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The News Air - Breaking News - Gujarat HC: अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 38 आतंकवादियों की फांसी बरकरार

Gujarat HC: अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 38 आतंकवादियों की फांसी बरकरार

2008 के सीरियल बम धमाकों में 56 लोगों की हत्या, कोर्ट ने कहा - भयानक और वहशीयाना साजिश

Ajay Kumar by Ajay Kumar
मंगलवार, 14 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, राष्ट्रीय
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Gujarat HC
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Ahmedabad Blasts HC Verdict: गुजरात हाई कोर्ट ने साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के मामले में पाबंदीशुदा संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ (IM) के 38 आतंकवादियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि देश के इतिहास में यह एक बेहद ‘भयानक और वहशीयाना’ साजिश थी, जिसका मुख्य मकसद समाज में बड़े पैमाने पर दहशत फैलाना और अधिकतम जानी नुकसान करना था। जस्टिस ए. वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की बेंच ने 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद की सजा को भी जायज ठहराया है।

देखा जाए तो यह फैसला उन परिवारों के लिए न्याय की एक किरण है जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस जघन्य हमले में खो दिया था। 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए ये धमाके भारतीय इतिहास के सबसे खूनी आतंकी हमलों में से एक थे।

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7 जुलाई को सुनाया था फैसला, सोमवार को मिली कॉपी

जस्टिस ए. वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की बेंच ने बीती 7 जुलाई को यह फैसला सुनाया था, जिसकी कॉपी सोमवार को उपलब्ध हुई है। अदालत ने माना कि गुजरात और केरल में चले आतंकवादी प्रशिक्षण कैंपों में इन दोषियों की शमूलियत और साजिश के लिए साजो-सामान मुहैया करवाने के सबूत पूरी तरह सही पाए गए हैं।

अगर गौर करें तो यह फैसला विशेष अदालत के फरवरी 2022 के ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि करता है। हाई कोर्ट ने डेढ़ साल से अधिक समय तक इस मामले की लगातार सुनवाई की और इस साल फरवरी से इस केस पर रोजाना के आधार (Day-to-Day) पर बहस सुनी गई थी।

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70 मिनट में 21 धमाके, 56 लोगों की मौत

जिक्रयोग है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनटों के अंदर 21 धमाके हुए थे, जिनमें 56 लोग मारे गए थे और 200 से अधिक जख्मी हो गए थे। भारत के इतिहास में यह पहली बार था जब आतंकवादियों ने उन अस्पतालों को भी निशाना बनाया था जहां धमाकों के जख्मियों को इलाज के लिए ले जाया जा रहा था।

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समझने वाली बात यह है कि यह हमला सिर्फ जान लेने के लिए नहीं था, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में अधिकतम दहशत फैलाना और बचाव कार्य को भी निशाना बनाना था। यह आतंकवादियों की क्रूरता की पराकाष्ठा थी।

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हॉस्पिटलों को भी बनाया निशाना – पहली बार

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की, “जिस बेरहमी से इन बम धमाकों को अंजाम दिया गया, वह बेकसूर लोगों की जानें लेने वालों की खतरनाक मानसिकता और बेरहमी को दर्शाता है।” अदालत ने यह भी कहा कि जेल के दौरान भी इन दोषियों का व्यवहार ठीक नहीं था और उनके मनों में अपने गुनाहों के लिए कोई पछतावा नहीं है, इसलिए सजा में किसी तरह की नरमी की गुंजाइश नहीं बनती।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अदालत ने न सिर्फ अपराध की गंभीरता को देखा, बल्कि अपराधियों के व्यवहार और पश्चाताप की कमी को भी सजा बरकरार रखने का आधार बनाया।

पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे के निर्देश

अदालत ने गुजरात सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह मारे गए लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से जख्मी हुए लोगों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा 30 मार्च 2027 से पहले अदा करे।

दिलचस्प बात यह है कि अदालत ने केवल सजा देने तक सीमित नहीं रहकर पीड़ितों के पुनर्वास की भी चिंता की है। यह न्याय की समग्र व्यवस्था का उदाहरण है।

सफदर नागोरी समेत 11 राज्यों से जुड़े आतंकवादी

सजा पाने वालों में पाबंदीशुदा संगठन ‘स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया’ (SIMI) का साबका आगू सफदर नागोरी और उसके सहयोगी शामिल हैं, जो गुजरात, मध्य प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश सहित 11 सूबों से संबंधित हैं।

इससे साफ होता है कि यह साजिश केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि देशभर में फैले एक आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा थी।

डेढ़ साल से अधिक चली सुनवाई

हाई कोर्ट ने डेढ़ साल से अधिक समय तक इस मामले की लगातार सुनवाई की और इस साल फरवरी से इस केस पर रोजाना के आधार (Day-to-Day) पर बहस सुनी गई थी। यह दर्शाता है कि अदालत ने इस गंभीर मामले को पूरी गंभीरता से लिया और हर पहलू की विस्तृत जांच की।

मुख्य बातें (Key Points)
  • गुजरात हाई कोर्ट ने 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट केस में 38 आतंकवादियों की फांसी बरकरार रखी
  • 26 जुलाई 2008 को 70 मिनट में 21 धमाके हुए थे, 56 लोग मारे गए और 200+ घायल हुए
  • भारत में पहली बार अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया था
  • पीड़ित परिवारों को 10 लाख और जख्मियों को 5 लाख मुआवजे का आदेश
  • SIMI के साबका आगू सफदर नागोरी समेत 11 राज्यों से जुड़े आतंकवादी दोषी

FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1: 2008 अहमदाबाद ब्लास्ट में कितने लोग मारे गए थे?

26 जुलाई 2008 को 70 मिनट में 21 धमाकों में 56 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हुए थे।

Q2: किस आतंकवादी संगठन ने यह हमला किया था?

पाबंदीशुदा संगठन ‘इंडियन मुजाहिदीन’ (IM) और SIMI के आतंकवादियों ने यह हमला किया था।

Q3: पीड़ितों को कितना मुआवजा मिलेगा?

गुजरात सरकार मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये और गंभीर घायलों को 5 लाख रुपये 30 मार्च 2027 तक देगी।

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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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