Akal Takht Action SGPC Members Bhagwant Mann: श्री अकाल तख्त साहिब ने पंजाब की राजनीति में एक बड़ा कदम उठाते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के दो सदस्यों: मिट्ठू सिंह कानेके और जसवंत सिंह पुड़ैण के खिलाफ कार्रवाई की है। इन दोनों सदस्यों ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान से मुलाकात की थी, जिन्हें अकाल तख्त ने 15 जून 2026 को “गुरु द्रोही और खालसा पंथ विरोधी” घोषित किया हुआ है। अकाल तख्त के कार्यकारी जथेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज के आदेश पर दोनों को 10 दिनों के भीतर सफाई देने का फरमान जारी किया गया है।
इतना ही नहीं, जब तक दोनों सदस्य अपनी सफाई देकर आरोप से मुक्त नहीं हो जाते, उन पर SGPC की बैठकों में भाग लेने पर पाबंदी लगा दी गई है।
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‘सीधे बैठक से उठाए गए मिट्ठू सिंह’
और बस यहीं से शुरू हुई सबसे चौंकाने वाली घटना। आज SGPC की अंतरिम कमेटी की बैठक थी। मिट्ठू सिंह कानेके जब बैठक में बैठे थे, तभी उन्हें अकाल तख्त का यह पत्र दिखाकर बैठक से बाहर कर दिया गया। मिट्ठू सिंह ने बाद में कहा कि उन्हें इस आदेश से संबंधित कोई पत्र पहले नहीं मिला था।
यह दृश्य अपने आप में बता देता है कि यह मामला कितना गंभीर और तात्कालिक है।
‘नानकसर के बाबा लखा सिंह को भी नोटिस’
शिरोमणि कमेटी के दो सदस्यों के बाद अकाल तख्त ने दायरा और बढ़ाया। नानकसर कलेरां (जगराओं, लुधियाना) के बाबा लखा सिंह को भी 10 दिनों में अकाल तख्त साहिब में पेश होकर सफाई देने का आदेश दिया गया है। वह भी उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो CM भगवंत मान से मिला था।
अकाल तख्त के पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि बाबा लखा सिंह एक सिख प्रचारक हैं और अकाल तख्त के आदेशों की पालना करना और करवाना उनका बुनियादी फर्ज था। लेकिन उन्होंने इस जिम्मेदारी की अनदेखी की।
‘क्यों गए थे CM मान से मिलने?’
अगर गौर करें तो मिट्ठू सिंह कानेके, जसवंत सिंह पुड़ैण समेत पांच सिखों का एक प्रतिनिधिमंडल CM भगवंत मान से मिला था। यह मुलाकात आनंदपुर साहिब में हुई एक घटना और बहरीन से आई एक महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग के लिए की गई थी।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अकाल तख्त के पत्र में एक और बड़े विवाद का जिक्र है: पंजाब सरकार द्वारा पारित “जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट, 2026।” अकाल तख्त का कहना है कि यह एक्ट सिख पंथ ने स्वीकार नहीं किया क्योंकि इससे सरकार का सिख मामलों में दखल का रास्ता खुलता है। इस एक्ट को लेकर अकाल तख्त पहले से ही आपत्ति जता रहा है और यह मामला अभी भी विचाराधीन है।
‘धार्मिक सर्वोच्चता बनाम राजनीतिक जरूरत’
देखा जाए तो यह मामला सिख धर्म की सर्वोच्च संस्था और पंजाब सरकार के बीच बढ़ते तनाव का प्रतीक है। अकाल तख्त ने CM मान को “गुरु द्रोही” घोषित किया हुआ है और अब जो भी उनसे मिलता है, उसे जवाबदेह ठहराया जा रहा है। यह दर्शाता है कि आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले धार्मिक और राजनीतिक टकराव और तीखा होता जाएगा।
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 15 जून 2026 | अकाल तख्त ने CM भगवंत मान को “गुरु द्रोही” घोषित किया |
| हाल ही में | 5 सिखों का प्रतिनिधिमंडल CM मान से मिला |
| 29 सितंबर | SGPC सचिव को पत्र जारी |
| 30 सितंबर | दोनों SGPC सदस्यों को नोटिस |
| आज | मिट्ठू सिंह को बैठक से बाहर किया गया |
| 10 दिन के भीतर | तीनों को अकाल तख्त में पेश होना होगा |
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- अकाल तख्त ने SGPC के दो सदस्यों: मिट्ठू सिंह कानेके और जसवंत सिंह पुड़ैण को 10 दिन में सफाई का आदेश दिया।
- CM भगवंत मान को 15 जून 2026 को “गुरु द्रोही और खालसा पंथ विरोधी” घोषित किया गया था।
- नानकसर के बाबा लखा सिंह को भी नोटिस जारी।
- मिट्ठू सिंह को आज SGPC की अंतरिम बैठक से बाहर किया गया।
- जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट 2026 पर भी अकाल तख्त की आपत्ति जारी है।












