Heavy Rainfall Warning India: देश के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा हुआ रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने 21 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश और कई अन्य राज्यों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।
पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 21 और 22 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा होने की संभावना है। वहीं, प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह के दौरान बारिश की गतिविधियां काफी कम रहेंगी। देखा जाए तो यह मौसम पैटर्न कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
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पिछले 24 घंटों में कहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
IMD के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त 2026 को सुबह 8:30 बजे तक के पिछले 24 घंटों में देश के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। पश्चिम उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, मिजोरम और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 12 से 20 सेंटीमीटर तक की अत्यधिक भारी बारिश हुई।
दिलचस्प बात यह है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, पश्चिम मध्य प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, असम और तमिलनाडु में भी 7 से 11 सेंटीमीटर तक की भारी बारिश रिकॉर्ड की गई।
सबसे अधिक बारिश वाले स्थान (7 सेमी से अधिक):
| राज्य/क्षेत्र | स्थान | बारिश (सेमी) |
|---|---|---|
| उप-हिमालय पश्चिम बंगाल | तूर्सा टी.जी. | 18 |
| पूर्वी मध्य प्रदेश | नगोद (सतना) | 16 |
| मिजोरम | कोलासिब (AWS) | 15 |
| पश्चिम उत्तर प्रदेश | मदावरा (ललितपुर) | 12 |
| असम | अमरघाट | 11 |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | बडूसा (बांदा) | 11 |
मौसम प्रणाली और कम दबाव का क्षेत्र
मानसून ट्रफ का पश्चिमी छोर समुद्र तल पर अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर में है जबकि पूर्वी छोर अपनी सामान्य स्थिति के पास है। अगर गौर करें तो पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्र के ऊपर कल का सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है। यह 21 अगस्त 2026 की सुबह 8:30 बजे तक उसी क्षेत्र में स्थित था।
इसके अलावा:
- मध्य म्यांमार और आसपास के क्षेत्र के ऊपर निचले क्षोभमंडलीय स्तर में एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण
- उत्तरी हरियाणा के ऊपर निचले क्षोभमंडलीय स्तर में एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण
- दक्षिण गंगीय पश्चिम बंगाल और झारखंड के ऊपर चक्रवाती परिसंचरण
- दक्षिणपश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर निचले क्षोभमंडलीय स्तरों में एक ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण
राज्यवार मौसम पूर्वानुमान: उत्तर भारत
उत्तर भारत के लिए विशेष चेतावनी:
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: 21-23 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा की संभावना। 22 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश।
हिमाचल प्रदेश: 21-22 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा। भारी बारिश 21-22 अगस्त को संभव।
उत्तराखंड: 21-27 अगस्त तक लगातार व्यापक बारिश। पूरे सप्ताह अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा और बिजली गिरने की आशंका।
हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: 22 अगस्त को व्यापक बारिश। 21-22 अगस्त को भारी वर्षा संभव।
पूर्वी उत्तर प्रदेश: 22-24 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा। 21-22 अगस्त को भारी बारिश।
पंजाब: 21-22 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की चेतावनी।
समझने वाली बात यह है कि उत्तर भारत में मौसम की स्थिति अगले एक सप्ताह तक सक्रिय रहने वाली है।
मध्य भारत में भारी बारिश का रेड अलर्ट
पूर्वी मध्य प्रदेश: यहां ध्यान देने वाली बात है कि 21-26 अगस्त तक व्यापक वर्षा जारी रहेगी। विशेष चेतावनी – 21 और 22 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा (12-20 सेमी से अधिक) की संभावना। 23-26 अगस्त के दौरान भारी वर्षा जारी रह सकती है।
पश्चिम मध्य प्रदेश: 21-25 अगस्त तक व्यापक वर्षा। 21-25 अगस्त के दौरान अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा।
छत्तीसगढ़: पूरे सप्ताह (21-27 अगस्त) व्यापक वर्षा और अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश।
विदर्भ: 23-25 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा संभावित।
देखा जाए तो मध्य भारत इस समय मानसून की सबसे सक्रिय स्थिति से गुजर रहा है।
पूर्वी भारत का मौसम हाल
ओडिशा: यहां तो मौसम का खेल बड़ा दिलचस्प होने वाला है। 22-27 अगस्त तक व्यापक वर्षा और 22-23 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा। लेकिन 24-27 अगस्त के दौरान अत्यधिक भारी वर्षा की भी चेतावनी जारी की गई है।
पश्चिम बंगाल (गंगीय और उप-हिमालयी): 21-27 अगस्त तक व्यापक वर्षा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 21-26 अगस्त को भारी बारिश। 21 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल में मध्यम से गंभीर बिजली गिरने की गतिविधि।
झारखंड: 22-27 अगस्त के दौरान व्यापक वर्षा। 23 अगस्त को भारी बारिश।
बिहार: 22-24 अगस्त व्यापक वर्षा। 22-25 अगस्त भारी वर्षा संभव।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: 21-27 अगस्त तक व्यापक वर्षा जारी रहेगी।
पूर्वोत्तर भारत में मानसून की सक्रियता
अरुणाचल प्रदेश: 21 अगस्त और 26-27 अगस्त को व्यापक वर्षा। 21 अगस्त और 23-27 अगस्त को भारी बारिश।
असम और मेघालय: 21-23 अगस्त और 25-27 अगस्त व्यापक वर्षा। पूरे सप्ताह (21-27 अगस्त) भारी बारिश की आशंका।
नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: 21-23 अगस्त और 25-27 अगस्त व्यापक बारिश। 21-24 अगस्त को भारी वर्षा।
पश्चिम और दक्षिण भारत का मौसम
पश्चिम भारत:
कोंकण और गोवा: 21-27 अगस्त तक लगातार व्यापक वर्षा।
मध्य महाराष्ट्र: 26 अगस्त को व्यापक वर्षा।
गुजरात, मराठवाड़ा, सौराष्ट्र: 21-27 अगस्त तक छिटपुट बारिश।
दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत:
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अगले एक सप्ताह के दौरान दक्षिण भारत में बारिश की गतिविधियां काफी कम रहेंगी। हालांकि:
केरल और माहे, तटीय कर्नाटक, लक्षद्वीप: 21-27 अगस्त व्यापक वर्षा जारी रहेगी।
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल: 24-25 अगस्त को भारी बारिश संभव।
तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक: 21-25 अगस्त के दौरान तेज हवाओं (40-50 किमी प्रति घंटा से 60 किमी प्रति घंटा तक) के साथ बिजली गिरने की चेतावनी।
दिल्ली-NCR के लिए 4 दिनों का पूर्वानुमान
21 अगस्त 2026: आम तौर पर बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम तक कई स्थानों पर बहुत हल्की से हल्की बारिश। रात में फिर से बारिश। हवा की गति 20-30 किमी प्रति घंटा, कभी-कभी 40 किमी प्रति घंटा तक। अधिकतम तापमान 34-36°C।
22 अगस्त 2026: सुबह से दोपहर तक कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश। अधिकतम तापमान 32-34°C, न्यूनतम 24-26°C।
23 अगस्त 2026: सुबह से दोपहर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश। तापमान 32-34°C रहने का अनुमान।
24 अगस्त 2026: सुबह कुछ जगहों पर हल्की बारिश। अधिकतम तापमान 33-35°C।
मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी
अरब सागर: सोमालिया और ओमान तट के साथ, पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश भागों और दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 26 अगस्त तक। केरल, लक्षद्वीप क्षेत्र और कोमोरिन क्षेत्र के साथ 23 से 26 अगस्त के दौरान।
बंगाल की खाड़ी: मन्नार की खाड़ी, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर में 26 अगस्त तक। उत्तरी आंध्र प्रदेश तटों के साथ और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में 22 से 26 अगस्त के दौरान।
मछुआरों को सलाह दी जाती है कि वे इन क्षेत्रों में समुद्र में नहीं जाएं।
संभावित प्रभाव और सुरक्षा उपाय
संभावित प्रभाव:
- पेड़ों की शाखाएं टूटना, केले, पपीते जैसे छोटे पेड़ उखड़ना
- तेज हवा और बारिश से बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान
- कच्चे मकानों, दीवारों, झोपड़ियों और सड़कों को आंशिक क्षति
- स्थानीय स्तर पर भूस्खलन, कीचड़ का फिसलना, जलभराव और बाढ़
- सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है
- छोटे जहाज, ट्रॉलर और नावें प्रभावित हो सकती हैं
- हेलीकॉप्टर सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं
सुझाए गए सुरक्षा उपाय:
- मौसम पर नजर रखें और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहें
- सुरक्षित आश्रय लें; पेड़ों के नीचे शरण न लें क्योंकि बिजली गिर सकती है
- बिजली गिरने की आशंका होने पर बिजली/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तुरंत अनप्लग करें
- पानी के स्रोतों से बाहर निकलें और बिजली संचालित करने वाली सभी वस्तुओं से दूर रहें
- पर्यटन और मनोरंजक गतिविधियों को नियंत्रित किया जाए
- तटवर्ती और अपतटीय गतिविधियों को विवेकपूर्ण तरीके से नियंत्रित किया जाए
किसानों के लिए कृषि सलाह
पूर्वी मध्य प्रदेश: सोयाबीन, मक्का, धान और सब्जी के खेतों से अतिरिक्त पानी की उचित निकासी सुनिश्चित करें। जलभराव वाले खेतों में खेत संचालन, उर्वरक अनुप्रयोग और पादप संरक्षण उपायों को स्थगित करें।
पश्चिम मध्य प्रदेश: सोयाबीन, मक्का, कपास, गन्ना और सब्जी के खेतों में उचित जल निकासी बनाए रखें। सब्जियों और लंबी फसलों को सहारा प्रदान करें।
उत्तराखंड: धान, सोयाबीन, मक्का, अरहर, अदरक, लहसुन, टमाटर और अन्य खड़ी फसलों के खेतों में उचित और प्रभावी जल निकासी बनाए रखें।
ओडिशा: खरीफ धान, मक्का, दलहन, कपास, अरहर, केला, सब्जी के खेतों और नर्सरी बेड से अतिरिक्त पानी निकालने के लिए आवश्यक व्यवस्था करें।
पशुधन/मुर्गीपालन/मत्स्य पालन:
- भारी बारिश के दौरान जानवरों को शेड के अंदर रखें और उन्हें संतुलित आहार प्रदान करें
- चारा और चारे को सुरक्षित स्थान पर संग्रहीत करें
- तालाबों के चारों ओर उचित जाली के साथ एक आउटलेट बनाएं
फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) की चेतावनी
22 अगस्त 2026 सुबह 11:30 बजे तक 24 घंटों के लिए फ्लैश फ्लड जोखिम का आउटलुक:
असम और मेघालय में निम्न से मध्यम फ्लैश फ्लड जोखिम:
असम: दर्रांग, हैलाकांडी, कार्बी एंगलोंग, एन.सी हिल्स, नागांव, करीमगंज
मेघालय: पूर्वी खासी हिल्स, पश्चिम खासी हिल्स और जयंतिया हिल्स जिले
नागालैंड, मिजोरम, मणिपुर, त्रिपुरा (NMMT):
मणिपुर: चंदेल, चुराचांदपुर, सेनापति, तमेंगलोंग, उखरूल
मिजोरम: आइजोल
नागालैंड: दीमापुर, किफिरे, कोहिमा, लोंगलेंग, मोकोकचुंग, मोन, पेरेन, फेक, तुएनसांग, वोखा और जुन्हेबोटो जिले
चिंता का क्षेत्र (AoC) में कुछ पूरी तरह से संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतही अपवाह/जलभराव हो सकता है।
मौसम विशेषज्ञों का विश्लेषण
इस मौसम पैटर्न को देखते हुए यह साफ होता है कि मानसून इस समय मध्य और पूर्वी भारत में काफी सक्रिय है। पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र ने मानसूनी बारिश को तेज कर दिया है। अगले कुछ दिनों में यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर होगा, लेकिन तब तक कई राज्यों में भारी बारिश जारी रहेगी।
दूसरी ओर, प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कम होने से किसानों को राहत मिलेगी, लेकिन पानी की उपलब्धता पर नजर रखनी होगी। यह दर्शाता है कि मानसून अपने विदाई के चरण में प्रवेश कर रहा है।
समझने वाली बात यह है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में मौसम के पैटर्न अधिक अनियमित हो गए हैं। इसलिए IMD की चेतावनियों को गंभीरता से लेना और तैयारी करना बेहद जरूरी हो गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पूर्वी मध्य प्रदेश में 21-22 अगस्त को अत्यधिक भारी वर्षा (12-20 सेमी) की चेतावनी
- ओडिशा में 24-27 अगस्त के दौरान अत्यधिक भारी बारिश संभव
- पिछले 24 घंटों में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के तूर्सा में 18 सेमी बारिश रिकॉर्ड
- 21 अगस्त को गंगीय पश्चिम बंगाल में मध्यम से गंभीर बिजली गिरने की गतिविधि
- मछुआरों को अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र में न जाने की सलाह
- प्रायद्वीपीय भारत में अगले सप्ताह बारिश की गतिविधियां कम रहेंगी
- किसानों को फसलों से अतिरिक्त पानी निकालने और खेत की नालियों को साफ रखने की सलाह











