Harjeet Singh Grewal NCM Chairman – केंद्र सरकार ने हरजीत सिंह ग्रेवाल को तीन साल की अवधि के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (National Commission for Minorities – NCM) का अध्यक्ष नियुक्त किया है। देखा जाए तो ग्रेवाल इकबाल सिंह लालपुरा की जगह लेंगे, जो पहले इस संवैधानिक संस्था के अध्यक्ष के रूप में सेवा निभा चुके हैं।
🔍 यह भी पढ़ें- Bathinda में Petrol Bomb हमला, CM दौरे के बीच दहशत
ग्रेवाल को पहले पंजाब में भाजपा का प्रमुख सिख चेहरा माना जाता था। विशेष रूप से भाजपा के किसान विंग के लिए उन्होंने काफी काम किया था। हालांकि, पंजाब में कांग्रेस और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के भाजपा में शामिल होने के दौरान ग्रेवाल धीरे-धीरे पीछे रह गए। अब यह माना जा रहा है कि उन्हें यह प्रतिष्ठित पद देकर राजनीतिक रूप से ‘समायोजित’ किया गया है।

स्वास्थ्य समस्याओं से उबरकर संभाला पद
जानकारी के अनुसार, हरजीत सिंह ग्रेवाल पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। अध्यक्ष नियुक्त होने पर ग्रेवाल ने कहा है कि वह स्वास्थ्य समस्याओं से उबर चुके हैं। उन्होंने इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का आभार भी व्यक्त किया है।
समझने वाली बात यह है कि जब केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन चल रहा था, तब ग्रेवाल इन कानूनों के समर्थन में मजबूती से खड़े रहे थे। वे राष्ट्रीय स्तर की मीडिया बहसों में भी लगातार हिस्सा लेते रहे थे। इस कारण किसान संगठनों द्वारा उनका तीखा विरोध किया गया था और किसान नेताओं ने उनके पैतृक घर के सामने प्रदर्शन भी किया था।
💡 यह भी पढ़ें- 8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों को मिल सकता है ₹75 लाख का HBA!
नई टीम में मुस्लिम और ईसाई प्रतिनिधि भी शामिल
केंद्र सरकार ने एस मुनवरी बेगम को मुस्लिम प्रतिनिधि के रूप में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। वहीं, ग्लेन ई सूजा टिक्कलो को ईसाई समुदाय के प्रतिनिधि के रूप में आयोग का सदस्य नामित किया गया है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ये नियुक्तियां केंद्र सरकार द्वारा इस संवैधानिक संस्था के कामकाज को मजबूत करने के लिए की गई हैं, जो देश में अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए जिम्मेदार है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग क्या करता है?
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिसूचित (नोटिफाइड) अल्पसंख्यक समुदायों के लिए संवैधानिक और कानूनी सुरक्षा के कार्यान्वयन की निगरानी करने का काम करता है। आयोग इन समुदायों की भलाई और विकास से संबंधित मुद्दों पर सरकार को सलाह भी देता है।
भारत में छह अल्पसंख्यक समुदाय अधिसूचित हैं:
- मुस्लिम
- ईसाई
- सिख
- बौद्ध
- जैन
- पारसी
दिलचस्प बात यह है कि आयोग को अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव की शिकायतों की जांच करने, उनके अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में हस्तक्षेप करने और सरकार को नीतिगत सुझाव देने का अधिकार है।
ग्रेवाल का राजनीतिक सफर
हरजीत सिंह ग्रेवाल पंजाब भाजपा के प्रमुख प्रवक्ता भी रहे हैं और राज्य उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने पहले पंजाब इनफोटेक के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
अगर गौर करें तो ग्रेवाल की यह नियुक्ति भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है जिसमें पार्टी अल्पसंख्यक समुदायों, विशेष रूप से सिख समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पंजाब में जहां भाजपा को पारंपरिक रूप से चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वहां एक सिख नेता को इतना महत्वपूर्ण पद देना राजनीतिक रूप से सार्थक कदम माना जा रहा है।
किसान आंदोलन के दौरान विवादास्पद भूमिका
जिक्रयोग्य है कि 2020-21 में जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देशव्यापी किसान आंदोलन चल रहा था, तब ग्रेवाल उन गिने-चुने सिख नेताओं में थे जो खुलकर इन कानूनों का समर्थन कर रहे थे। वे टीवी डिबेट्स में सरकार की तरफ से तर्क रखते थे और किसान आंदोलन को “गुमराह” करार देते थे।
इस कारण संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने उनका जमकर विरोध किया था। पंजाब के कई गांवों में उनके खिलाफ नारेबाजी हुई और 2021 में किसान नेताओं ने उनके पैतृक गांव में जाकर प्रदर्शन भी किया था। कुछ किसान संगठनों ने उन्हें “पंजाब का गद्दार” तक कह दिया था।
हालांकि, ग्रेवाल ने हमेशा अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि वे किसानों के हित में ही बोल रहे थे और कृषि कानून लंबे समय में फायदेमंद साबित होते।
पंजाब में भाजपा की रणनीति
देखा जाए तो ग्रेवाल की यह नियुक्ति पंजाब में भाजपा की व्यापक रणनीति का हिस्सा लगती है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
1. अल्पसंख्यक आउटरीच: सिख, ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में पहुंच बनाना
2. दलित राजनीति: अनुसूचित जाति समुदायों (जो पंजाब की आबादी का 32% हैं) में पैठ बनाना
3. हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना: पंजाब के शहरी हिंदू वोट बैंक को मजबूत करना
ग्रेवाल जैसे सिख नेताओं को राष्ट्रीय स्तर के पद देकर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी में सभी समुदायों के लिए जगह है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रेवाल की यह नियुक्ति “राजनीतिक पुनर्वास” का मामला है। पंजाब में जहां वे किसान आंदोलन के बाद काफी अलोकप्रिय हो गए थे, वहां उन्हें दिल्ली में एक सम्मानजनक पद देकर “समायोजित” किया गया है।
एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह भाजपा का पुराना फॉर्मूला है। जो नेता स्थानीय स्तर पर विवादास्पद हो जाते हैं या जिनकी उपयोगिता कम हो जाती है, उन्हें राष्ट्रीय स्तर के संवैधानिक पदों पर भेज दिया जाता है। ग्रेवाल के साथ भी यही हुआ है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
पंजाब कांग्रेस ने इस नियुक्ति पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। एक प्रवक्ता ने कहा, “ग्रेवाल जी को बधाई, लेकिन यह साफ है कि उन्हें पंजाब से दूर रखने के लिए यह पद दिया गया है। किसान आंदोलन के बाद उनकी छवि पंजाब में खराब हो गई थी।”
वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसे भाजपा की “पुरस्कार राजनीति” करार दिया। एक AAP नेता ने कहा, “जो लोग किसानों के खिलाफ खड़े रहे, उन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है। यह दुखद है।”
शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने भी इस पर तंज कसते हुए कहा कि “यह नियुक्ति दिखाती है कि भाजपा पंजाब में राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रही है और अपने नेताओं को दिल्ली में जगह देनी पड़ रही है।”
आगे की चुनौतियां
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष के रूप में ग्रेवाल के सामने कई चुनौतियां होंगी:
1. विश्वसनीयता स्थापित करना: विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों में विश्वास बनाना
2. स्वतंत्र रूप से काम करना: राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर निर्णय लेना
3. सामुदायिक सद्भाव: बढ़ते सांप्रदायिक तनाव के बीच शांति बनाए रखना
4. अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा: संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित करना
यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्रेवाल इस नई भूमिका में कैसा प्रदर्शन करते हैं और क्या वे अपनी राजनीतिक पहचान से ऊपर उठकर एक निष्पक्ष संवैधानिक पदाधिकारी के रूप में काम कर पाते हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- हरजीत सिंह ग्रेवाल को 3 साल के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया
- वे इकबाल सिंह लालपुरा की जगह लेंगे
- ग्रेवाल पंजाब भाजपा के पूर्व प्रमुख सिख चेहरे थे
- किसान आंदोलन के दौरान कृषि कानूनों का समर्थन करने के कारण विवादास्पद रहे
- एस मुनवरी बेगम को उपाध्यक्ष (मुस्लिम प्रतिनिधि) और ग्लेन ई सूजा टिक्कलो को सदस्य (ईसाई प्रतिनिधि) बनाया गया
- राजनीतिक विश्लेषक इसे ‘राजनीतिक समायोजन’ मान रहे हैं
- NCM देश में छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों की रक्षा करता है













