Silver Crash: दीपावली से पहले सोने और चांदी, दोनों की कीमतें गिरी हैं, पर सबसे गहरी चोट चांदी को लगी है। शुक्रवार को MCX पर चांदी करीब ₹10,500 टूटकर ₹1,78,900 प्रति किलो पर बंद हुई, जबकि सोना करीब ₹4,347 गिरकर ₹1,38,419 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 53% नीचे है। इसी बीच एक सवाल चर्चा में है: क्या 1 किलो चांदी का भाव 10 ग्राम सोने के बराबर आ सकता है?
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‘जनवरी का रिकॉर्ड और आज की कीमत’
जनवरी 2026 में MCX पर चांदी ₹3,84,000 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक गई थी। तब यह 10 ग्राम सोने से करीब दो गुना कीमत पर मिल रही थी। आज की तस्वीर बिल्कुल अलग है।
| बिंदु | कीमत |
|---|---|
| चांदी का रिकॉर्ड (जनवरी 2026, MCX) | ₹3,84,000 प्रति किलो |
| चांदी का शुक्रवार का बंद भाव | ₹1,78,900 प्रति किलो (करीब ₹10,500 की गिरावट) |
| सोने का शुक्रवार का बंद भाव | ₹1,38,419 प्रति 10 ग्राम (करीब ₹4,347 की गिरावट) |
| चांदी में रिकॉर्ड से गिरावट | करीब 53% |
‘बराबरी के लिए और कितना गिरना होगा’
अगर सोने की कीमत इसी स्तर पर रहे, तो चांदी को करीब 22.6% और गिरना होगा। तब 1 किलो चांदी का भाव करीब ₹1,38,400 हो सकता है, यानी 10 ग्राम सोने के लगभग बराबर।
पर समझने वाली बात है कि यह शर्त वाली गणित है। सोने की कीमत बदली, तो पूरा हिसाब बदल जाएगा। गोल्ड-सिल्वर रेशियो का 100 तक पहुंचना भी किसी तय समय सीमा वाला अनुमान नहीं है।
‘गोल्ड-सिल्वर रेशियो: आसान भाषा में’
यह रेशियो बताता है कि 1 अंश सोना खरीदने के लिए कितने अंश चांदी चाहिए। जब यह 100 होता है, तो 1 किलो चांदी और 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग बराबर बैठती है।
| समय | रेशियो |
|---|---|
| जनवरी 2026 | 50 से नीचे (चांदी सोने के मुकाबले काफी महंगी) |
| अप्रैल 2025 | 100 के पार |
| 2020 से 2025 का औसत | करीब 82 |
| अब | करीब 79 |
दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल 2025 में रेशियो 100 के पार जा चुका है, यानी स्थिति पूरी तरह नई नहीं है। और मौजूदा स्तर 2020-2025 के औसत 82 के काफी करीब है।
‘गिरावट की दो बड़ी वजहें’
पहली वजह है अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका। कच्चे तेल की कीमत चढ़ने से महंगाई का डर है और बाजार को लग रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरें घटाने के बजाय बढ़ा सकता है। ऊंची ब्याज दरों का दबाव सोने-चांदी जैसी धातुओं पर पड़ता है।
दूसरी वजह शेयर बाजार की बिकवाली है। AI कंपनियों के भारी निवेश से कितना रिटर्न मिलेगा, इस पर सवाल उठे। टेक शेयरों में गिरावट के बाद निवेशकों को दूसरे एसेट्स भी बेचने पड़े। मार्जिन कॉल जैसी स्थितियों में सोने-चांदी की बिकवाली भी तेज हो गई।
‘सोने से ज्यादा चांदी क्यों टूटी’
वजह दोनों की मांग का फर्क है। सोने को दुनिया के केंद्रीय बैंक भी बड़े पैमाने पर खरीदते हैं, जबकि चांदी को ऐसा लगातार सहारा नहीं मिलता। चांदी की करीब आधी मांग उद्योगों से आती है। इसलिए आर्थिक विकास धीमा होने का डर बढ़ता है तो चांदी की मांग और कीमत, दोनों पर दबाव आ सकता है।
‘सप्लाई की बदलती तस्वीर’
मेटल्स फोकस के मुताबिक चांदी की सप्लाई में पहले जो कमी थी, वह काफी हद तक घटी है। लंदन के भंडार में चांदी का स्टॉक करीब 4 साल के ऊंचे स्तर पर है। इस साल सिल्वर ETF से भी करीब 6 करोड़ औंस की निकासी हुई है।
एजेंसी को उम्मीद है कि 2027 में चांदी का बाजार घाटे से निकलकर सरप्लस में जाएगा, यानी मांग के मुकाबले सप्लाई ज्यादा हो सकती है। HSBC ने भी 2027 के लिए चांदी की औसत कीमत का अनुमान घटाकर $64 प्रति औंस कर दिया है।
‘सस्ती दिख रही चांदी: खरीदने से पहले क्या सोचें’
देखा जाए तो सबसे बड़ा जाल “सस्ता है, इसलिए खरीद लो” वाली सोच है। चांदी 53% टूटने के बाद भी उतार-चढ़ाव का जोखिम बना हुआ है। उसकी कीमत औद्योगिक मांग, वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर और सोने के मुकाबले अनुपात पर टिकी है।
इससे साफ होता है कि छोटा निवेशक सिर्फ कीमत गिरने की खबर पर नहीं, इन चारों बातों पर नजर रखे। दीपावली पर सोना-चांदी खरीदने की सोच रहे आम परिवार के लिए भी यही सलाह मायने रखती है: भाव का फर्क देखकर नहीं, बाजार का रुख देखकर फैसला लें।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
जनवरी 2026 में चांदी ₹3,84,000 प्रति किलो के रिकॉर्ड पर पहुंची थी और गोल्ड-सिल्वर रेशियो 50 से नीचे चला गया था। उसके बाद अमेरिकी ब्याज दरों की आशंका और शेयर बाजार की बिकवाली ने चांदी को रिकॉर्ड से करीब 53% नीचे ला दिया।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- शुक्रवार को MCX पर चांदी ₹1,78,900 प्रति किलो और सोना ₹1,38,419 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ।
- चांदी जनवरी 2026 के ₹3,84,000 के रिकॉर्ड से करीब 53% नीचे है।
- सोने की कीमत स्थिर रहे तो बराबरी के लिए चांदी को करीब 22.6% और गिरना होगा।
- गिरावट की वजहें ब्याज दरों का डर और शेयर बाजार की बिकवाली हैं, 2027 में सप्लाई सरप्लस की उम्मीद भी है।











