MBBS seats India 2026 को लेकर छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। भारत में अब मेडिकल की पढ़ाई के लिए कुल सीटों की संख्या 1.36 लाख को पार कर गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अकादमिक वर्ष 2026-27 के लिए ताजा आंकड़े जारी किए हैं, जिसके अनुसार देश के 823 मेडिकल कॉलेजों में अब कुल 1,36,939 MBBS सीटें उपलब्ध होंगी।
पिछले साल (2025-26) 818 कॉलेजों में 1,28,976 सीटें थीं, यानी इस बार 7,963 नई सीटें जोड़ी गई हैं। यह साल-दर-साल 7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है। देखा जाए तो यह उन लाखों छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है जो हर साल NEET की परीक्षा देते हैं और सीटों की कमी के कारण अपने सपने अधूरे रह जाते हैं।
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सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में कितनी सीटें
इस साल की कुल 1,36,939 सीटों में से 1,27,028 सीटें पुरानी हैं (रिन्यूअल सिस्टम के तहत) और 9,911 बिल्कुल नई सीटें जोड़ी गई हैं। अगर हम कॉलेजों के हिसाब से देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो देश में अब 441 सरकारी कॉलेज हैं, जिनमें कुल 63,296 सीटें हैं। इनमें से 61,185 पुरानी सीटें हैं और 2,111 नई सीटें जोड़ी गई हैं। वहीं, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की संख्या 382 है, जिनमें कुल 73,643 सीटें हैं। इनमें 65,843 पुरानी सीटें हैं और 7,800 नई सीटें जोड़ी गई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि इन आंकड़ों में AIIMS, JIPMER पुडुचेरी और PGI चंडीगढ़ जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की सीटें शामिल नहीं हैं। ये केंद्रीय संस्थान मिलकर लगभग 2,900 सीटें अलग से देते हैं। यानी अगर इन्हें जोड़ दिया जाए तो देश में कुल MBBS सीटों की संख्या करीब 1.40 लाख के पार चली जाती है।
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25 नए मेडिकल कॉलेज खुले
इस बार देश में 25 नए मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं, जिनसे 2,400 बिल्कुल नई सीटें जुड़ी हैं। इनमें से 7 सरकारी कॉलेज हैं जो 400 सीटें देंगे, जबकि 18 प्राइवेट कॉलेज हैं जो 2,000 सीटें मुहैया कराएंगे।
नए खुले प्रमुख कॉलेजों में अलवाज इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (कर्नाटक), APS मेडिकल कॉलेज (तमिलनाडु), सिक्किम सरकारी मेडिकल कॉलेज, सिद्धो कान्हू मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल (झारखंड) और संस्कारम स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज (हरियाणा) शामिल हैं।
यह ध्यान देने वाली बात है कि सरकार लगातार मेडिकल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की कोशिश कर रही है ताकि डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।
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राज्यवार MBBS सीटों का डेटा
देश के अलग-अलग राज्यों में MBBS सीटों का वितरण काफी असमान है। कुछ राज्यों में सीटें बहुत ज्यादा हैं जबकि कुछ में बेहद कम। आइए राज्यवार आंकड़े देखते हैं:
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | कुल MBBS सीटें |
|---|---|
| कर्नाटक | 15,395 |
| उत्तर प्रदेश | 14,000 |
| तमिलनाडु | 13,999 |
| महाराष्ट्र | 13,099 |
| तेलंगाना | 10,250 |
| राजस्थान | 8,080 |
| गुजरात | 7,750 |
| आंध्र प्रदेश | 7,465 |
| मध्य प्रदेश | 6,020 |
| हरियाणा | 2,960 |
| पंजाब | 1,850 |
| चंडीगढ़ | 200 |
अगर गौर करें तो कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा सीटें हैं। वहीं, छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों की संख्या काफी कम है।
छात्रों के लिए क्या मायने रखता है यह डेटा
समझने वाली बात यह है कि सीटों की बढ़ोतरी का सीधा असर NEET परीक्षा में कट-ऑफ पर पड़ेगा। जैसे-जैसे सीटें बढ़ेंगी, थोड़ी कम रैंक वाले छात्रों को भी मौका मिल सकेगा। हालांकि, NEET में हर साल 18-20 लाख छात्र परीक्षा देते हैं, और 1.36 लाख सीटें भी उनके सामने कम ही पड़ती हैं।
फिर भी, यह बढ़ोतरी सही दिशा में उठाया गया कदम है। खासकर सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ने से गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों को फायदा होगा, क्योंकि प्राइवेट कॉलेजों की फीस बेहद महंगी होती है।
डॉक्टर-मरीज अनुपात में सुधार की जरूरत
भारत में डॉक्टर और मरीजों का अनुपात अभी भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों से कम है। WHO के अनुसार प्रति 1,000 लोगों पर कम से कम 1 डॉक्टर होना चाहिए, लेकिन भारत में यह अनुपात अभी भी 1:1,400 के आसपास है।
देखा जाए तो MBBS सीटों में लगातार बढ़ोतरी इसी कमी को दूर करने का प्रयास है। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ सालों में हर जिले में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज खोलना है।
मुख्य बातें (Key Points):
- 2026-27 में देश में कुल 1,36,939 MBBS सीटें उपलब्ध होंगी
- पिछले साल की तुलना में 7,963 नई सीटें जोड़ी गईं (7% वृद्धि)
- 25 नए मेडिकल कॉलेज खुले, जिनमें 7 सरकारी और 18 प्राइवेट हैं
- कर्नाटक में सबसे ज्यादा 15,395 सीटें, उसके बाद UP और तमिलनाडु
- AIIMS, JIPMER, PGI की 2,900 सीटें अलग से उपलब्ध हैं













