UPI Charges New Rule: अगर आप भी दुकानों, फल-सब्जी के ठेलों या बड़े मॉल्स में ऑनलाइन पेमेंट के लिए UPI जैसे कि Google Pay, PhonePe, Paytm का इस्तेमाल करते हैं तो पिछले कुछ दिनों से तैर रही यूपीआई पर चार्ज लगने की खबरों से आपका परेशान होना स्वाभाविक है। लेकिन राहत की बात यह है कि देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस पूरे मामले पर स्थिति पूरी तरह से साफ कर दी है।
विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए उन्होंने साफ कहा है कि UPI ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों से एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं लिया जाएगा। यह कोई टैक्स या सेस नहीं है और आम जनता पर इसका कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
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क्या है MDR का पूरा सच
वित्त मंत्री ने संसद से लेकर मीडिया तक यह बात दोहराई है कि विपक्ष इस मुद्दे पर सिर्फ भ्रम फैलाकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस पूरे गणित को बेहद सरल शब्दों में समझाया है।
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या है? समझने वाली बात यह है कि यह सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे बैंक और पेमेंट ऐप आपस में सिस्टम को बेहतर बनाने और बेहतर सर्विस देने के लिए तय करते हैं। यह सरकार का कोई टैक्स या सेस नहीं है। इसलिए इसका पैसा सरकार के खजाने में नहीं जाता।
दिलचस्प बात यह है कि यह चार्ज ऑपरेटर्स और मर्चेंट्स के बीच का मामला है। इसका बोझ किसी भी स्थिति में आम उपभोक्ता पर पास नहीं किया जाएगा।
NPCI का नया फ्रेमवर्क
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI ने हाल ही में नया MDR फ्रेमवर्क पेश किया। इसके मुताबिक ₹2000 तक के छोटे लेनदेन पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे। इन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ₹2000 से अधिक के पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M ट्रांजैक्शन यानी कस्टमर से दुकानदार पर 0.4% का MDR लागू होगा। जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 तय की गई है।
96% लेनदेन पर कोई असर नहीं
देश में होने वाले करीब 96% P2M ट्रांजैक्शन ₹2000 से कम के होते हैं। इसलिए आम जनता और छोटे दुकानदारों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। अगर गौर करें तो यह एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य है।
आम आदमी जो रोजाना चाय, नाश्ता, सब्जी, किराने का सामान खरीदता है, उसके लिए UPI बिल्कुल फ्री रहेगा। केवल बड़े लेनदेन पर ही यह चार्ज लागू होगा।
कौन देगा यह चार्ज
हैरान करने वाली बात यह है कि बहुत से लोग यह समझ नहीं पा रहे कि आखिर यह चार्ज किसे देना होगा। वित्त मंत्री ने इसे भी साफ किया है। यह चार्ज दुकानदार और बैंक/पेमेंट ऐप के बीच का मामला है।
ग्राहक को कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। जो ₹100 का सामान है, वो ₹100 का ही रहेगा। UPI से भुगतान करने पर ग्राहक से एक पैसा भी अतिरिक्त नहीं लिया जाएगा।
विपक्ष के आरोपों पर जवाब
देखा जाए तो विपक्ष ने इस मुद्दे को बड़ा बनाने की कोशिश की थी। कई नेताओं ने यह कहा कि सरकार आम आदमी की जेब पर हाथ डाल रही है। लेकिन वित्त मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि यह सरकार का कोई टैक्स नहीं है। यह पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एक व्यावसायिक व्यवस्था है। इसका पैसा सरकार के पास नहीं जाता।
UPI की सफलता की कहानी
भारत में UPI ने डिजिटल पेमेंट में क्रांति ला दी है। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े मॉल तक, सब जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है। महीने में अरबों ट्रांजैक्शन हो रहे हैं।
समझने वाली बात यह है कि यह सब इसलिए संभव हो पाया क्योंकि UPI बिल्कुल फ्री था। और अब भी 96% लेनदेन के लिए यह फ्री ही रहेगा।
आम आदमी के लिए क्या मायने रखता है
तो अगली बार जब आप चाय की टपरी से लेकर बड़े स्टोर तक QR कोड स्कैन करके पेमेंट करें तो बेफिक्र रहें। UPI आपके लिए बिल्कुल फ्री है और आगे भी फ्री रहेगा।
यह निर्देश केवल ₹2000 से ऊपर के बड़े लेनदेन पर लागू होगा और वह भी दुकानदार के लिए। आपको कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा।
डिजिटल इंडिया की मजबूती
दिलचस्प बात यह है कि सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना चाहती है। नकदी रहित अर्थव्यवस्था की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। UPI को मुफ्त रखकर सरकार यह संदेश दे रही है कि डिजिटल पेमेंट को हतोत्साहित नहीं किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में UPI ने भारत को दुनिया में डिजिटल पेमेंट में सबसे आगे ला दिया है। अन्य देश भी भारत के UPI मॉडल को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- ₹2000 तक के UPI लेनदेन पूरी तरह फ्री रहेंगे, कोई चार्ज नहीं
- ₹2000 से ऊपर के P2M लेनदेन पर 0.4% MDR (अधिकतम ₹300)
- यह चार्ज ग्राहक से नहीं, मर्चेंट और बैंक के बीच का मामला है
- 96% UPI ट्रांजैक्शन ₹2000 से कम के होते हैं
- यह टैक्स या सेस नहीं है, सरकार के खजाने में नहीं जाता
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया











