Chandigarh Secretariat Threat Case: बंद हो चुकी ई-मेल आईडी को रिकवर कर उनके नए पासवर्ड बनाए जाते थे और फिर उन्हें हजारों रुपये में बेच दिया जाता था। चंडीगढ़ पुलिस के मुताबिक यह काम आरोपी सौरव बिस्वास अपनी बहन पोपी बिस्वास के साथ मिलकर कर रहा था।
चंडीगढ़ सचिवालय समेत कई इमारतों और स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल भेजने के मामले की जांच में पुलिस ने साइबर अपराध के इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है।
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कैसे चलता था ई-मेल आईडी का कारोबार
चंडीगढ़ पुलिस ने जिला अदालत को बताया कि आरोपी ने करीब 300 निष्क्रिय ई-मेल आईडी खरीदी थीं। इनमें से लगभग 100 आईडी उसने रिकवर करने के लिए बहन को भेजीं। पुलिस जांच के अनुसार पोपी बिस्वास इन आईडी को अपने ई-मेल से रिकवर कर नए पासवर्ड बनाती थी और भाई को वापस भेज देती थी।
बाकी आईडी आरोपी ने अपने दोस्त संपद राय की मदद से रिकवर कीं। यानी इस काम में कम से कम तीन लोगों की भूमिका पुलिस जांच में सामने आई है।
219 आईडी, 13 हजार रुपये और बाइनेंस वॉलेट
इसके बाद करीब 219 रिकवर की गई ई-मेल आईडी मामुनुर राशिद मामुन नाम के व्यक्ति को 13 हजार रुपये में बेची गईं। इनके लॉगइन और पासवर्ड की जानकारी एक्सेल फाइल में बनाकर वाट्सएप से साझा की गई। पूरे लेन-देन में बाइनेंस वॉलेट का इस्तेमाल हुआ।
| पहलू | ब्योरा |
|---|---|
| खरीदी गई निष्क्रिय ई-मेल आईडी | करीब 300 |
| बहन को रिकवरी के लिए भेजी गईं | लगभग 100 |
| दोस्त संपद राय की मदद से रिकवर | बाकी आईडी |
| बेची गई आईडी | करीब 219 |
| खरीदार | मामुनुर राशिद मामुन |
| बिक्री की रकम | 13 हजार रुपये |
| डेटा साझा करने का तरीका | एक्सेल फाइल, वाट्सएप |
| लेन-देन का माध्यम | बाइनेंस वॉलेट |
बांग्लादेशी मूल का आरोपी और अहमदाबाद का कनेक्शन
छह महीने पहले चंडीगढ़ पुलिस ने बांग्लादेशी मूल के युवक सौरव बिस्वास को गिरफ्तार किया था। अहमदाबाद साइबर क्राइम थाने में दर्ज एक अन्य FIR में भी आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी। बाद में चंडीगढ़ पुलिस उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेकर आई और इस मामले में गिरफ्तार किया।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि एक राज्य में दर्ज केस की कड़ी दूसरे राज्य में मिली, यानी साइबर अपराध की जड़ें किसी एक शहर तक सीमित नहीं थीं।
अब सेशन कोर्ट में चलेगा केस
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सचिन यादव की अदालत ने इस केस को सेशन कोर्ट को सौंप दिया है। आरोपी पर आईटी एक्ट की धारा 66एफ और बीएनएस की धारा 351(4) के तहत केस चलेगा।
पुलिस के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के लिए सीएफएसएल की रिपोर्ट अभी लंबित है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और रिपोर्ट मिलने के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश किया जाएगा।
29 जनवरी 2026 को कैसे शुरू हुआ मामला
मामले की शुरुआत 29 जनवरी 2026 को हुई, जब पंजाब सिविल सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल मिला। सूचना पर पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों ने सचिवालय परिसर की जांच की, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला।
जांच के दौरान ई-मेल का संबंध सौरव बिस्वास से जुड़ा मिला। यहीं से साइबर अपराध के इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हुईं।
धमकी से आगे की कहानी
समझने वाली बात है कि यह मामला सिर्फ एक धमकी भरे ई-मेल तक सीमित नहीं रहा। जांच बढ़ी तो सामने आया कि बंद पड़ी ई-मेल आईडी को दोबारा जिंदा कर बेचने का एक पूरा कारोबार चल रहा था। भुगतान क्रिप्टो वॉलेट से हुआ और डेटा वाट्सएप पर बंटा, जिससे पकड़ना और मुश्किल हो जाता है।
अगर गौर करें तो आम लोगों के लिए इसका मतलब साफ है: पुरानी और इस्तेमाल न हो रही ई-मेल आईडी भी गलत हाथों में पहुंच सकती है। जब तक सीएफएसएल रिपोर्ट नहीं आती, तस्वीर अधूरी रहेगी।
जानें पूरा मामला
29 जनवरी 2026 को पंजाब सिविल सचिवालय को बम धमकी का ई-मेल मिला था। जांच सौरव बिस्वास तक पहुंची, जिसे गिरफ्तार किया गया। अब उस पर आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में केस सेशन कोर्ट में चलेगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- आरोपी सौरव बिस्वास ने करीब 300 निष्क्रिय ई-मेल आईडी खरीदीं, जिनमें से करीब 219 रिकवर कर 13 हजार रुपये में बेचीं।
- बहन पोपी बिस्वास पर करीब 100 आईडी रिकवर कर नए पासवर्ड बनाने का आरोप है, और दोस्त संपद राय ने बाकी आईडी रिकवर करने में मदद की।
- चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सचिन यादव की अदालत ने केस सेशन कोर्ट भेजा, जहां आईटी एक्ट की धारा 66एफ और बीएनएस की धारा 351(4) में सुनवाई होगी।
- सीएफएसएल रिपोर्ट लंबित है, और रिपोर्ट व अन्य गिरफ्तारियों के बाद सप्लीमेंट्री चालान पेश होगा।










