Punjab Nasha Mukti Centers में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के तहत भगवंत मान सरकार द्वारा संचालित नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि प्रदेश की उपचार व्यवस्था के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास का मजबूत संकेत है।
देखा जाए तो यह आंकड़े पंजाब सरकार की नशा विरोधी नीतियों की सफलता को दर्शाते हैं। सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल होने वाले पीड़ितों की संख्या वर्ष 2024 में 9,577 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 25,290 हो गई। यह 164 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है।
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2026 में भी जारी रहा रुझान
यह रुझान वर्ष 2026 में भी जारी रहा और इस वर्ष जुलाई तक 14,000 से अधिक नशा पीड़ित सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल हो चुके थे। समझने वाली बात यह है कि यह वृद्धि मार्च 2025 में शुरू किए गए ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के बाद विशेष रूप से देखी गई है।
| वर्ष | नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल | पुनर्वास केंद्रों में दाखिल |
|---|---|---|
| 2024 | 9,577 | 2,644 |
| 2025 | 25,290 (+164%) | 8,574 (+224%) |
| 2026 (जुलाई तक) | 14,000+ | 5,800+ |
सामाजिक कलंक से बाहर आ रहे लोग
यह वृद्धि इस बात का मजबूत संकेत है कि अधिक से अधिक परिवार और व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहे अपने प्रियजनों अथवा स्वयं को सामाजिक कलंक के अंधेरे में रखने के बजाय उपचार केंद्रों तक पहुंचने के लिए आगे आ रहे हैं।
अगर गौर करें तो ऐसे प्रदेश में, जहां नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उचित उपचार व्यवस्था उपलब्ध होने तक वर्षों तक इस समस्या का सामना करना पड़ा हो, इस तरह की पहल का बढ़ता प्रभाव विशेष महत्व रखता है।
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पुनर्वास ढांचे में 224% की वृद्धि
प्रदेश के पुनर्वास ढांचे में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी पुनर्वास केंद्रों में नशा पीड़ितों के दाखिलों की संख्या वर्ष 2024 में 2,644 थी, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 8,574 हो गई। यह 224 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि वर्ष 2026 में जुलाई तक ही 5,800 से अधिक पीड़ित इन केंद्रों में दाखिल हो चुके थे, जो वर्ष 2025 में दर्ज कुल दाखिल मरीजों का लगभग 68 प्रतिशत है।
OOAT क्लीनिक में भी बढ़े मरीज
उपचार की बढ़ती पहुंच पंजाब के आउटपेशेंट ओपिओइड-असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिक नेटवर्क के माध्यम से भी दिखाई देती है। इसके तहत नई पंजीकरण संख्या वर्ष 2024 में 13,033 से बढ़कर वर्ष 2025 में 17,702 हो गई। इस वर्ष अगस्त तक 12,500 से अधिक नए मरीज पंजीकृत हो चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये आंकड़े एक ऐसे व्यापक उपचार ढांचे की ओर संकेत करते हैं, जिसमें नशीले पदार्थों पर निर्भरता से जूझ रहे लोगों के लिए सहायता प्राप्त करने के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं।
NDPS Act की धारा 64A के तहत कानूनी संरक्षण
राज्य सरकार ने कानून के तहत उपलब्ध पुनर्वास संबंधी प्रावधानों का भी प्रभावी उपयोग किया है। 27 अगस्त 2026 तक 11,000 से अधिक व्यक्तियों को NDPS अधिनियम की धारा 64A के तहत कानूनी संरक्षण प्रदान किया जा चुका है।
समझने वाली बात यह है कि इस अधिनियम के तहत नशे की लत से पीड़ित अथवा नशीले पदार्थों के सेवन के आरोपों में नामजद व्यक्तियों को कानूनी संरक्षण प्रदान करने का प्रावधान है। यह उन्हें जेल की जगह उपचार का विकल्प देता है।
स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “पंजाब के लिए दाखिल होने वाले मरीजों की संख्या में यह तेज वृद्धि इस पहल के सबसे उत्साहजनक परिणामों में से एक साबित हो रही है। लोग लगातार आगे आ रहे हैं, परिवार संस्थागत सहायता की मांग कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “‘युद्ध नशों विरुद्ध’ तीन स्तंभों पर आधारित है:
- तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
- प्रभावित लोगों के लिए उपचार एवं पुनर्वास
- बच्चों को नशों से बचाने के लिए रोकथाम”
उपचार और पुनर्वास का लक्ष्य
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “उपचार और पुनर्वास के माध्यम से हमारा प्रयास पीड़ितों को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालना, परिवारों को फिर से जोड़ना और नशीले पदार्थों के सेवन से जूझ रहे लोगों को स्वस्थ एवं बेहतर जीवन की ओर एक सकारात्मक मार्ग प्रदान करना है।”
अगर गौर करें तो यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है। हर संख्या एक व्यक्ति, एक परिवार और एक नई शुरुआत का प्रतिनिधित्व करती है।
मुख्य बातें (Key Points)
- नशा मुक्ति केंद्रों में दाखिल मरीजों में 164% की वृद्धि
- 2024 में 9,577 से बढ़कर 2025 में 25,290 मरीज
- पुनर्वास केंद्रों में 224% की वृद्धि
- OOAT क्लीनिक में 12,500+ नए पंजीकरण (2026)
- 11,000+ को NDPS Act की धारा 64A के तहत कानूनी संरक्षण
- ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान का सकारात्मक प्रभाव
- उपचार व्यवस्था में लोगों का बढ़ता विश्वास










