Mavan Dhiyan Satkar Yojana: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना का अपात्र होने के बावजूद लाभ लेने वाली 1,597 नियमित महिला सरकारी कर्मचारियों की पहचान की है। ये महिलाएं विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में काम करती हैं।
सरकार अब इनसे योजना के तहत मिली पूरी राशि वसूलने की तैयारी कर रही है।
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’30 अक्टूबर का पत्र: विभागों को जांच के निर्देश’
सामाजिक सुरक्षा एवं महिला एवं बाल विकास निदेशालय ने 30 अक्टूबर को सभी सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को पत्र जारी किया। इसमें मामलों की प्राथमिकता से जांच के निर्देश दिए गए हैं।
विभागों को कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड, नौकरी की स्थिति और रिटायरमेंट संबंधी जानकारी सत्यापित करनी होगी। निदेशालय ने जांच रिपोर्ट में अपात्र कर्मचारियों की संख्या, उनके जवाब, बांटी गई राशि और रिकवरी की स्थिति का ब्योरा भी मांगा है।
‘HRMS से हुई पहचान: अब नोटिस की बारी’
निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर सुखदीप सिंह झज्ज के मुताबिक, इंटीग्रेटेड ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (HRMS) के जरिए इन कर्मचारियों की पहचान की गई है। अब संबंधित विभाग उन्हें नोटिस देकर लिखित जवाब मांगेंगे।
जांच में अपात्र पाए जाने पर पूरी सहायता राशि वसूली जाएगी। गलत जानकारी देकर लाभ लेने वालों पर प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
‘कौन पात्र नहीं: नियम एक नज़र में’
आवेदन के समय महिलाओं से इस बारे में अंडरटेकिंग ली गई थी। योजना के नियमों के अनुसार नीचे बताए गए लोग लाभ के पात्र नहीं हैं।
| श्रेणी | पात्रता |
|---|---|
| केंद्र और राज्य सरकार के नियमित कर्मचारी | पात्र नहीं |
| केंद्र और राज्य सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी | पात्र नहीं |
| सरकारी बोर्ड, निगम, आयोग, समितियों और सहकारी संस्थाओं से पेंशन पाने वाले या पात्र लोग | पात्र नहीं |
| पिछले वित्त वर्ष में आयकर जमा करने वाले | पात्र नहीं |
‘योजना कब शुरू हुई और कितना मिलता है’
योजना की घोषणा 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर बजट के दौरान हुई थी। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 1 जुलाई 2026 को संगरूर के धूरी से इसे शुरू किया।
18 वर्ष या अधिक उम्र की पंजीकृत महिला मतदाताओं को मासिक सहायता का प्रावधान है। राशि DBT के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है।
| वर्ग | मासिक राशि |
|---|---|
| सामान्य वर्ग | 1,000 रुपये |
| अनुसूचित जाति | 1,500 रुपये |
‘पकड़ में क्यों आईं 1,597 महिलाएं: सिस्टम का सबक’
देखा जाए तो यह मामला सिर्फ वसूली का नहीं है। असल बात यह है कि आवेदन के वक्त अंडरटेकिंग लेने के बाद भी अपात्र लोगों ने लाभ ले लिया और बाद में सरकारी रिकॉर्ड (HRMS) ने उन्हें पकड़ा। इससे साफ होता है कि अब सिर्फ भरोसे पर नहीं, सिस्टम की जांच पर भी भरोसा किया जा रहा है।
आम पंजाबी महिला के लिए इसका मतलब सीधा है: जो पात्र हैं, उन्हें योजना का लाभ मिलता रहेगा। लेकिन गलत जानकारी देने पर राशि लौटानी पड़ सकती है, और नौकरी में अनुशासनात्मक कार्रवाई का खतरा भी है। इसलिए आवेदन करते समय हर शर्त ध्यान से पढ़ना जरूरी है।
‘क्या है पृष्ठभूमि’
मावां-धीयां सत्कार योजना की घोषणा बजट के दौरान महिला दिवस पर हुई और 1 जुलाई 2026 को इसे शुरू किया गया। अब शुरुआती लाभार्थियों की जांच के दौरान ही अपात्र सरकारी महिला कर्मियों का मामला सामने आया है।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- पंजाब सरकार ने 1,597 अपात्र नियमित महिला सरकारी कर्मचारियों की पहचान की है।
- पहचान HRMS के जरिए हुई, अब विभाग नोटिस देकर लिखित जवाब मांगेंगे।
- अपात्र पाए जाने पर पूरी राशि की वसूली और प्रशासनिक या अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
- सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक मिलते हैं।













