Parwinder Jhota Murder Case एक बार फिर सुर्खियों में है। मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, और अब 22 अक्टूबर को इसी मुद्दे पर पंजाब विधानसभा में श्रद्धांजलि दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दो मिनट का मौन रखा गया, फिर कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।
दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा मामला अब सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं रहा। इसने पंजाब की सियासत, प्रशासनिक कार्यशैली और जांच एजेंसियों की साख, तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आम आदमी के लिए सवाल यह है कि अगर नशे के खिलाफ बोलने वाले को ही सुरक्षा नहीं मिल पा रही, तो आगे कौन हिम्मत करेगा।
विधानसभा में दो मिनट का मौन, नौ मिनट में स्थगित सदन
पंजाब विधानसभा का छह दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हुआ। पहले दिन सबसे पहले दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई। इसमें मानसा के परविंदर सिंह झोटा के साथ-साथ संगरूर सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आठ मनरेगा मजदूरों को भी याद किया गया।
समझने वाली बात है कि इतने बड़े और संवेदनशील मुद्दे पर सदन की कार्यवाही महज नौ मिनट छह सेकेंड ही चल पाई। इसके बाद सदन कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया। यानी असली बहस अभी बाकी है।
भाजपा का प्रदर्शन, सुनील जाखड़ का तीखा सवाल
सत्र शुरू होने से पहले ही विधानसभा के बाहर हंगामे का माहौल बन गया था। भारतीय जनता पार्टी के नेता और अबोहर के पीड़ित परिवार विधानसभा पहुंचे और जमकर प्रदर्शन किया। पुलिस को आखिरकार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना पड़ा।
पंजाब भाजपा के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, “सीएम साहब, इस परिवार से मिल लो। अपनी पगड़ी की लाज रख लो। अगर आप हवाई जहाज से सीबीआई जांच मार्क कर सकते हैं, तो इनसे मिलने क्यों नहीं जा सकते?” उन्होंने साफ कहा कि जब तक इंसाफ नहीं मिलता, वे विधानसभा आते रहेंगे।
कांग्रेस और AAP में नशे के मुद्दे पर टकराव
वहीं विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इस मामले में सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में दिखा। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे सदन की कार्यवाही नहीं चलने देंगे। उनका आरोप सीधा है, नशा तस्करी रोकने में सरकार पूरी तरह फेल रही है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी इस मुद्दे पर बैकफुट पर आने को तैयार नहीं। पार्टी नशे के खिलाफ चलाए अभियान की उपलब्धियां गिनाकर जवाब देने की रणनीति बना रही है। साथ ही गुजरात के बंदरगाहों और सीमा से होने वाली तस्करी को लेकर केंद्र सरकार पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं। इसी बीच विपक्ष ED और CBI की कार्रवाइयों को राजनीतिक बदले की भावना बताते हुए केंद्र पर भी हमलावर है।
CBI के सामने सबसे बड़ी चुनौती: मिटा हुआ क्राइम सीन
अब बात करते हैं इस केस की सबसे संवेदनशील कड़ी की। घटना के अगले ही दिन आरोपी की मेडिकल दुकान को तोड़कर आग लगा दी गई थी। और बस यहीं से शुरू हुई असली परेशानी। अब Central Bureau of Investigation (CBI) के लिए घटनास्थल की असली स्थिति समझना और क्राइम सीन दोबारा तैयार करना लगभग नामुमकिन जैसा हो गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जांच टीम को अब आसपास के दुकानदारों, चश्मदीदों और वारदात के दौरान बने लाइव वीडियो पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। यही सबूत अब तय करेंगे कि गोलीबारी के वक्त कौन कहां था और आरोपी किस तरफ भागा।
| CBI जांच की चुनौती | वजह |
|---|---|
| क्राइम सीन उपलब्ध नहीं | दुकान तोड़कर आग लगाई गई |
| CCTV सबूत गायब | कैमरे नष्ट हो चुके |
| दवाइयों का रिकॉर्ड नहीं | बिल और स्टॉक डिटेल खत्म |
| गवाहों पर निर्भरता | आसपास के दुकानदार ही सहारा |
| डिजिटल सबूत जरूरी | फेसबुक लाइव वीडियो अहम कड़ी |
दुकान तोड़ने पर परिवार और मूसेवाला के पिता ने उठाए सवाल
झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने प्रशासन की कार्रवाई पर सीधा सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि न उन्होंने और न ही परिवार के किसी सदस्य ने दुकान गिराने की मांग की थी। उनका आरोप है कि सबूत मिटाने के लिए जानबूझकर यह कदम उठाया गया।
इसी मुद्दे पर सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी खुलकर सामने आए। उन्होंने कहा कि दुकान तोड़ना प्रशासन का गलत फैसला था। अगर दुकान बची रहती तो बिना बिल की दवाइयों का रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, सब कुछ मिल सकता था। अब वो सारे सबूत हमेशा के लिए खत्म हो चुके हैं।
CBI ने बुधवार को नई FIR दर्ज कर पुराना पुलिस रिकॉर्ड भी हासिल कर लिया है। एक DIG रैंक अधिकारी की अगुवाई में टीम परिवार से लगातार संपर्क में है।
10 दिन बाद भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम, SIT बैठक बेनतीजा
चिंता का विषय यह है कि हत्या के दस दिन बीत जाने के बाद भी झोटा का पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। उनकी देहभ मानसा के सिविल अस्पताल में ही रखी हुई है।
तीन महिला IAS अधिकारियों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और परिवार के बीच दूसरे दौर की बैठक भी बेनतीजा रही। SIT सदस्य अपनीत रियात ने बताया कि एक्शन कमेटी की 14 मांगों में से कुछ पर सहमति बनी है, जिसमें CBI जांच शामिल है, लेकिन सभी मांगों पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। परिवार और एक्शन कमेटी मुख्यमंत्री भगवंत मान और DGP गौरव यादव के इस्तीफे समेत 10 मांगों पर अड़े हुए हैं।
अबोहर के अजय हत्याकांड पर भी विधानसभा के बाहर प्रदर्शन
इसी बीच अबोहर से भी एक दर्दनाक मामला सामने आया। अजय नाम के युवक को 27 सितंबर को गोली मारी गई थी, जिसकी इलाज के दौरान डीएमसी लुधियाना में मौत हो गई। उसके परिवार को लेकर सुनील जाखड़ और अश्वनी शर्मा विधानसभा पहुंचे और सरकार से जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
मृतक की मां मंजू ने बताया कि अजय ने मरने से पहले पुलिस को अपना बयान भी दिया था, इसके बावजूद आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर हैं। जाखड़ ने चेतावनी दी कि अगर सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
किसान नेता राकेश टिकैत 24 अक्तूबर को पहुंचेंगे मानसा
उम्मीद की किरण तब दिखी जब किसान आंदोलन के बड़े चेहरे राकेश टिकैत ने इस संघर्ष में शामिल होने का ऐलान किया। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता 24 अक्तूबर को मानसा में चल रहे धरने में पहुंचेंगे।
दरअसल, कुछ दिन पहले झोटा के पिता का एक भावुक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे इंसाफ की इस लड़ाई में राकेश टिकैत का इंतजार कर रहे हैं। इसी अपील के बाद टिकैत का मानसा आने का फैसला सामने आया।
SGPC ने जख्मी साथियों को सौंपे 5-5 लाख के चेक
राहत की बात यह रही कि शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने झोटा के साथ घायल हुए चार युवकों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे। यह चेक तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और SGPC प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी की घोषणा के बाद दिए गए।
ज्ञानी टेक सिंह ने कहा कि झोटा की कुर्बानी पूरे समाज के लिए प्रेरणा है और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले युवाओं को अकेला महसूस नहीं होने दिया जाएगा।
पंजाब में सरकारी मुलाजिम हड़ताल पर, OPS पर अड़े
इसी हफ्ते पंजाब सरकार के सामने एक और मोर्चा खुल गया। सरकारी मुलाजिमों और चीफ सेक्रेटरी के बीच देर रात तक चली बैठक पूरी तरह बेनतीजा रही। मुलाजिम ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की मांग पर अड़े हैं, लेकिन सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया।
इसका असर आज साफ दिखा। सरकारी बसों का चक्का जाम रहा, दफ्तरों में कामकाज ठप रहा और स्कूलों में भी पढ़ाई प्रभावित हुई। सवाल उठता है कि जब विधानसभा सत्र चल रहा है, तब भी कर्मचारी हड़ताल पर क्यों अड़े हैं। जवाब साफ है, मांगों पर सरकार की ठंडी प्रतिक्रिया।
‘जानें पूरा मामला’
परविंदर सिंह झोटा लंबे समय से मानसा और आसपास के इलाकों में नशे के खिलाफ मुहिम चला रहे थे। वे सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर नशीली दवाओं की बिक्री और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे थे। 13 अक्टूबर को वे एक मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने पहुंचे थे, जहां दुकान संचालक अश्विनी कुमार से उनका विवाद हुआ और गोलीबारी में उनकी मौत हो गई। इस पूरी घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे संघर्ष को एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बना दिया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब विधानसभा सत्र के पहले दिन परविंदर सिंह झोटा सहित कई दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी गई, सदन सिर्फ 9 मिनट चला।
- आरोपी की दुकान तोड़े जाने से CBI जांच में सबूत जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है।
- 10 दिन बाद भी पोस्टमार्टम नहीं हुआ, SIT और परिवार के बीच सहमति अधूरी।
- किसान नेता राकेश टिकैत 24 अक्तूबर को मानसा धरने में पहुंचेंगे, SGPC ने घायलों को आर्थिक मदद दी।













