Shambhu Border Farmers Protest: पंजाब और हरियाणा की सीमा पर स्थित शंभू बॉर्डर पर मंगलवार सुबह से तनाव का माहौल बना हुआ है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ दिल्ली में 21 जुलाई को ‘महापंचायत’ करने के लिए निकले हजारों किसानों को हरियाणा पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रोक दिया है। इस कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है और आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
‘देश बचाओ मोर्चा’ के बैनर तले देश भर से करीब 550 किसान संगठनों ने दिल्ली स्थित किसान घाट पर एक दिवसीय महारैली का ऐलान किया था। लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही किसानों का काफिला शंभू बॉर्डर पर रुक गया।
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हरियाणा पुलिस ने सीमा को किया सील
देखा जाए तो हरियाणा प्रशासन ने इस बार किसानों के दिल्ली प्रवेश को रोकने के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम कर लिए थे। पटियाला जिले के घनौर इलाके में पड़ने वाले शंभू बैरियर पर पुलिस ने मजबूत बैरिकेड्स लगा दिए। JCB और पोकलेन मशीनों की मदद से कुछ जगहों पर सड़कों को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया।
भारतीय किसान यूनियन (शहीद भगत सिंह) के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने दावा किया कि हरियाणा सरकार ने पंजाब की तरफ से आने वाले हर वाहन के लिए सीमा पूरी तरह से सील कर दी है। उन्होंने कहा, “बिना किसी पूर्व सूचना के सीमा बंद कर दी गई, जिससे आम यात्रियों को भारी मुश्किल हो रही है।”
दूसरी ओर, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के कारण ट्रैफिक को अन्य रास्तों की ओर मोड़ा जा रहा है। हालांकि, ज्यादा विवरण देने से इनकार करते हुए उन्होंने कहा कि आधिकारिक बयान के लिए उच्च अधिकारियों के जवाब का इंतजार करना होगा।
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आम लोगों की बढ़ी मुश्किलें, एयरपोर्ट जाने वाले फंसे
सड़क बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी आम यात्रियों को हो रही है। जालंधर निवासी जसकरन सिंह ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया, “मैं अपने चचेरे भाई को दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ने जा रहा था। अब हमें गांवों के लिंक रोड से होते हुए गुड़गांव की तरफ मोड़ा जा रहा है। अगर पुलिस को पहले से ही शंभू रूट बंद होने की जानकारी थी, तो ट्रैफिक को पहले ही डायवर्ट किया जा सकता था।”
उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि तड़के निकलने के बावजूद दोपहर 2 बजे तक एयरपोर्ट पहुंचना मुश्किल लग रहा है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि इस तरह की नाकेबंदी से न सिर्फ किसानों की महारैली प्रभावित हुई, बल्कि हजारों मासूम यात्री भी इसकी भेंट चढ़ गए।
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21 जुलाई को दिल्ली में थी विशाल महापंचायत
‘देश बचाओ मोर्चे’ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एक विशाल ‘महापंचायत’ का आयोजन किया गया था। आयोजकों का दावा है कि इस महापंचायत में देश भर से लगभग 550 किसान संगठन और सामाजिक संस्थाएं हिस्सा ले रही हैं।
दिल्ली में पिछले दिनों हुए प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन की तरफ से अधिक सतर्कता बरती जा रही है। 2019 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी आंदोलन के बाद यह पहली बार है जब किसी बड़े विरोध प्रदर्शन पर इतनी सख्ती देखने को मिली है।
किसान नेताओं ने दी वैकल्पिक रास्तों की अपील
हरियाणा पुलिस की रोक के बाद किसान नेताओं ने प्रदर्शनकारियों को जीरकपुर या दिल्ली-कटड़ा एक्सप्रेसवे जैसे वैकल्पिक रास्ते अपनाकर दिल्ली पहुंचने की अपील की है। BKU के प्रवक्ता तेजवीर सिंह ने आसपास के किसानों को शंभू बॉर्डर पर ही इकट्ठा होने का आह्वान दिया है।
देश बचाओ मोर्चा के नेता सरवण सिंह पंढेर और अन्य नेताओं की अगुवाई में पंजाब में विभिन्न जगहों से किसानों ने बीते दिन ही दिल्ली के लिए कूच कर दिया था। किसान रात के समय श्री फतेहगढ़ साहिब के पास रुके और आज सुबह जैसे ही दिल्ली की ओर आगे बढ़े, पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर भारी रोक लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया।
इस समय शंभू बॉर्डर पर बड़ी संख्या में किसान पहुंच चुके हैं और वहां किसानों का भारी जमावड़ा हो गया है।
पिहोवा से बस में निकले किसानों को भी हिरासत में लिया
पिहोवा से बस के जरिए रवाना हुए किसानों को कुरुक्षेत्र पुलिस ने मंगलवार सुबह हिरासत में ले लिया। दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसानों के काफिले को रास्ते में रोकते हुए पुलिस ने पूरी बस को अपने घेरे में ले लिया और सभी किसानों को कुरुक्षेत्र पुलिस लाइंस भेज दिया।
भारतीय किसान यूनियन (पिहोवा) के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने पुलिस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से बस में सवार होकर दिल्ली जा रहे थे, लेकिन कुरुक्षेत्र पुलिस ने हमें रास्ते में ही हिरासत में लेकर पुलिस लाइंस पहुंचा दिया। हरियाणा सरकार लगातार दबंगई करके किसानों को अपने हक और चिंताओं के लिए आवाज बुलंद करने से रोक रही है।”
अंबाला पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी
दिल्ली के किसान घाट में कराई जा रही ‘महापंचायत’ के लिए कूच कर रहे पंजाब के किसानों को रोकने के लिए हरियाणा-पंजाब शंभू सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। अंबाला पुलिस ने किसानों को हरियाणा में दाखिल होने से रोकने के लिए सीमा पर मजबूत बैरिकेड लगा दिए हैं।
अंबाला पुलिस ने ट्रैफिक एडवाइजरी जारी करते हुए लोगों से यात्रा पर निकलने से पहले ट्रैफिक की स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करने और संभव होने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवाजाही को सामान्य बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर भारी जाम
किसानों के दिल्ली कूच के कारण GT रोड पर आवाजाही प्रभावित होने से वाहनों का बड़ा रुख अंबाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे की ओर हो गया, जिससे हाईवे पर भारी जाम की स्थिति बन गई। सबसे ज्यादा असर लालड़ू से लेहली तक के क्षेत्र में देखने को मिला, जहां वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
हाईवे के साथ-साथ सर्विस लेन भी वाहनों से भर गईं। जाम के कारण स्थानीय निवासियों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और अन्य यात्रियों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा।
कई वाहन चालकों ने वैकल्पिक रास्ते अपनाने की कोशिश की, लेकिन वहां भी बढ़े ट्रैफिक के कारण कोई खास राहत नहीं मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह से ही वाहनों की संख्या लगातार बढ़ती रही और दोपहर तक जाम कई किलोमीटर तक फैल गया।
ट्रकों, बसों, निजी कारों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारों के कारण आवाजाही बहुत धीमी रफ्तार से चलती रही। कई जगहों पर एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों को भी गुजरने में दिक्कत आई।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को खतरा
किसान संगठनों का कहना है कि भारत और अमेरिका के कृषि क्षेत्र तथा आर्थिक हालात में जमीन-आसमान का फर्क है। अमेरिका में खेती सैकड़ों एकड़ के बड़े फार्मों में होती है और वहां के किसानों को सरकार से भारी सब्सिडी मिलती है।
इसके विपरीत, भारत में अधिकतर किसानों के पास सिर्फ दो से तीन एकड़ जमीन है और सरकारी मदद भी बहुत सीमित है। किसानों को आशंका है कि अगर इस समझौते के तहत अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में आते हैं, तो छोटे भारतीय किसान उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे।
दिल्ली की ओर बढ़ रहे किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारतीय किसानों के भविष्य को बचाने के लिए इस व्यापारिक पैकेज का डटकर विरोध करना बेहद जरूरी है। अगर गौर करें तो छोटे और मझोले किसानों की आजीविका पर इस समझौते से सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ दिल्ली में ‘महापंचायत’ करने के लिए पंजाब से रवाना हुए किसानों को रोकने के लिए राजधानी की सीमाओं पर की गई सख्त नाकेबंदी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आवाज दबाने के लिए उन्हें दिल्ली में दाखिल होने से रोक रही है। कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के चेयरमैन तथा राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सोमवार को विद्यार्थियों द्वारा किए गए जबरदस्त प्रदर्शन के बाद घबराई सरकार अब किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेड लगा रही है।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “सरकार ने किसानों को राजधानी में दाखिल होने से रोकने के लिए बैरिकेड लगा दिए हैं, ताकि देश के नौजवानों के खिलाफ कल इस्तेमाल की गई बेरहम ताकत और हिंसक रवैये के बाद सरकार को एक और शर्मिंदगी का सामना न करना पड़े।”
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ‘नौजवानों और किसानों’ के मुद्दों पर फेल हो गई है।
किसान नेताओं का रुख: टकराव नहीं, शांतिपूर्ण विरोध
देश बचाओ मोर्चा के नेता सरवण सिंह पंढेर का कहना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों और आम लोगों के खिलाफ है। इसीलिए देश भर के किसानों द्वारा इस समझौते के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली के किसान घाट पर एक दिन की महारैली करने का फैसला किया गया था।
लेकिन हरियाणा सरकार की ओर से किसानों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से भी रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसान किसी टकराव में नहीं पड़ेंगे, बल्कि शंभू बॉर्डर पर इकट्ठा होकर अगली रणनीति तैयार करेंगे।
समझने वाली बात यह है कि किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर दृढ़ हैं लेकिन हिंसा से दूर रहने की बात कर रहे हैं। यह 2020-21 के किसान आंदोलन की याद दिलाता है जब किसानों ने लंबे समय तक शांतिपूर्ण धरना दिया था।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापारिक समझौते पर बातचीत चल रही है जिसमें कृषि उत्पादों के आयात-निर्यात पर भी चर्चा हो रही है। किसान संगठनों को डर है कि इस समझौते से अमेरिकी कृषि उत्पादों का भारत में आना आसान हो जाएगा।
चूंकि अमेरिकी किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है और उनके पास विशाल फार्म हैं, इसलिए वे सस्ती कीमतों पर उत्पाद बेच सकते हैं। इससे भारतीय किसानों, खासकर छोटे और सीमांत किसानों, की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
देश बचाओ मोर्चा और विभिन्न किसान संगठन इस समझौते के खिलाफ देशव्यापी विरोध कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार ऐसा कोई भी व्यापारिक समझौता न करे जो भारतीय किसानों के हितों के खिलाफ हो।
मुख्य बातें (Key Points)
• पंजाब से दिल्ली कूच कर रहे हजारों किसानों को शंभू बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस ने रोका
• भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ 21 जुलाई को किसान घाट पर महापंचायत का आयोजन
• देश भर की करीब 550 किसान संगठनें विरोध में शामिल
• शंभू बॉर्डर और अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर भारी जाम, यात्रियों को घंटों परेशानी
• किसानों को आशंका है कि समझौते से छोटे भारतीय किसान अमेरिकी उत्पादों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे
• कांग्रेस ने सरकार पर किसानों की आवाज दबाने का आरोप लगाया
• किसान नेताओं ने शांतिपूर्ण विरोध की बात कही, टकराव से बचने का आश्वासन दिया













