Chief Justice Ashwani Kumar Mishra ने आज पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 37वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह उस समय हुआ जब पंजाब सरकार इस नियुक्ति का पुरजोर विरोध कर रही थी। देखा जाए तो यह सिर्फ एक औपचारिक शपथ ग्रहण नहीं था, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच चल रहे संवैधानिक टकराव का एक नया अध्याय था।
पंजाब लोक भवन में आयोजित इस समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने जस्टिस मिश्रा को पद की शपथ दिलाई। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इस समारोह से पूरी तरह गायब रहे। और तो और, सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का कोई भी बड़ा नेता या प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ।
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विरोध के बावजूद हुआ शपथ ग्रहण
अगर गौर करें तो इस नियुक्ति की पूरी कहानी काफी दिलचस्प है। पंजाब सरकार ने रविवार को एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई थी। इस बैठक में एक प्रस्ताव पारित करके राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से अपील की गई थी। अपील में कहा गया था कि जब तक पंजाब सरकार की सहमति नहीं मिलती, तब तक चीफ जस्टिस की नियुक्ति और शपथ ग्रहण समारोह को टाला जाए।
कैबिनेट ने यह भी कहा था कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से परामर्श की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। पर केंद्र सरकार ने राज्य की इस अपील को दरकिनार करते हुए नियुक्ति को आगे बढ़ा दिया। यहां ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले भी पंजाब सरकार ने केंद्र को सूचित किया था कि वह जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति पर अपनी सहमति नहीं दे रही है।
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कौन हैं और कौन नहीं आया समारोह में
शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष उपस्थित थे। पंजाब की तरफ से मुख्य सचिव सिन्हा, डीजीपी और एडवोकेट जनरल ही मौजूद रहे। समझने वाली बात यह है कि पंजाब की राजनीतिक हस्तियों में से सिर्फ गनीव कौर मजीठिया ही इस समारोह में शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान की गैरहाजिरी को राजनीतिक विरोध के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह भी है कि मान ने रविवार शाम को ही बठिंडा से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर दिया था। सोमवार को उन्हें गुरुग्राम जेल में बंद पूर्व मंत्री संजीव अरोड़ा से मिलना था।
जस्टिस शील नागू की जगह लेंगे मिश्रा
Chief Justice Ashwani Kumar Mishra अब जस्टिस शील नागू का स्थान लेंगे। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पंजाब और केंद्र के बीच कई मुद्दों पर तनाव चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पंजाब सरकार ने इस नियुक्ति पर पहले भी आपत्ति जताई थी, लेकिन उसकी राय को महत्व नहीं दिया गया।
केंद्र सरकार की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया था कि “पंजाब की गल्ल दब्बी जा रही है।” उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर पंजाब की आवाज दबाने का आरोप लगाया है।
संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल
अगर गौर करें तो यह पूरा मामला संवैधानिक प्रक्रिया के सवाल को भी उठाता है। पंजाब सरकार का कहना है कि राज्य सरकार से परामर्श की प्रक्रिया अधूरी रह गई है। हालांकि केंद्र सरकार का तर्क है कि उन्होंने सभी संवैधानिक प्रावधानों का पालन किया है।
यह देखा जाना बाकी है कि क्या पंजाब सरकार इस मामले में कोई कानूनी कदम उठाती है या नहीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और गर्म हो सकता है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा
इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दल इसे संघीय ढांचे पर हमला बता रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार के समर्थकों का कहना है कि यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है।
समझने वाली बात यह है कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति एक संवेदनशील मामला होता है, क्योंकि यह राज्य के न्यायिक ढांचे को प्रभावित करता है। पंजाब सरकार की चिंता शायद यह भी रही होगी कि राज्य के हितों का ध्यान रखा जाए।
CM मान का बठिंडा दौरा भी रद्द
इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को बठिंडा जिले के पिंड महिराज में होने वाला अपना ‘लोक मिलणी’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया। रामपुरा फूल से आप विधायक बलकार सिंह सिद्धू ने अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट डालकर इस कार्यक्रम के रद्द होने की जानकारी दी।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री गुरुग्राम में पूर्व मंत्री से मुलाकात के बाद सीधे चंडीगढ़ जाएंगे। हालांकि मंगलवार को मानसा जिले के पिंड फाफड़े भाईके में होने वाला ‘लोक मिलणी’ कार्यक्रम निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ही रहेगा।
क्या है आगे की राह
यह तो तय है कि यह मामला यहीं नहीं रुकने वाला। पंजाब सरकार और केंद्र के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और रूप ले सकता है। राज्य सरकार के पास अब यह विकल्प है कि वह इस मामले को कानूनी चुनौती दे या फिर राजनीतिक स्तर पर इसे उठाती रहे।
देखा जाए तो यह केवल एक नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह केंद्र-राज्य संबंधों की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। पंजाब सरकार का यह आरोप कि उसकी आवाज दबाई जा रही है, संघीय व्यवस्था में राज्यों की भूमिका पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
मुख्य बातें (Key Points)
- जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के 37वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली
- पंजाब सरकार ने रविवार को आपातकालीन कैबिनेट बैठक में इस नियुक्ति का विरोध किया था
- मुख्यमंत्री भगवंत मान शपथ ग्रहण समारोह से गायब रहे
- सत्ताधारी आम आदमी पार्टी का कोई प्रतिनिधि समारोह में शामिल नहीं हुआ
- पंजाब सरकार ने केंद्र पर राज्य की आवाज दबाने का आरोप लगाया
- यह मामला केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव का नया उदाहरण बन गया है










