ED Harassment Punjab Government – आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बुधवार को Enforcement Directorate (ED) पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी पुख्ता सबूत पेश करने के बजाय बार-बार पत्र, मीडिया लीक और अस्पष्ट आरोपों के जरिए AAP लीडरशिप को बदनाम कर रही है। देखा जाए तो, उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा का असल मकसद अराजकता पैदा करना, राजनीतिक नेतृत्व को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई पंजाब सरकार ठीक से काम न कर सके।
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पंजाब पुलिस ने मांगे पूरे दस्तावेज, लेकिन ED साफ सबूत नहीं दे रही
अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को ही ED को पत्र लिखकर आरोपों के समर्थन में पूरे दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मांगे थे। पुलिस ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि अब तक दी गई सामग्री अस्पष्ट है और रेड के दौरान जब्त किए गए पूरे सबूत, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा दिया जाए ताकि सही जांच की जा सके।
समझने वाली बात यह है कि ED को 1 सितंबर को जरूरी सामग्री के साथ एक अधिकारी भेजने के लिए कहा गया था, लेकिन ऐसा कोई अधिकारी पेश नहीं हुआ। यह साफ दिखाता है कि ED के पास पुख्ता सबूत नहीं हैं, सिर्फ आरोप और मीडिया लीक हैं।
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PM मोदी सही थे: ED-CBI अब भाजपा के तोते
सेंट्रल एजेंसियों के कामकाज पर तंज कसते हुए, अमन अरोड़ा ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान को याद किया जिसमें उन्होंने CBI को केंद्र सरकार का “तोता” कहा था।
अमन अरोड़ा ने कहा, “आज मैं नरेंद्र मोदी की उस बात से 100% सहमत हूं। चाहे ED हो, CBI हो या दूसरी सेंट्रल एजेंसियां, ये सभी भाजपा सरकार के तोतों की तरह काम कर रही हैं।”
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह पहली बार नहीं है जब AAP नेताओं ने ऐसा आरोप लगाया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य AAP नेता भी लगातार यह कहते रहे हैं कि ED-CBI का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
AAP सरकार के समय एक भी CLU मंजूर नहीं, पिछली सरकारों ने दिए 6 CLU
मामले के तथ्य बताते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि Alts Project से जुड़े Change of Land Use (CLU) के लिए छह बार मंजूरी दी गई, लेकिन AAP सरकार के समय में एक भी CLU नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा, “17 नवंबर 2000, 14 मई 2012, 25 जून 2013, 17 फरवरी 2018, 7 मार्च 2018 और 7 मार्च 2022 की मंजूरी पिछली कांग्रेस या अकाली-भाजपा सरकारों के समय दी गई थी।”
| तारीख | सरकार |
|---|---|
| 17 नवंबर 2000 | कांग्रेस |
| 14 मई 2012 | अकाली-भाजपा |
| 25 जून 2013 | अकाली-भाजपा |
| 17 फरवरी 2018 | कांग्रेस |
| 7 मार्च 2018 | कांग्रेस |
| 7 मार्च 2022 | कांग्रेस (आखिरी दिन) |
अगर गौर करें तो सभी CLU पिछली सरकारों के समय मंजूर हुए। फिर ED सिर्फ AAP सरकार को क्यों निशाना बना रही है?
लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच कई बार बदले गए
कैबिनेट मंत्री ने आगे कहा कि लेआउट प्लान 2011 से 2025 के बीच में कई बार बदले गए, जिनमें से ज्यादातर पिछली सरकारों के समय में किए गए।
अमन अरोड़ा ने कहा, “अगर ED को लगता है कि ये मंजूरी और बदलाव गैर-कानूनी थे, तो उसे पूरे घटनाक्रम की जांच करनी चाहिए, न कि सिर्फ AAP सरकार को टारगेट करना चाहिए।”
25% जमीन ओनरशिप पॉलिसी: 2012 में अकाली-भाजपा ने शुरू की थी
अमन अरोड़ा ने डेवलपर्स के लिए 25% Land Ownership Policy पर ED के फोकस पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी 2012 में अकाली-भाजपा सरकार के समय शुरू हुई थी और 2025 में AAP सरकार ने इसमें सुधार किया।
उन्होंने दावा किया, “AAP सरकार ने पॉलिसी में बदलाव किया है और डेवलपर्स के लिए लाइसेंस और CLU लेने के लिए 100% जमीन का मालिकाना हक होना जरूरी कर दिया है, जिससे पहले की गलत पॉलिसी ठीक हो गई है।”
यह एक महत्वपूर्ण सुधार है जो पहले की सरकारों की खामियों को दूर करता है।
FIR ही रद्द हो गई, तो ECIR का क्या आधार?
अमन अरोड़ा ने मामले से जुड़ी FIR पर ED के भरोसे पर भी सवाल उठाया और कहा कि संबंधित FIR को हाई कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है।
उन्होंने पूछा, “अगर FIR ही रद्द कर दी गई है, तो ECIR (Enforcement Case Information Report) का क्या आधार है?”
यह कानूनी रूप से एक बड़ा सवाल है। अगर आधार ही गलत है तो पूरी जांच कैसे सही हो सकती है?
निष्पक्ष जांच हो तो सुखबीर, कैप्टन, बाजवा सबको बुलाओ
पूरी और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि ED को मौजूदा सरकार को चुनकर निशाना बनाने के बजाय उस पूरे समय की जांच करनी चाहिए, जब ये मंजूरियां और पॉलिसी से जुड़े फैसले लिए गए थे।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और मंत्रियों सुखबीर सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह सरकारिया का नाम लेते हुए उन्होंने कहा:
“अगर आपकी जांच सच्ची है, तो सबकी जांच करें। 2012 के बाद जो भी जिम्मेदार रहे हैं, उन्हें बुलाएं, तभी सच्चाई सामने आएगी।”
दिलचस्प बात यह है कि अमन अरोड़ा ने साफ चुनौती दी है कि अगर ED वाकई निष्पक्ष है तो पिछले 14 सालों में इस विभाग में मंत्री रहे हर व्यक्ति से पूछताछ की जाए।
गौरव धीर मेरा दोस्त था, है और रहेगा
गौरव धीर का नाम अपने साथ जोड़कर पॉलिटिकल नैरेटिव बनाने की कोशिशों को खारिज करते हुए, अमन अरोड़ा ने कहा कि उनकी दोस्ती का किसी भी कथित गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा, “गौरव कल भी मेरा दोस्त था, आज भी मेरा दोस्त है और कल भी मेरा दोस्त रहेगा। अगर ED के पास अमन अरोड़ा के खिलाफ कोई सबूत है, तो मुझ तक पहुंचने के लिए किसी और का नाम इस्तेमाल करने के बजाय, उन्हें सीधे अमन अरोड़ा से बात करनी चाहिए।”
यह बयान साफ करता है कि अमन अरोड़ा किसी भी जांच से डर नहीं रहे, लेकिन वे चाहते हैं कि जांच सही और निष्पक्ष हो, न कि सिलेक्टिव टारगेटिंग।
मीडिया से अपील: खबर छापने से पहले वेरिफाई करें
अमन अरोड़ा ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया से भी अपील की कि वे खबर छापने से पहले ED के लगाए गए आरोपों को खुद से वेरिफाई करें और संबंधित AAP नेताओं का पक्ष लें।
उन्होंने कहा कि बेबुनियाद आरोपों को बार-बार छापने से इमेज खराब हो रही है और इससे प्रभावित लोग बदनामी के लिए कानूनी कार्रवाई करने पर मजबूर हो सकते हैं।
अमन अरोड़ा ने कहा, “यह जांच से भागने का मामला नहीं है। हम फैक्ट्स और सबूतों के आधार पर बिना किसी भेदभाव के जांच का स्वागत करते हैं। लेकिन सिलेक्टिव टारगेटिंग, मीडिया लीक और कैरेक्टर एसेसिनेशन की कोशिशें सबूत का विकल्प नहीं हो सकतीं।”
भाजपा की रणनीति: डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना
उन्होंने कहा कि भाजपा की बड़ी रणनीति भ्रम पैदा करना, राजनीतिक लीडरशिप को डराना और सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाना है ताकि चुनी हुई सरकार ठीक से काम न कर सके।
“पंजाब के लोग समझते हैं कि क्या हो रहा है। भाजपा के पास गवर्नेंस और डेवलपमेंट पर कोई जवाब नहीं है, इसलिए वह डर और अफरा-तफरी का माहौल बनाना चाहती है।”
अमन अरोड़ा की आखिरी चुनौती: सबूत हैं तो पेश करो
अमन अरोड़ा ने दोहराया कि अगर ED के पास पक्के सबूत हैं, तो उसे मांग के मुताबिक पंजाब पुलिस को सौंप देना चाहिए और कानून को अपना काम करने देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “अगर सबूत हैं, तो पेश करें। जांच ठीक से होने दें। लेकिन सिलेक्टिव नोटिस और अखबारों की हेडलाइन की यह पॉलिटिक्स नहीं चलेगी।”
मुख्य बातें (Key Points)
- अमन अरोड़ा ने ED पर लगाया आरोप—पुख्ता सबूत के बजाय सिर्फ मीडिया लीक और पत्र
- पंजाब पुलिस ने 28 अगस्त को दस्तावेज मांगे, लेकिन ED ने नहीं दिए
- AAP सरकार के समय एक भी CLU मंजूर नहीं, पिछली सरकारों ने दिए 6 CLU
- अमन अरोड़ा ने कहा—ED-CBI अब भाजपा के तोते, PM मोदी सही थे
- निष्पक्ष जांच हो तो सुखबीर, कैप्टन, बाजवा सबको बुलाओ












