महाराष्ट्र (The News Air): किसी ने सही कहा है राजनीति में कब क्या हो जाए कोई कुछ नहीं कह सकता है। इस समय देशभर की नजर महाराष्ट्र में मचे सियासी घमासान पर है। जहां एक तरफ उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) बनाम शिंदे गुट की शिवसेना में मचा सियासी बवाल थमा नहीं था। वहीं अब सूबे में नया सियासी बवंडर मच गया है। ये बवंडर एनसीपी नेता और शरद पवार के भतीजे अजित पवार (Ajit Pawar) ने लाया है। वैसे किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि अजित चाचा शरद पवार से बगावत कर सरकार में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं अपने साथ उन्होंने करीब 30 से ज्यादा विधायकों के साथ मिलकर बीजेपी-शिंदे की सरकार में डिप्टी CM बन गए है।
अब सवाल उठता है कि अजित पवार ने आखिर क्यों बगावती तेवर अपनाने का फैसला लिया। दरअसल बदलते समय के साथ अजित पवार एनसीपी (NCP) का मुखिया बनने का सपना देखने लगे थे। वैसे समय के साथ शरद पवार के बाद पार्टी में सुप्रिया सुले और अजित पवार का कद शरद पवार के बाद दूसरे नंबर का था, लेकिन इसी बीच पार्टी के अंदर सियासी खलबली मचने लगी और एक समय ऐसा आया कि शरद पवार ने पार्टी के अध्यक्ष पद को छोड़ने का फैसला तक कर डाला, लेकिन पार्टी के अन्य नेताओं को ये स्वीकार नहीं था। इसके साथ ही राज्य के अलग अलग जिलों से कार्यकर्ताओं ने शरद पवार से अध्यक्ष पद पर बने रहने की अपील करने लगे। जिसके बाद शरद पवार ने अपना फैसला बदला और पार्टी की कमान अपने ही हाथ में रखी।
लेकिन इन सब के बीच सियासी गलियारों में एक सुगबुगाहट जरुर थी कि आखिर राष्ट्रवादी पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी। क्या शरद पवार इसकी कमान अपनी बेटी सुप्रिया सुले को देंगे या फिर अजित पवार होंगे पार्टी के अध्यक्ष। इन्हीं सियासी हलचल के बीच वो दिन भी आ गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 25वें स्थापना दिवस के मौके पर शरद पवार ने सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष घोषित कर दिया। जो इशारा करता है कि शरद पवार ने परोक्ष तौर पर सुप्रिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। इस फैसले के कुछ दिन बाद अजित पवार का एक बयान आया था जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी। वैसे सुप्रिया सुले ने उनके इस बयान के बाद कहा था कि उनकी पार्टी में किसी प्रकार का मतभेद नहीं है। उन्होंने अपने भाई अजित पवार और उनके बीच किसी प्रकार के मतभेद का खंडन किया था।
सियासी बवंडर अब भूकंप में तब्दील
रविवार के दिन यूं तो महाराष्ट्र में आम दिन जैसा था। आम जनता से लेकर नेता तक छुट्टी और रिमझिम हो रही बरसात का आनंद ले रहे थे, लेकिन अजित पवार सूबे में सियासी बवंडर की जगह एक बड़ा भूकंप लाने वाले थे। वही हुआ जब, एनसीपी के कई नेताओं के साथ अजित पवार एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का हिस्सा बन गए और सरकार में उपमुख्यमंत्री भी बन गए। सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होने वाले एनसीपी के विधायकों में शरद पवार के वफादार रहे छगन भुजबल और दिलीप वलसे पाटिल भी शामिल हैं।
NCP ले सकती है बड़ा फैसला
एनसीपी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने रविवार को कहा था कि उनकी पार्टी ने अजित पवार तथा आठ अन्य के खिलाफ अयोग्यता याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग को भी एक ई-मेल भेजा गया है, जिसमें बताया गया है कि एनसीपी के नेता और कार्यकर्ता पार्टी प्रमुख शरद पवार के साथ हैं।













