहे हैं। मीडियाकर्मी रही उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी ने बीमार मां और उनके जाने के बाद पिता की देखभाल और सेवा के लिये अपना कामकाज सब छोड़ दिया। लेकिन, इसका उन्हें कतई अफसोस नहीं है। बल्कि वह कहती हैं कि इस सेवा से जो सेटिसफैक्शन उन्हें मिला है, उसके सामने और बातें तो सब बौनी हैं।यह पूछने पर कि अपने पिता की सबसे अच्छी बात उन्हें क्या लगती है प्रतिभा ने बताया कि माता और पिता दोनों ही बहुत डाउन टू अर्थ रहे हैं। अब वह हर वक्त अपने पिता के साथ रहती हैं। कितनी ही छोटी–बड़ी बातें रोज उन्हें सीखने को मिलती हैं। पर, दिल को छूने वाली सबसे बड़ी बात वह कहते हैं कि पानी में रहो पर गीले मत होओ। यानि दुनिया में रहकर भी अपने सिद्धांतों से डिगो मत।








