Jhota Postmortem का मामला अब भी अधर में लटका हुआ है। हत्या के दस दिन बीत जाने के बाद भी परविंदर सिंह झोटा का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है। उनका शव मानसा के सिविल अस्पताल में ही रखा हुआ है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इतने लंबे समय तक शव का अंतिम संस्कार न होना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे मामले की जटिलता को भी दिखाता है।
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SIT से दूसरी बैठक भी रही बेनतीजा
पंजाब सरकार की ओर से गठित तीन महिला IAS अधिकारियों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और झोटा के परिवार सहित एक्शन कमेटी के बीच बुधवार को दूसरे दौर की बैठक हुई, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी।
पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि परिवार पोस्टमार्टम के लिए राजी हो सकता है, क्योंकि झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने धरने के दौरान संगत से इसकी इजाजत भी मांगी थी। लेकिन इंसाफ कमेटी और प्रशासन के बीच मांगों पर सहमति न बनने से यह फैसला अटक गया।
14 मांगों में से कुछ पर ही बनी सहमति
SIT सदस्य IAS अधिकारी अपनीत रियात के मुताबिक, एक्शन कमेटी ने सरकार के सामने कुल 14 मांगें रखी थीं। इनमें CBI जांच की मांग पर कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य मांगों पर भी सहमति बनी है। हालांकि सभी मांगों पर अंतिम सहमति अब भी बाकी है।
समझने वाली बात है कि जब तक सभी मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक पोस्टमार्टम का फैसला टलता ही रहेगा।
आरोपी केमिस्ट की आज कोर्ट में पेशी
इधर, आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार और उसकी पत्नी नीलम का रिमांड आज खत्म हो रहा है, जिसके बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस पूछताछ के लिए अदालत से प्रोडक्शन रिमांड भी मांग सकती है।
CBI टीम ने मानसा रेस्ट हाउस में झोटा के पिता भीम सिंह, मां अमरजीत कौर और पत्नी मनप्रीत कौर को पूछताछ के लिए बुलाया है। वहीं दूसरी टीम आरोपी अश्विनी कुमार और उसे भागने में मदद करने वाले विपिन कुमार के घर पहुंची, जहां आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई।
मुख्य बातें (Key Points)
- Jhota Postmortem दस दिन बाद भी नहीं हो सका, शव सिविल अस्पताल में।
- SIT और परिवार के बीच दूसरी बैठक भी बेनतीजा रही।
- 14 मांगों में से कुछ पर ही सहमति बनी, CBI जांच शुरू हो चुकी है।
- आरोपी केमिस्ट अश्विनी कुमार और पत्नी नीलम की आज कोर्ट में पेशी।













