Dhirendra Shastri Ludhiana Controversy: बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री लुधियाना में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान दिए गए कथित बयान को लेकर विवाद में घिर गए हैं। पंजाब के शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने इस बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए शास्त्री से सार्वजनिक माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग की है। माफी न मिलने पर उन्होंने शास्त्री के साथ-साथ कार्यक्रम के आयोजकों के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते मुस्लिम और ईसाई दोनों समुदाय इस विवाद में उतर आए।
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‘शाही इमाम का सख्त बयान’
शाही इमाम ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी करते हुए कहा कि लुधियाना में शास्त्री का स्वागत है, लेकिन जाति और धर्म के आधार पर नफरत फैलाने का उन्हें कोई हक नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां के सभी धर्मों के लोग एकजुट हैं और आपसी प्रेम में विश्वास रखते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि मौलाना उस्मान ने एक तीखा तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि शास्त्री चीन के खिलाफ बोलते हैं, जबकि उनके बयान रिकॉर्ड करने के लिए जो माइक इस्तेमाल होते हैं, वे भी चीन के ही बने हुए हैं। उन्होंने माना कि शायद वह लोगों को हंसाने के लिए ऐसा कह रहे हों, लेकिन कई बयान बेहद बुरी रुचि के हैं जो लुधियाना की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी।
‘ईसाई समुदाय ने भी खटखटाया पुलिस का दरवाजा’
अगर गौर करें तो इस विवाद में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि ईसाई भाईचारे ने भी पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर चिंता जाहिर की। क्रिश्चियन यूनाइटेड फेडरेशन के अध्यक्ष अल्बर्ट दुआ ने कहा कि शास्त्री ने पंजाब के लोगों को बांटने की पूरी कोशिश की है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईसाई समुदाय आपसी शांति बनाए रखेगा और चुनाव से पहले राज्य की अमन-चैन को भंग नहीं होने दिया जाएगा।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पंजाब में विधानसभा चुनाव करीब हैं।
‘शास्त्री का जवाब: मैंने किसी धर्म के खिलाफ नहीं बोला’
दूसरी तरफ, धीरेंद्र शास्त्री ने मीडिया के सामने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी धर्म के खिलाफ कुछ नहीं बोला। उनका कहना था कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज में नशा और धर्म परिवर्तन रोकना है। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुओं और सिखों को मंदिरों और गुरुद्वारों में जाना चाहिए।
साथ ही उन्होंने पंजाब सरकार द्वारा नशे के खिलाफ किए जा रहे कामों की सराहना भी की।
‘BJP का साया और 5 दिवसीय कार्यक्रम’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह धार्मिक आयोजन पिछले पांच दिनों से लुधियाना में चल रहा था। इसे BJP नेताओं का भरपूर समर्थन मिला। शास्त्री की अगुआई में निकाली गई ‘कलश यात्रा’ में वरिष्ठ BJP महिला पदाधिकारियों ने भारी तादाद में हिस्सा लिया। इससे साफ होता है कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील था।
‘पंजाब की अमन-चैन पर मंडराता सवाल’
सवाल उठता है कि चुनाव से पहले पंजाब में इस तरह के विवाद आखिर किसके हित में हैं? एक तरफ शास्त्री के समर्थक हैं जो उनके बयानों को धर्म की रक्षा से जोड़ते हैं, दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय हैं जो इसे नफरत फैलाने का जरिया मान रहे हैं। यह दर्शाता है कि पंजाब जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह के बयान कितनी जल्दी राजनीतिक रंग ले लेते हैं।
‘मुख्य बातें (Key Points)’
- बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के लुधियाना में दिए कथित बयान पर विवाद।
- शाही इमाम मौलाना उस्मान रहमानी ने माफी मांगने की मांग की, न मानने पर प्रदर्शन की चेतावनी।
- ईसाई समुदाय ने भी पुलिस कमिश्नर से मुलाकात कर चिंता जताई।
- शास्त्री ने किसी भी धर्म के खिलाफ बोलने से इनकार किया।
- 5 दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम को BJP नेताओं का भरपूर समर्थन मिला था।













