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The News Air - Breaking News - सामाजिक दबाव, परिवार की अपेक्षाएं छात्रों को आत्महत्या के लिए प्रेरित करती हैं

सामाजिक दबाव, परिवार की अपेक्षाएं छात्रों को आत्महत्या के लिए प्रेरित करती हैं

The News Air Team by The News Air Team
शनिवार, 19 अगस्त 2023
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सामाजिक दबाव
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नई दिल्ली, 19 अगस्त (The News Air) विशेषज्ञों का कहना है कि युवा छात्रों में आत्महत्या के मामलों में चिंताजनक वृद्धि के पीछे समाज का बढ़ता दबाव और परिवार की अपेक्षाएं प्रमुख कारण हैं।

हाल के वर्षों में भारत में छात्रों की आत्महत्या की दर में उछाल आया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, 2021 में 13,000 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की। जबकि, 2020 में आत्महत्या करने वालों की संख्या 12,500 से अधिक थी।

गुरुग्राम में नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के क्लिनिकल मनोविज्ञान डॉ. राहुल राय कक्कड़ ने आईएएनएस को बताया कि इस खतरनाक आत्महत्या के ट्रेंड का मूल कारण मुख्य रूप से केवल आर्थिक कारकों के बजाय सामाजिक और पारिवारिक अपेक्षाओं का बढ़ता दबाव है। तेजी से बढ़ती कंपीटीशन और शैक्षणिक चिंताओं के कारण छात्र डर का अनुभव करते हैं। चिंता की स्थायी स्थिति पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाता है, जो उन्हें परेशान करने वाली मानसिक स्थिति की ओर धकेलती है।

साकेत में मैक्स हॉस्पिटल के निदेशक और प्रमुख, मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार विज्ञान विभाग के डॉ. समीर मल्होत्रा ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं का अत्यधिक तनाव, कड़ी मेहनत के बावजूद निराशा, बड़ी संख्या में उम्मीदवारों और कम संख्या में सीटों के बीच बड़ा बेमेल, रिश्ते में तनाव, अशांत जीवनशैली, पारिवारिक संकट, अंतर्निहित अवसाद, निराशा, असुरक्षा की भावना और खतरा महसूस करना, ये ऐसे कारण हैं जो छात्रों को जानलेवा कदम उठाने के लिए प्रेरित करते हैं।’

विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों और कोटा जैसे कोचिंग केंद्रों में छात्र आत्महत्या के मामले बढ़े हैं, जो भारतीय युवाओं के भीतर बैठे गहरे संकट का संकेत हैं।

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डॉ. कक्कड़ ने कहा कि शैक्षणिक रूप से उत्कृष्टता हासिल करने के लिए समाज और परिवारों का अनियंत्रित दबाव ऐसे माहौल को बढ़ावा देता है, जहां चिंता पनपती है।

बेंगलुरु में मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. सतीश कुमार सीआर ने आईएएनएस को बताया कि छात्रों में उच्च आत्महत्या दर का प्राथमिक अंतर्निहित कारण निस्संदेह अपेक्षाओं का बोझ है। छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रवेश परीक्षाओं को लेकर भारी दबाव का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने शिक्षा की आसमान छूती लागत, सहकर्मी दबाव के व्यापक प्रभाव और सामाजिक मानदंडों को पूरा करने की जरूरतों को भी जिम्मेदार ठहराया। कुछ छात्र पिछली दर्दनाक घटनाओं के कारण आत्महत्या के ट्रेंड से भी पीड़ित होते हैं।

नई दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में मनोचिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. प्रशांत गोयल ने शिक्षा क्षेत्र में तत्काल सामाजिक बदलाव का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रतिस्पर्धा और प्रदर्शन पर अनुचित निर्धारण ने शैक्षणिक संस्थानों को युवा दिमागों के लिए दबाव कक्ष में बदल दिया है। मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक सफलता के बीच आंतरिक संबंध को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।

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