Punjab Employees Protest ने नया मोड़ ले लिया है। पंजाब में सरकारी मुलाजिमों के संघर्ष ने अब आर-पार की शक्ल अख्तियार कर ली है। अगले 15 दिनों के एक्शन प्लान के साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की तैयारी है। आरोप है कि लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सरकार ने कोई ठोस फैसला नहीं लिया।
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‘सरकार के साढ़े चार साल और नाराजगी’
देखा जाए तो पंजाब सरकार के साढ़े चार साल पूरे हो चुके हैं। अब आखिरी छह महीने चुनावी साल माने जा रहे हैं। और बस यहीं से शुरू हुई असली कहानी। जिस तरह की नाराजगी मुलाजिम जत्थेबंदियों और आम मुलाजिमों में आम आदमी पार्टी सरकार को लेकर नजर आ रही है, उससे एक बात साफ हो गई है कि मुलाजिम अब खफा हो चुके हैं।
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‘DA का मसला बना सबसे बड़ी चिंता’
समझने वाली बात यह है कि DA (महंगाई भत्ता) का मसला एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। करीब 7 लाख पेंशनर और मुलाजिम इससे लगातार प्रभावित हो रहे हैं। कोर्ट में लगातार केस चल रहा है और सरकार बार-बार यही कह रही है कि DA देना उसके अधिकार क्षेत्र में है, पर सेंटर के हिसाब से नहीं बनता।
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‘बिजली महकमे में बिगड़ते हालात’
चिंता का विषय यह है कि बिजली महकमे को लेकर हालात बद से बदतर होते नजर आ रहे हैं। PSPCL इंजीनियर्स एसोसिएशन ने CMD को चिट्ठी लिखी है। बिजली मुलाजिम संघर्षशील मोर्चा ने भी PSPCL के CMD बसंत गर्ग को पत्र भेजा है।
मोर्चे का कहना है कि 15 जून से लगातार संघर्ष कार्यक्रम चलाए गए। 24 जून 2026 को बिजली मंत्री के खन्ना स्थित निवास पर विशाल रोष प्रदर्शन हुआ। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को पटियाला स्थित PSPCL दफ्तर के बाहर भी प्रदर्शन किया गया।
‘अगले 15 दिन का पूरा एक्शन प्लान’
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि मुलाजिमों ने अब सड़कों पर उतरने की तैयारी कर ली है। पूरा प्लान इस तरह है:
| तारीख | कार्यक्रम |
|---|---|
| 16 से 31 जुलाई | CMD और डायरेक्टरों के फील्ड दौरों पर काले झंडों से रोष |
| 16 से 31 जुलाई | ड्यूटी सिर्फ ‘वर्क टू रूल’, ड्यूटी के बाद मोबाइल फोन बंद |
| तारीख तय नहीं | दो दिन लगातार PSPCL और PSTCL मुख्य दफ्तरों के गेट पर धरना |
‘पीक सीजन में बढ़ेगी मुश्किल’
सवाल उठता है कि यह विरोध ऐसे समय पर हो रहा है जब बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत है। एक तरफ भीषण गर्मी और उमस, दूसरी तरफ झोने का सीजन। सरकार भले ही 24 घंटे बिजली सप्लाई का दावा करे, पर जमीनी हालात कुछ और ही तस्वीर पेश करते हैं।
आम जनता पर क्या असर
अगर बिजली महकमे के मुलाजिम ‘वर्क टू रूल’ पर चले गए और फोन बंद रखने लगे, तो झोने के इस पीक सीजन में आम किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति में परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
जानें पूरा मामला
दरअसल, पंजाब सरकार और मुलाजिमों के बीच DA, पेंशन और ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों की मांगों को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। मुलाजिमों का कहना है कि सरकार ने बार-बार मीटिंग का समय दिया, पर मीटिंग नहीं की। यही वजह है कि अब संघर्ष तेज करने का फैसला लिया गया है।
मुख्य बातें (Key Points)
- पंजाब के सरकारी मुलाजिमों ने अगले 15 दिन का एक्शन प्लान बनाया।
- DA का मसला कोर्ट तक पहुंचा, करीब 7 लाख मुलाजिम-पेंशनर प्रभावित।
- 16 से 31 जुलाई तक ‘वर्क टू रूल’ और काले झंडों से विरोध।
- पीक झोने सीजन में यह विरोध सरकार की मुश्किल बढ़ा सकता है।













