Heavy Rainfall Alert India: नई दिल्ली स्थित भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 20 जुलाई 2026 को एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। अगले 4-5 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय मानसून की स्थिति बनने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और असम-मेघालय में अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है।
देखा जाए तो यह मानसून का सबसे सक्रिय दौर साबित हो सकता है। पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड और मेघालय में 21 सेमी से अधिक अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई है। कई राज्यों में फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है।
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पिछले 24 घंटे में कहां कितनी बारिश
20 जुलाई 2026 की सुबह 8:30 बजे तक समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में जबरदस्त बारिश हुई है। आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
अत्यधिक भारी बारिश (21 सेमी या अधिक):
- असम-मेघालय: विलियमनगर में 37 सेमी
- उत्तराखंड: शामा में 22 सेमी
अति भारी बारिश (12-20 सेमी):
- बिहार: सीवान में 20 सेमी
- पश्चिम उत्तर प्रदेश: बहेड़ी (बरेली) में 17 सेमी
- पूर्वी उत्तर प्रदेश: मुहम्मदी (खीरी) में 16 सेमी
- नागालैंड-मिजोरम-त्रिपुरा: तुली में 15 सेमी
- सब-हिमालयन पश्चिम बंगाल-सिक्किम: चेपन में 15 सेमी
- झारखंड: हजारीबाग में 14 सेमी
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सिर्फ 24 घंटे में दर्ज की गई बारिश है। अगले कुछ दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में खतरा सबसे ज्यादा
IMD की चेतावनी के अनुसार 20 और 21 जुलाई को जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी से अति भारी वर्षा की संभावना है।
समझने वाली बात यह है कि पहाड़ी इलाकों में इतनी भारी बारिश भूस्खलन, मिट्टी के कटाव और बादल फटने जैसी आपदाओं को जन्म दे सकती है। राजौरी, पुंछ, कुलगाम, शोपियां, बडगाम, गांदरबल, श्रीनगर, अनंतनाग, किश्तवाड़, रामबन, डोडा, उधमपुर जैसे जिलों में खतरा ज्यादा है।
हिमाचल में चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
उत्तराखंड, यूपी और बिहार भी अलर्ट पर
20 जुलाई को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी है।
उत्तराखंड में देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग जिलों में फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में 20-24 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा की संभावना है। बरेली, खीरी, बहराइच जैसे जिलों में स्थिति गंभीर हो सकती है।
बिहार में 20 जुलाई को कई जगहों पर अति भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी है। 21 जुलाई को भी भारी बारिश जारी रह सकती है।
असम-मेघालय में पानी का कहर जारी
अगर गौर करें तो पूर्वोत्तर भारत, खासकर असम-मेघालय में स्थिति पहले से ही गंभीर है। विलियमनगर में 37 सेमी बारिश दर्ज की गई है, जो चिंताजनक है।
20 जुलाई को असम और मेघालय में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा की संभावना है। 21 जुलाई को भी अति भारी बारिश जारी रह सकती है। केंद्रीय असम और आसपास के नागालैंड में चक्रवाती हवाएं चल रही हैं जो स्थिति को और खराब कर सकती हैं।
मानसून की मौजूदा स्थिति
IMD के अनुसार मानसून ट्रफ (गर्त) इस समय अपनी सामान्य स्थिति के करीब है। लेकिन कई जगहों पर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है:
- पंजाब और आसपास के क्षेत्र में निचले स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण
- दक्षिण उत्तर प्रदेश के केंद्रीय भागों में चक्रवाती परिसंचरण
- उत्तर झारखंड और बिहार की सीमा पर चक्रवाती परिसंचरण
- दक्षिण-पश्चिम राजस्थान में चक्रवाती परिसंचरण
- पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और तटीय आंध्र प्रदेश में मध्य स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण
दिलचस्प बात यह है कि इन सभी प्रणालियों के एक साथ सक्रिय रहने से मानसून की गतिविधि तेज हो गई है।
दिल्ली-NCR में क्या है हाल
राजधानी दिल्ली और NCR क्षेत्र में भी मौसम सक्रिय रहने वाला है। IMD ने दिल्ली के लिए अगले चार दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया है:
20 जुलाई: आम तौर पर बादल छाए रहेंगे। दोपहर से शाम के बीच कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश, कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और 30-40 किमी प्रति घंटे की हवाएं चल सकती हैं। अधिकतम तापमान 34-36°C रहने की संभावना।
21 जुलाई: सुबह से दोपहर तक अधिकांश जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश, कुछ स्थानों पर भारी बारिश। अधिकतम तापमान 31-33°C और न्यूनतम 24-26°C रह सकता है। सामान्य से 1.6 से 3 डिग्री कम तापमान रहेगा।
22 जुलाई: सुबह से दोपहर तक कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश। दोपहर से शाम को भी बारिश हो सकती है। तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री नीचे रहेगा।
23 जुलाई: सुबह से दोपहर और फिर शाम को कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश। न्यूनतम तापमान 21-23°C तक गिर सकता है।
फ्लैश फ्लड का खतरा किन इलाकों में
IMD ने 21 जुलाई की सुबह 11:30 बजे तक कई वाटरशेड और पड़ोसी इलाकों में निम्न से मध्यम फ्लैश फ्लड की चेतावनी दी है:
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख: पुंछ, राजौरी, कुलगाम, शोपियां, बडगाम, गांदरबल, श्रीनगर, अनंतनाग, किश्तवाड़, रामबन, डोडा, उधमपुर, कठुआ, सांबा, रियासी, जम्मू और लेह जिले
हिमाचल प्रदेश: चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, ऊना, सिरमौर, शिमला, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले
उत्तराखंड: देहरादून, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत और रुद्रप्रयाग जिले
पंजाब: अमृतसर, जालंधर, गुरदासपुर, होशियारपुर, कपूरथला जैसे कई जिले
हरियाणा: यमुनानगर, सहारनपुर, कुरुक्षेत्र और करनाल जिले
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पूरी तरह संतृप्त मिट्टी और निचले इलाकों में सतही जल भराव और जलप्लावन हो सकता है।
मछुआरों के लिए चेतावनी
IMD ने मछुआरों को सख्त चेतावनी दी है कि वे निम्नलिखित क्षेत्रों में समुद्र में न जाएं:
अरब सागर: 20-25 जुलाई के दौरान सोमालिया और ओमान तट के साथ, पश्चिम-मध्य अरब सागर के अधिकांश हिस्सों में, 20 जुलाई को दक्षिण गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र तट के साथ, 21-24 जुलाई के दौरान गुजरात और उत्तर महाराष्ट्र तटों के साथ।
बंगाल की खाड़ी: 20-22 जुलाई के दौरान आंध्र प्रदेश तट के साथ और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में, 23 जुलाई को पश्चिम-मध्य खाड़ी के कुछ हिस्सों में, 20-25 जुलाई के दौरान मन्नार की खाड़ी के कुछ हिस्सों में और 20 जुलाई तथा 23-25 जुलाई के दौरान दक्षिण श्रीलंका तटों के साथ दक्षिण-पश्चिम खाड़ी में।
समुद्र की स्थिति उग्र से अति उग्र रहने की संभावना है। हवा की गति 41-62 किमी प्रति घंटा और लहरों की ऊंचाई 2.5-6 मीटर तक हो सकती है।
किसानों के लिए कृषि सलाह
भारी वर्षा के संभावित प्रभाव को देखते हुए IMD ने किसानों के लिए विस्तृत कृषि सलाह जारी की है:
असम में: गन्ना, सोयाबीन, अरहर, जूट, तिल के खेतों और फलों के बागों से अतिरिक्त बारिश का पानी निकालने के लिए निरंतर जल निकासी बनाए रखें। जहां संभव हो परिपक्व फसलों की कटाई करें।
मेघालय में: धान की नर्सरी और मक्का, लोबिया, भिंडी और अदरक के खेतों के आसपास जल निकासी चैनल साफ रखें। नर्सरी की मेड़ों को मजबूत करें।
जम्मू-कश्मीर में: खड़ी फसलों में सिंचाई रोकें, खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।
हिमाचल प्रदेश में: मक्का, रागी, कद्दूवर्गीय, टमाटर और शिमला मिर्च के खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें। जहां संभव हो परिपक्व फसलों की कटाई करें।
उत्तराखंड में: मूंगफली, सोयाबीन और मक्का की बुवाई स्थगित करें। धान, टमाटर और मिर्च के खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करें।
उत्तर प्रदेश में: धान, मक्का, तिल और अरहर के खेतों में जल निकासी सुनिश्चित करें। सिंचाई, उर्वरक और पौध संरक्षण कार्य स्थगित करें।
बिहार और झारखंड में: धान, मक्का, तिल और अरहर के खेतों में निरंतर जल निकासी बनाए रखें। सभी कृषि कार्य स्थगित करें जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए।
आम जनता पर संभावित प्रभाव
IMD ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक भारी वर्षा के कारण निम्नलिखित प्रभाव हो सकते हैं:
यातायात व्यवधान: सड़कों पर स्थानीय बाढ़, निचले इलाकों में जल भराव, अंडरपास बंद होना खासकर शहरी क्षेत्रों में।
दृश्यता में कमी: भारी बारिश के कारण कभी-कभार दृश्यता घट सकती है।
ट्रैफिक जाम: प्रमुख शहरों में सड़कों पर जल भराव के कारण यातायात बाधित हो सकता है, यात्रा समय बढ़ सकता है।
कच्ची सड़कों को नुकसान: छोटी क्षति हो सकती है।
कमजोर संरचनाओं को नुकसान: संभावित रूप से कमजोर ढांचों को नुकसान हो सकता है।
भूस्खलन/मिट्टी का कटाव: स्थानीय स्तर पर भूस्खलन, मिट्टी का फिसलना हो सकता है।
फसलों को नुकसान: कुछ क्षेत्रों में जलमग्नता के कारण बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान हो सकता है।
क्या करें और क्या न करें
IMD ने जनता को निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
करें:
- अपने गंतव्य के लिए निकलने से पहले अपने मार्ग पर यातायात की स्थिति की जांच करें
- इस संबंध में जारी किसी भी यातायात सलाह का पालन करें
- मौसम अपडेट नियमित रूप से देखें
- आपातकालीन नंबर अपने पास रखें
न करें:
- ऐसे क्षेत्रों में न जाएं जहां अक्सर जल भराव की समस्या होती है
- कमजोर संरचनाओं में न रहें
- बाढ़ वाले इलाकों में वाहन न चलाएं
- नदी-नालों के किनारे न जाएं
पश्चिम और दक्षिण भारत में स्थिति
जहां उत्तर और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश हो रही है, वहीं पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले 7 दिनों के दौरान कम वर्षा गतिविधि जारी रहने की संभावना है।
हालांकि कोंकण-गोवा में 20-26 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा की संभावना है। मध्य महाराष्ट्र में 22-23 जुलाई को अच्छी बारिश हो सकती है।
तटीय कर्नाटक में भी 20-26 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा की संभावना है। लेकिन अंदरूनी कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
मध्य भारत में मिली-जुली स्थिति
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में स्थिति मिली-जुली रहेगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 20-26 जुलाई के दौरान व्यापक वर्षा की संभावना है।
छत्तीसगढ़ के मानेंद्रगढ़ में पिछले 24 घंटे में 8 सेमी बारिश दर्ज की गई है। अगले कुछ दिनों में यहां भारी बारिश जारी रह सकती है।
अगले सप्ताह का पूर्वानुमान
समझने वाली बात यह है कि यह सक्रिय मानसून चरण अगले 4-5 दिनों तक जारी रह सकता है। 25-26 जुलाई के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
लेकिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा कई दिनों तक बना रह सकता है क्योंकि मिट्टी पहले से ही संतृप्त हो चुकी है।
नदियों में बाढ़ की स्थिति के लिए केंद्रीय जल आयोग (CWC) की वेबसाइट देखने की सलाह दी गई है।
मुख्य बातें (Key Points)
• जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश में 20-21 जुलाई को अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी, भूस्खलन का खतरा
• उत्तराखंड और मेघालय में पिछले 24 घंटे में 21 सेमी से अधिक बारिश दर्ज, विलियमनगर में 37 सेमी रिकॉर्ड
• दिल्ली-NCR में अगले 4 दिन बारिश जारी रहेगी, 21-23 जुलाई को तापमान सामान्य से 3-5 डिग्री नीचे रहेगा
• मछुआरों को चेतावनी: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्र में न जाने की सलाह, उग्र समुद्री स्थिति













