Punjab Water Rights Assembly Yamuna Sutlej — पंजाब विधानसभा ने एक ऐतिहासिक दिन मनाया। जल संसाधन मंत्री ब्रिंदर कुमार गोइल ने सर्वसंमति से 5 महत्वपूर्ण मतें पास करवाईं जो यमुना, रावी और सतलुज के पानी पर पंजाब के ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार का दावा करते हैं। यह 2022 के अकाली-भाजपा सरकार के बाद से पहली बार है कि पंजाब ने इतने सशक्त कदम उठाए हैं।
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भारत-पाक विभाजन के बाद से पंजाब पानी के संकट से जूझता रहा है। 1966 के पुनर्गठन में पंजाब का बंटवारा हुआ, मगर पानी की जिम्मेदारी BBMB (भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड) को दे दी गई, जो हरियाणा-राजस्थान को भी पानी देता है। देखा जाए तो पंजाब के 72% इलाके में जल संकट है, जबकि यह भारत का ‘ग्रेनरी’ बना हुआ है।
अब सवाल उठता है: पानी तो पंजाब का है, पर नियंत्रण किसका है? खेती तो पंजाब करता है, पर लाभ किसे मिलता है? यहीं से शुरू हुई गोइल की आवाज की कहानी।
5 ऐतिहासिक मतों का विश्लेषण
| मत संख्या | विषय | मुख्य मांग |
|---|---|---|
| 1 | यमुना पर अधिकार | 1966 से पहले के अविभाजित पंजाब का यमुना पर कानूनी हक; जल विवाद ट्रिब्यूनल गठन (25 अप्रैल 2025 को शिकायत दर्ज)। |
| 2 | BBMB का अधिकार क्षेत्र | धारा 79(1) को चुनौती: रोपड़, हरीकेन, फिरोजपुर हैड वर्क्स का नियंत्रण पंजाब के पास हो। |
| 3 | डैम सेफ्टी एक्ट 2021 | इस अधिनियम को गैर-संवैधानिक बताकर केंद्र से वापस लेने की मांग। |
| 4 | राजस्थान को रॉयल्टी | राजस्थान को सतलुज, रावी, ब्यास का पानी देने के लिए रॉयल्टी/मुआवजे की मांग (क्योंकि राजस्थान रिपेरियन राज्य नहीं है)। |
| 5 | रावी परियोजना | उज्झ परियोजना को प्राथमिकता दें, रावी का पानी रणजीत सागर डैम की ओर मोड़ें। |
मंत्री गोइल का तर्क: “पानी हमारा, लाभ किसका?”
जल संसाधन मंत्री ने जोरदार बहस में कहा:
“राजस्थान रिपेरियन (सीमावर्ती) राज्य नहीं है। यह पंजाब का पानी अपनी सिंचाई, पीने और व्यावसायिक कार्यों के लिए इस्तेमाल करके कमाई कर रहा है। फिर भी कोई रॉयल्टी नहीं दे रहा। यह न्यायसंगत नहीं।”
यह पंजाब की सदियों पुरानी तकलीफ है। खेती में कड़ी मेहनत, खाद्यान्न उगाना, मगर पानी के हक में कभी जीत न मिली। अब पंजाब सरकार ने कानूनी मंच पर आने का फैसला किया है।
BBMB पर सवाल: पंजाब का पानी, दूसरों का नियंत्रण
दूसरे मत में गोइल ने 1966 की ‘रीपेरियन राइट्स’ पर सवाल उठाया। उस वक्त यह तय हुआ था कि केवल पानी छूने वाले राज्य ही नियंत्रण रख सकते हैं। लेकिन BBMB के तहत रोपड़, हरीकेन, फिरोजपुर जैसे महत्वपूर्ण हैड वर्क्स का नियंत्रण BBMB के पास है — जो हरियाणा-राजस्थान के हितों का भी ध्यान रखता है।
मंत्री ने हरियाणा, कर्नाटक, ओडिशा की मिसाल दी, जहां राज्य सरकारें अपने हैड वर्क्स पर नियंत्रण रखती हैं। क्यों पंजाब अलग?
आम आदमी पर असर: किसान को सूखा, दूसरों को हरियाली
इस मत के पास होने का मतलब है: पंजाब अब सुप्रीम कोर्ट, जल विवाद ट्रिब्यूनल और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी लड़ाई लड़ेगा। यह 20-30 साल की कानूनी जद्दोजहद हो सकती है। मगर किसान के लिए यह उम्मीद की किरण है।
आज किसान को भूजल का खतरनाक संकट है (72% इलाका critical zone में)। सतह के पानी तक पहुंच मुश्किल। अगर पंजाब को अपने हक के पानी में नियंत्रण मिल जाए, तो सिंचाई की योजना बेहतर हो सकती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पास हुए 5 मत: सर्वसंमति से विधानसभा में पारित।
- यमुना पर हक: 1966 से पहले के अविभाजित पंजाब का कानूनी अधिकार; जल विवाद ट्रिब्यूनल गठन की शिकायत 25 अप्रैल 2025 को दर्ज।
- BBMB को चुनौती: धारा 79(1) गैर-संवैधानिक; हैड वर्क्स पर पंजाब का नियंत्रण मांग।
- डैम सेफ्टी एक्ट 2021: गैर-संघीय, केंद्र से वापसी की मांग।
- राजस्थान को रॉयल्टी: पानी देने के लिए मुआवजे की कानूनी मांग।
- रावी परियोजना: उज्झ में प्राथमिकता, रणजीत सागर डैम की ओर मोड़ना।











