Farmers Protest Punjab Toll Plaza: भारतीय किसान यूनियन एकता (सिद्धूपुर/डल्लेवाल) के सूबाई सदे पर आज किसानों ने विभिन्न स्थानों पर टोल प्लाजाओं को परची मुक्त करके पंजाब सरकार के विरुद्ध जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। यूनियन द्वारा पूरे पंजाब में सुबह 11:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक टोल प्लाजा मुफ्त करने का ऐलान किया गया था, जिसके तहत किसानों ने विभिन्न हाईवे पर धरने लगाए।
देखा जाए तो यह प्रदर्शन किसानों की उन मांगों को लेकर है जो लंबे समय से लंबित हैं। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है, इसलिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
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अजीजपुर टोल प्लाजा पर धरना, बड़े नेता मौजूद
यूनियन के सदे पर आज सुबह 11:00 बजे किसानों ने बनूड़ से जीरकपुर को जाने वाले कौमी मार्ग पर पड़ने वाले अजीजपुर टोल प्लाजा को पूरी तरह परची मुक्त कर दिया। किसानों द्वारा टोल प्लाजा पर धरना आरंभ दिया गया है, जिसमें सूबाई आगू मान सिंह राजपुरा, तरलोचन सिंह नंदियाली, गुरमीत सिंह सियाऊ और अन्य प्रमुख आगू विशेष तौर पर मौजूद हैं।
अगर गौर करें तो इस प्रदर्शन में किसान संगठनों के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी दर्शाती है कि यह कोई छिटपुट आंदोलन नहीं, बल्कि एक संगठित और योजनाबद्ध विरोध है।
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धरेड़ी जट्टां टोल प्लाजा भी किया मुफ्त
दूसरी ओर, संयुक्त किसान मोर्चे के सदे पर BKU (डल्लेवाल) जिला पटियाला द्वारा पटियाला-राजपुरा रोड पर स्थित धरेड़ी जट्टां टोल प्लाजा पर भी धरना मारकर इसे वाहनों के लिए परची मुक्त कर दिया गया। इस धरने की अगुवाई करते हुए यूनियन के जिला कनवीनर जगदीप सिंह अलूणा ने सरकार की नीतियों की सख्त निंदा की।
समझने वाली बात यह है कि यह प्रदर्शन केवल एक या दो जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे पंजाब में एक साथ कई स्थानों पर किया गया, जो किसानों की एकजुटता को दर्शाता है।
इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई
इस दौरान किसानों द्वारा अपनी हक्की मांगों के लिए पंजाब सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। “किसान एकता जिंदाबाद”, “सरकार जवाब दो” जैसे नारों से टोल प्लाजा गूंज उठे।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जता रहे थे, लेकिन उनकी आवाज में दृढ़ता साफ झलक रही थी।
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किसानों की मुख्य मांगें क्या हैं?
किसानों ने पंजाब सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं:
लैंड पूलिंग नीति का विरोध: पंजाब सरकार द्वारा लागू की जा रही लैंड पूलिंग नीति का किसानों ने तीखा विरोध किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यह नीति उनकी जमीनें छीनने का एक तरीका है।
बैंकों में हुई धोखाधड़ी पर कार्रवाई: लैंड मॉर्गेज बैंकों और PADB बैंकों में किसानों के साथ हुई कथित धोखाधड़ी के विरुद्ध तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। कई किसानों ने शिकायत की है कि उनकी जमीनों को गलत तरीके से गिरवी रखा गया।
एक बार निपटारा योजना: बैंकों में किसानों के कर्जों के हल के लिए एक बार निपटारा योजना (One Time Settlement) शुरू की जाए ताकि किसान कर्ज के बोझ से मुक्त हो सकें।
व्यापार समझौते रद्द करने की मांग: किसान आगुओं ने मांग की कि ‘यू.एस.-इंडिया व्यापार समझौता’ (US-India Trade Agreement) किसान विरोधी है, इसलिए इसे बिल्कुल भी लागू न किया जाए।
दिलचस्प बात यह है कि किसानों की मांगें केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के प्रभाव को भी समझ रहे हैं।
सरकार की चुप्पी से बढ़ रहा गुस्सा
किसान नेताओं का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को लेकर पूरी तरह से मौन साध रही है। न तो कोई वार्ता हो रही है और न ही किसी समाधान की दिशा में कोई प्रयास। यही कारण है कि किसानों को बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
इससे साफ होता है कि यदि सरकार जल्द ही किसानों से बातचीत शुरू नहीं करती, तो प्रदर्शन और तीव्र हो सकते हैं।
पंजाब के किसान आंदोलन की परंपरा
पंजाब में किसान आंदोलनों की लंबी परंपरा रही है। 2020-21 के कृषि कानूनों के खिलाफ हुए ऐतिहासिक आंदोलन में भी पंजाब के किसानों ने अहम भूमिका निभाई थी। अब फिर से वे अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं।
मुख्य बातें (Key Points)
- BKU (सिद्धूपुर/डल्लेवाल) के सदे पर पंजाब भर में टोल प्लाजा परची मुक्त किए गए
- अजीजपुर और धरेड़ी जट्टां टोल प्लाजा पर धरने लगाए गए
- लैंड पूलिंग नीति, बैंकों में धोखाधड़ी और US-India व्यापार समझौते का विरोध
- सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चला प्रदर्शन
- किसानों ने एक बार निपटारा योजना की मांग की













