Sugar Price Hike India 2026 -देश में अगस्त के महीने में चीनी की कीमतों में 20% तक का जोरदार उछाल आया है। जहां उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में कीमतें 50 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं, वहीं 2024-25 में देश की खपत उत्पादन से ज्यादा दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस देश में खेतों में गन्ने की बंपर पैदावार होती है, जहां चीनी मिलें दिन-रात चलती हैं, वहां आम जनता को अचानक चीनी के लिए प्रति किलो 10 से 12 रुपये ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं।
देखा जाए तो चीनी उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर है, लेकिन फिर भी कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके पीछे कई कारण हैं।
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वैश्विक चीनी उत्पादन में भारत की स्थिति
दुनिया में सबसे ज्यादा चीनी का उत्पादन ब्राजील करता है, जिसकी ग्लोबल हिस्सेदारी 23.5% है। इसके ठीक बाद दूसरे नंबर पर हमारा देश भारत आता है, जो दुनिया की 16.1% चीनी तैयार करता है।
| देश | वैश्विक उत्पादन हिस्सेदारी | रैंक |
|---|---|---|
| ब्राजील | 23.5% | 1 |
| भारत | 16.1% | 2 |
| यूरोपियन यूनियन | 8.3% | 3 |
| चीन | 6.8% | 4 |
| थाईलैंड | 6.1% | 5 |
| अमेरिका | 4.5% | 6 |
| पाकिस्तान | 3.8% | 7-8 |
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान केवल 3.8% उत्पादन के साथ सातवें-आठवें नंबर पर संघर्ष करता है और भारत के मुकाबले काफी पीछे है।
जमीनी हकीकत: कीमतें आसमान पर
अगर आप बाजार में चीनी खरीदने जा रहे हैं तो:
- उत्तर प्रदेश में इसके दाम करीब 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं
- महाराष्ट्र में भाव ₹51.43 प्रति किलो
- कर्नाटक में लगभग ₹50 प्रति किलो
हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले साल ऐसे समय यानी अगस्त 2024 में यही चीनी लगभग 40 से 41 रुपये प्रति किलो मिल रही थी। यानी सीधे-सीधे 20% की बढ़ोतरी हुई है।
समझने वाली बात यह है कि हालांकि चीनी उद्योग और मिल मालिकों का दावा है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और ना ही कोई किल्लत होने वाली है, लेकिन सरकारी और इंडस्ट्री के आंकड़ों पर नजर डालें तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आता है।
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उत्पादन बनाम खपत का गणित
साल 2018-19 से लेकर 2023-24 तक भारत में हमेशा खपत से ज्यादा उत्पादन हुआ, जिसकी वजह से हमारे पास भरपूर स्टॉक रहता था। मगर 2024-25 के शुगर सीजन में यह समीकरण पूरी तरह पलट गया।
इस दौरान:
- चीनी का कुल उत्पादन: घटकर 261 लाख मीट्रिक टन
- घरेलू खपत: बढ़कर 281 लाख मीट्रिक टन
- कमी: 20 लाख मीट्रिक टन
अगर गौर करें तो उत्पादन के मुकाबले खपत 20 लाख मीट्रिक टन ज्यादा रही, जो कीमतों में उछाल का पहला बड़ा कारण है।
एथेनॉल उत्पादन ने बढ़ाई समस्या
इसके साथ ही एक और बड़ा बदलाव सामने आया – हमारी ऊर्जा नीति में। सरकार के निर्देश पर चीनी मिलों ने गन्ने से एथेनॉल बनाने की रफ्तार तेज कर दी है।
एथेनॉल में डायवर्ट की गई चीनी:
- 2024-25 सीजन: करीब 35 लाख मीट्रिक टन
- 2023-24: 24 लाख मीट्रिक टन
- 2022-23: 43 लाख मीट्रिक टन
यानी एक तरफ कम उत्पादन, दूसरी तरफ बढ़ती घरेलू मांग और तीसरी तरफ एथेनॉल में गन्ने का बड़ा इस्तेमाल। इन तीनों कारणों ने मिलकर बाजार में कीमतों को ऊपर धकेल दिया है।
देखा जाए तो पेट्रोल में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की सरकारी नीति का सीधा असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ रहा है।
आम आदमी पर बोझ
रसोई के जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों का बजट पूरी तरह हिला कर रख दिया है। आटा, तेल के बाद अब चीनी भी महंगी हो गई है। मध्यम और कम आमदन वाले परिवारों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- अगस्त 2025 में चीनी की कीमतों में 20% उछाल
- भारत वैश्विक उत्पादन में दूसरे स्थान पर (16.1%)
- पाकिस्तान 7वें-8वें स्थान पर (3.8%)
- 2024-25 में उत्पादन से 20 लाख टन ज्यादा खपत
- 35 लाख टन चीनी एथेनॉल में डायवर्ट
- UP में चीनी 65-70 रुपये प्रति किलो
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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