Pakistan Invitation CM Mann के लिए एक ऐसा राजनीतिक मोड़ बन चुका है जिसने दोनों देशों के रिश्तों की पुरानी बहस को फिर से छेड़ दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पाकिस्तान के प्रांतीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री और पाक सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) के अध्यक्ष रमेश सिंह अरोड़ा ने औपचारिक निमंत्रण भेजा है। यह निमंत्रण 27 से 29 नवंबर तक लाहौर में आयोजित होने वाले चौथे अंतरराष्ट्रीय पंजाबी सम्मेलन के लिए है।
वीडियो संदेश में क्या बोले पाकिस्तानी मंत्री
देखा जाए तो रमेश सिंह अरोड़ा ने सोमवार को एक वीडियो संदेश के जरिए जो बातें कहीं, वे कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम हैं। उन्होंने सीधे कहा: “सरदार भगवंत सिंह मान, हम आपको सलाम करते हैं। आपने विधानसभा के पटल पर कहा था कि आप पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन सरकार जाने नहीं दे रही।”
और बस यहीं से इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग ले लिया।
अरोड़ा ने आगे कहा कि पाकिस्तान एक खूबसूरत गुलदस्ता है जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, मसीह सब मिलकर रहते हैं। उन्होंने गारंटी दी कि पाकिस्तान में जितना एक मुस्लिम आजाद है, उतने ही हिंदू, सिख और मसीह भी आजाद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता भारत की हुकूमत मान को आने की इजाजत देती है या नहीं, लेकिन उनका निमंत्रण खुला है।
CM मान का केंद्र पर तीखा तंज
समझने वाली बात यह है कि यह पूरा मामला तब गरमाया जब 23 अक्टूबर को पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान CM मान ने इस निमंत्रण का जिक्र किया और केंद्र की भाजपा सरकार पर सीधा तंज कसा। उन्होंने कहा: “ये लोग तो मुझे फ्रांस या जापान जाने की अनुमति भी नहीं देते, भला मुझे पाकिस्तान जाने की अनुमति कैसे देंगे?”
यह बयान अपने आप में एक बड़ा सियासी संदेश था। मान ने यह भी सुझाव दिया कि अगर केंद्र से राजनीतिक और सुरक्षा क्लीयरेंस मिल जाए, तो पूरा पंजाब सदन एक साथ करतारपुर साहिब कॉरिडोर के रास्ते पाकिस्तान जाकर गुरुद्वारों के दर्शन कर सकता है।
फ्रांस यात्रा का विवाद: पुरानी कड़वाहट
दिलचस्प बात यह है कि मान की विदेश यात्राओं को लेकर केंद्र से टकराव कोई नया नहीं है। इससे पहले फ्रांस यात्रा को लेकर भी बड़ा विवाद हुआ था। केंद्र से अनुमति नहीं मिलने पर मान ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद वह फ्रांस गए, लेकिन वापसी पर दिल्ली एयरपोर्ट पर जांच के नाम पर रोके जाने पर आम आदमी पार्टी ने जमकर हंगामा किया था। यह घटना मान और केंद्र के बीच के तनाव का जीता-जागता सबूत है।
सिख आबादी का दिल दहला देने वाला आंकड़ा
यहां ध्यान देने वाली बात एक आंकड़ा है जो किसी भी सिख का दिल दहला देगा। बंटवारे से पहले 1947 में आज के पाकिस्तान वाले भौगोलिक क्षेत्र में सिखों की आबादी लगभग 20 लाख थी। आज यह घटकर मात्र 15,998 रह गई है। यह पाकिस्तान की कुल आबादी का महज 0.01% है।
| वर्ष | पाकिस्तान में सिख आबादी | कुल आबादी में हिस्सा |
|---|---|---|
| 1947 (बंटवारे से पहले) | लगभग 20 लाख | बड़ा हिस्सा |
| 2026 (वर्तमान) | 15,998 | लगभग 0.01% |
यह गिरावट इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक की गवाह है।
करतारपुर कॉरिडोर और स्पीकर संधवां का जिक्र
रमेश सिंह अरोड़ा ने पंजाब विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संधवां भी करतारपुर कॉरिडोर के रास्ते पाकिस्तान आने के इच्छुक रहे हैं। अरोड़ा ने भारतीय विधायकों से अपील की कि वे केवल गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों के ऐतिहासिक स्थलों का भी दौरा करें।
इस निमंत्रण का बड़ा मतलब
अगर गौर करें तो इस निमंत्रण के पीछे कई परतें हैं। एक तरफ पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सॉफ्ट इमेज बनाना चाहता है, दूसरी तरफ पंजाब की राजनीति में करतारपुर और सिख भावनाएं हमेशा से अहम मुद्दा रही हैं। CM मान का यह कदम अगर साकार होता है तो यह भारत-पाक संबंधों में एक ऐतिहासिक मोड़ हो सकता है। लेकिन केंद्र की मंजूरी के बिना यह संभव नहीं, और यही सबसे बड़ी अड़चन है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पाकिस्तान के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने CM मान को 27-29 नवंबर के लाहौर पंजाबी सम्मेलन का औपचारिक निमंत्रण दिया।
- CM मान ने सदन में केंद्र पर तंज कसते हुए कहा कि फ्रांस-जापान की अनुमति नहीं मिलती, पाकिस्तान कैसे देंगे।
- पाकिस्तान में सिख आबादी 20 लाख से घटकर सिर्फ 15,998 रह गई है।
- फ्रांस यात्रा के दौरान दिल्ली एयरपोर्ट पर रोके जाने का विवाद पहले ही हो चुका है।













