Domino’s Pizza Packing Charge Case: जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़ ने पिज्जा बनाने वाली जानी-मानी कंपनी Domino’s Pizza के खिलाफ एक अहम फैसला सुनाते हुए, होम डिलीवरी पर अनुचित तरीके से 20 रुपए पैकिंग चार्ज लेने के आरोप में 20,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह जुर्माना राशि PGIMER (Post Graduate Institute of Medical Education and Research), Chandigarh के ‘पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड’ में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
देखा जाए तो यह फैसला उन लाखों ग्राहकों के लिए बड़ी राहत की बात है जो ऑनलाइन फूड ऑर्डर करते समय अनजाने में छिपे हुए शुल्क चुका देते हैं। “फ्री डिलीवरी” के नाम पर पैकिंग चार्ज वसूलना अनुचित व्यापार प्रथा (Unfair Trade Practice) है।
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20 रुपए के पैकिंग चार्ज पर बड़ा विवाद
यह मामला चंडीगढ़ के एडवोकेट मनन सोनी द्वारा दायर शिकायत पर आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, 8 जनवरी 2025 को उन्होंने Domino’s ऐप के जरिए घर के लिए पिज्जा ऑर्डर किया था। कुल बिल 185.90 रुपए बना, जिसमें 20 रुपए का एक अस्पष्ट “पैकिंग चार्ज” भी शामिल था।
एडवोकेट सोनी ने दलील दी कि कंपनियां गैर-कानूनी तौर पर ऐसे वाधू पैकिंग खर्चे नहीं वसूल सकतीं। खासकर जब “फ्री डिलीवरी” का ऑफर चल रहा हो, तो होम डिलीवरी ऑर्डर पर ऐसा करना पूरी तरह मनमानी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।
समझने वाली बात यह है कि पैकिंग तो हर ऑर्डर में होती ही है – चाहे आप डाइन-इन करें, टेकअवे लें या होम डिलीवरी। फिर केवल होम डिलीवरी पर यह चार्ज क्यों?
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Domino’s का जवाब: ग्राहक को सब दिखाया गया था
दूसरी ओर, Domino’s Pizza ने अपने लिखित जवाब में दावा किया कि ऑर्डर कन्फर्म करने से पहले ग्राहक को एप्लीकेशन पर पूरा टैक्स इनवॉइस दिखाया गया था और उसने अपनी मर्जी से इसका भुगतान किया।
कंपनी ने यह भी कहा कि खाने-पीने की चीजों की सुरक्षित डिलीवरी और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए होम डिलीवरी के लिए पैकिंग जरूरी होती है। इसलिए पैकिंग चार्ज वसूलना उचित है।
लेकिन उपभोक्ता आयोग ने यह तर्क नहीं माना।
उपभोक्ता आयोग का कड़ा फैसला: कोई सबूत नहीं पेश किया
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने पाया कि Domino’s ऐसा कोई भी सबूत पेश करने में असफल रही जो यह साबित कर सके कि होम डिलीवरी के लिए किसी खास या अलग किस्म की पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल किया गया था।
आयोग ने कहा, “अगर होम डिलीवरी के लिए विशेष पैकिंग की जरूरत होती, तो कंपनी को इसके सबूत देने चाहिए थे। लेकिन कोई सबूत पेश नहीं किया गया।”
यह ध्यान देने वाली बात है कि आयोग ने इसे उपभोक्ताओं के साथ अन्याय करार दिया। फैसले में कहा गया कि “फ्री डिलीवरी” का दावा करते हुए छिपे हुए चार्ज वसूलना धोखाधड़ी है।
20,000 रुपए जुर्माना + 20 रुपए वापसी + 2,000 रुपए मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने निम्नलिखित आदेश दिए:
1. PGIMER फंड में 20,000 रुपए जमा करें
कंपनी को 20,000 रुपए का जुर्माना PGIMER के ‘पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड’ (गरीब मरीज भलाई कोष) में जमा कराना होगा।
2. 20 रुपए + 9% वार्षिक ब्याज वापस करें
शिकायतकर्ता को वसूले गए 20 रुपए पैकिंग चार्ज 8 जनवरी 2025 से 9 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित वापस करने होंगे।
3. 2,000 रुपए मानसिक परेशानी और खर्च के लिए
मानसिक परेशानी, खज्जल-खुआरी (Harassment) और मुकदमेबाजी के खर्चे के रूप में शिकायतकर्ता को 2,000 रुपए का अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
4. 45 दिनों के अंदर पालना अनिवार्य
आयोग ने 45 दिनों के अंदर-अंदर इन आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा न करने की सूरत में बकाया राशि पर 12 प्रतिशत सालाना ब्याज वसूला जाएगा।
फ्री डिलीवरी के नाम पर धोखा: ग्राहकों के साथ खिलवाड़
यह मामला एक बड़े सवाल की ओर इशारा करता है: क्या “फ्री डिलीवरी” सच में फ्री होती है?
आजकल लगभग सभी फूड डिलीवरी ऐप्स और रेस्तरां “फ्री डिलीवरी” का दावा करते हैं। लेकिन बिल देखने पर पता चलता है कि:
- पैकिंग चार्ज अलग से
- प्लेटफॉर्म फीस अलग से
- सर्विस चार्ज अलग से
- टैक्स अलग से
अगर गौर करें, तो “फ्री डिलीवरी” के नाम पर असल में कुल लागत उतनी ही या कभी-कभी ज्यादा हो जाती है।
क्या कहता है कानून? पैकिंग चार्ज वसूलना गैर-कानूनी
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत, कंपनियां केवल वही चार्ज वसूल सकती हैं जो उत्पाद या सेवा की कीमत में शामिल हैं। अगर कोई अतिरिक्त शुल्क लेना है, तो:
- इसकी स्पष्ट जानकारी पहले से देनी होगी
- यह उचित और न्यायसंगत होना चाहिए
- ग्राहक की सहमति जरूरी है
इस मामले में, आयोग ने पाया कि पैकिंग चार्ज न तो उचित था और न ही इसके लिए कोई तर्कसंगत आधार था।
यह पहला मामला नहीं: फूड डिलीवरी ऐप्स पर बढ़ते मामले
Domino’s के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ सालों में देश भर के उपभोक्ता फोरम में Zomato, Swiggy, McDonald’s, KFC जैसी कंपनियों के खिलाफ भी कई शिकायतें दर्ज हुई हैं:
- छिपे हुए शुल्क वसूलना
- MRP से ज्यादा कीमत लेना
- डिलीवरी में देरी
- खराब खाना भेजना
- रिफंड न करना
इन मामलों में उपभोक्ता आयोग अक्सर ग्राहकों के पक्ष में फैसले देते हैं।
ग्राहकों के लिए सबक: बिल चेक करना जरूरी
यह केस ग्राहकों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है:
1. हमेशा बिल ध्यान से देखें – ऑर्डर करने से पहले हर आइटम और चार्ज चेक करें
2. अनचाहे शुल्क के खिलाफ आवाज उठाएं – अगर कोई गलत चार्ज दिखे, तुरंत शिकायत करें
3. उपभोक्ता फोरम में जाने से न डरें – 20 रुपए का भी मामला लड़ा जा सकता है
4. सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें – कंपनियां अपनी छवि के डर से जल्दी जवाब देती हैं
5. स्क्रीनशॉट सेव करें – सबूत के तौर पर बिल और ऑर्डर डिटेल्स सेव रखें
कंपनियों के लिए चेतावनी: ग्राहक अब जागरूक हैं
यह फैसला सभी फूड कंपनियों और डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के लिए चेतावनी है। अब ग्राहक पहले से ज्यादा जागरूक हैं और अपने अधिकारों को जानते हैं।
छोटे-छोटे अनुचित शुल्क वसूलकर करोड़ों कमाने का खेल अब नहीं चलेगा। उपभोक्ता आयोग ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।
PGIMER के गरीब मरीज कोष को राहत
दिलचस्प बात यह है कि जुर्माने की रकम किसी सरकारी खाते में नहीं, बल्कि PGIMER के ‘पुअर पेशेंट वेलफेयर फंड’ में जाएगी। इस फंड का इस्तेमाल गरीब मरीजों के इलाज में मदद के लिए किया जाता है।
यानी Domino’s की गलती से कम से कम किसी जरूरतमंद को फायदा तो होगा।
मुख्य बातें (Key Points)
- चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने Domino’s Pizza पर 20 रुपए पैकिंग चार्ज के लिए 20,000 रुपए जुर्माना लगाया
- जुर्माना राशि PGIMER के गरीब मरीज भलाई कोष में जमा होगी
- एडवोकेट मनन सोनी ने 8 जनवरी 2025 को होम डिलीवरी पर पैकिंग चार्ज को लेकर शिकायत की थी
- आयोग ने फ्री डिलीवरी ऑफर के दौरान पैकिंग चार्ज लेना अनुचित व्यापार प्रथा करार दिया
- कंपनी विशेष पैकिंग का कोई सबूत पेश नहीं कर पाई
- 20 रुपए + 9% ब्याज वापसी और 2,000 रुपए मुआवजा भी देना होगा
- 45 दिनों में आदेश का पालन अनिवार्य, नहीं तो 12% सालाना ब्याज













