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The News Air - Breaking News - Punjab Congress Chief Raja Warring के खिलाफ खुला मोर्चा, विरोधी धड़े ने किया बहिष्कार का ऐलान

Punjab Congress Chief Raja Warring के खिलाफ खुला मोर्चा, विरोधी धड़े ने किया बहिष्कार का ऐलान

कांग्रेस में गृहयुद्ध तेज, चरनजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में सीनियर लीडर्स ने मुहाली में की बैठक और राजा वड़िंग के सभी कार्यक्रमों के बॉयकॉट का फैसला किया

Ajay Kumar by Ajay Kumar
सोमवार, 6 जुलाई 2026
in Breaking News, NEWS-TICKER, पंजाब, सियासत
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Punjab Congress Chief Raja Warring
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Raja Warring Boycott Congress Punjab को लेकर पंजाब कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह सामने आई है। भुपेश बघेल के पंजाब दौरे से ठीक पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के खिलाफ विरोधी गुट एकजुट हो गया है। मुहाली में हुई अहम बैठक में फैसला लिया गया है कि वड़िंग विरोधी धड़े का कोई भी नेता राजा वड़िंग की अगुवाई में होने वाले किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा। देखा जाए तो, यह कांग्रेस हाईकमान के लिए एक नई सिरदर्द बन गई है।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के मोरिंडा सम्मेलन के बाद कांग्रेस की प्रधानगी के दावेदारों ने आपस में हाथ मिला लिए हैं। यह सिर्फ राजनीतिक असहमति नहीं, बल्कि वड़िंग की बयानबाजी के खिलाफ एक संगठित विद्रोह है।

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मुहाली में हुई रणनीतिक बैठक: कौन-कौन था शामिल?

आज मुहाली में हुई इस अहम बैठक में कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता एक मंच पर आए। इस बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी के साथ सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मंत्री परगट सिंह, पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना, पूर्व मंत्री त्रिप्त रजिंदर सिंह बाजवा, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशू, गुरप्रीत सिंह कांगड़, पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों, विधायक कुलदीप सिंह ढिल्लों समेत दर्जनों आगू शामिल हुए।

दिलचस्प बात यह है कि पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह आज किसी चुनाव के रुझान के कारण शामिल नहीं हो सके, लेकिन उनके करीबी विधायक लाडी शेरोवालिया इस बैठक में मौजूद थे। यह साफ संकेत देता है कि विरोधी गुट में राणा गुरजीत का भी साथ है।

समझने वाली बात यह है कि ये सभी नेता पंजाब की राजनीति में भारी वजन रखते हैं। इनका एकजुट होना राजा वड़िंग के लिए बड़ी चुनौती है।

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प्रताप सिंह बाजवा की गैरमौजूदगी पर सवाल

सूत्र बताते हैं कि विरोधी गुट के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी इस बैठक में शामिल होने की हामी भरी थी, लेकिन वह बैठक में मौजूद नहीं थे।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रताप बाजवा लंबे समय से वड़िंग के मुखर आलोचक रहे हैं। उनकी अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है। क्या वह हाईकमान के दबाव में हैं? या फिर वह इस मोर्चे से अलग रहना चाहते हैं?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बाजवा शायद खुलकर इस बगावत में शामिल नहीं होना चाहते, लेकिन वह चन्नी के गुट के साथ हैं।

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वड़िंग के खिलाफ तैयार हुआ खाका: क्या हैं आरोप?

बैठक में वड़िंग के खिलाफ एक विस्तृत खाका तैयार किया गया जिसे हाईकमान को भेजा जाएगा। इस खाके के अनुसार, राजा वड़िंग की बयानबाजी के कारण जमीनी स्तर पर कांग्रेस को भारी राजनीतिक नुकसान पहुंच रहा है।

अगर गौर करें तो वड़िंग ने हाल ही में कई विवादित बयान दिए हैं:

1. बूटा सिंह विवाद: वड़िंग ने मरहूम बूटा सिंह के बारे में बयानबाजी करके दलित समुदाय को नाराज कर दिया।

2. तरनतारन विवाद: तरनतारन में दिए गए बयानों से सिख समुदाय नाराज है।

3. ज्ञानी जैल सिंह विवाद: पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह के खिलाफ बयानबाजी करके OBC समुदाय का गुस्सा भड़का दिया।

ये सभी बयान कांग्रेस के वोट बैंक को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। विरोधी गुट का कहना है कि वड़िंग की भाषा से पार्टी की छवि खराब हो रही है।

विरोधियों का साफ संदेश: वड़िंग की अगुवाई में नहीं जीतेगी कांग्रेस

सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं का हाईकमान को संदेश साफ है – पंजाब की जमीनी हकीकत को समझा जाए और वड़िंग की अगुवाई में कांग्रेस चुनाव नहीं जीत सकेगी।

यह बेहद गंभीर आरोप है। दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश में है। ऐसे में अंदरूनी कलह पार्टी के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है।

चन्नी के समर्थक नेताओं का मानना है कि वड़िंग की आक्रामक और विवादित शैली पंजाब की राजनीति के अनुकूल नहीं है। पंजाब में संतुलित और सबको साथ लेकर चलने वाली राजनीति चलती है।

भुपेश बघेल के दौरे से पहले बगावत का समय

दिलचस्प यह है कि यह बैठक भुपेश बघेल के पंजाब दौरे से ठीक पहले हुई है। भुपेश बघेल कांग्रेस के पंजाब मामलों के प्रभारी हैं।

कहने का मतलब साफ है – विरोधी गुट चाहता है कि भुपेश बघेल पंजाब आने से पहले पूरी तस्वीर समझ लें। वे चाहते हैं कि हाईकमान को यह एहसास हो कि जमीन पर स्थिति क्या है।

यह रणनीतिक कदम है। बघेल के सामने सीधे तौर पर यह मुद्दा रखकर विरोधी गुट हाईकमान पर दबाव बनाना चाहता है।

आने वाले दिनों में यह हाईकमान के लिए नई चुनौती बनेगी।

वड़िंग का जवाबी हमला: ‘एकता में ही बरकत है’

दूसरी तरफ, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग ने पंजाब कांग्रेस की पोस्ट शेयर करते हुए कहा है कि विधानसभा 2027 के मद्देनजर कांग्रेस की चुनाव प्रचार समिति के चेयरमैन चरनजीत सिंह चन्नी और कोर कमेटी के चेयरमैन सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ बैठक की।

वड़िंग ने कहा कि इस बैठक में चुनाव रणनीति और संगठन को मजबूत करने के अलावा आने वाले कार्यक्रमों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने ‘मिशन 2027’ का जिक्र करते हुए एकता पर जोर दिया।

समझने वाली बात यह है कि वड़िंग ने बगावत को नकारने की कोशिश की है। उन्होंने इसे एक आम बैठक बताया है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

कांग्रेस हाईकमान के सामने बड़ी दुविधा

अब कांग्रेस हाईकमान के सामने बड़ी दुविधा है। एक तरफ वड़िंग को हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। उन्हें हटाना हाईकमान की कमजोरी माना जाएगा।

दूसरी ओर, चन्नी जैसे दलित चेहरे और रंधावा, बाजवा जैसे सीनियर नेताओं की नाराजगी भी पार्टी के लिए खतरनाक है।

चिंता का विषय यह भी है कि कांग्रेस पहले से ही पंजाब में तीसरे नंबर पर है। AAP और अकाली दल से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को एकजुट होना जरूरी है।

लेकिन अंदरूनी कलह पार्टी को और कमजोर कर रही है। अगर हाईकमान जल्द हस्तक्षेप नहीं करता, तो 2027 में कांग्रेस की हालत और बिगड़ सकती है।

क्या है चन्नी का राजनीतिक दांव?

चरनजीत सिंह चन्नी पंजाब कांग्रेस में दलित चेहरे हैं। उन्हें 2022 के चुनावों से पहले मुख्यमंत्री बनाया गया था। हालांकि चुनाव हार गए, लेकिन चन्नी की लोकप्रियता बरकरार है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चन्नी धीरे-धीरे खुद को 2027 के मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह बैठक भी उसी दिशा में एक कदम है। चन्नी ने सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर ला दिया। यह उनकी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन है।

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अगर हाईकमान वड़िंग से नाखुश होता है, तो चन्नी सबसे बड़े विकल्प के रूप में सामने आएंगे।

रंधावा और बाजवा की भूमिका

सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रताप सिंह बाजवा दोनों ही सीनियर नेता हैं और दोनों ने अलग-अलग समय पर प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी की है।

रंधावा वर्तमान में कोर कमेटी के चेयरमैन हैं। उनकी राजनीतिक समझ को सभी मानते हैं। बाजवा भी विधायक दल के नेता रह चुके हैं।

दोनों का चन्नी के साथ खड़ा होना वड़िंग के लिए बड़ा झटका है। इसका मतलब है कि पार्टी का पूरा सीनियर नेतृत्व वड़िंग से नाखुश है।

राहत की बात यह है कि अभी तक यह मामला पूरी तरह खुलकर सामने नहीं आया है। लेकिन अगर हाईकमान सही कदम नहीं उठाता, तो यह विद्रोह खुली बगावत में बदल सकता है।

2027 चुनाव पर असर

इस अंदरूनी कलह का सीधा असर 2027 के चुनावों पर पड़ेगा। अगर कांग्रेस नेता आपस में ही लड़ते रहे, तो AAP और अकाली दल का फायदा होगा।

पंजाब की जनता बंटी हुई पार्टी को पसंद नहीं करती। 2017 और 2022 के नतीजे इसकी गवाही देते हैं।

कांग्रेस को सबक लेना चाहिए और जल्द से जल्द अपने घर को व्यवस्थित करना चाहिए। वरना इतिहास फिर से दोहराया जाएगा।

मुख्य बातें (Key Points)
  • राजा वड़िंग के खिलाफ विरोधी गुट ने मुहाली में अहम बैठक की
  • चरनजीत सिंह चन्नी की अगुवाई में दर्जनों सीनियर नेता एकजुट हुए
  • वड़िंग के सभी कार्यक्रमों के बहिष्कार का फैसला लिया गया
  • वड़िंग की बयानबाजी के कारण दलित, सिख और OBC समुदाय नाराज
  • हाईकमान को भेजने के लिए वड़िंग के खिलाफ खाका तैयार किया गया
  • भुपेश बघेल के दौरे से ठीक पहले हुई यह रणनीतिक बैठक
  • प्रताप सिंह बाजवा की गैरमौजूदगी पर सवाल
  • वड़िंग ने इसे आम बैठक बताकर एकता की अपील की
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पत्रकारिता में एक दशक से अधिक का ठोस अनुभव रखने वाले अजय कुमार 'शोर से ज़्यादा सार' की पत्रकारिता पर दृढ़ विश्वास करते हैं। वर्तमान में वे The News Air में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं, जहां वे समाचारों की रणनीति, लेखन, तथ्य-सत्यापन (Fact-Checking) और सटीक प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं।पत्रकारिता का सफर और अनुभव - अजय कुमार का करियर ग्राउंड ज़ीरो की रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज़ डेस्क के कुशल प्रबंधन तक विस्तृत है। The News Air में पिछले 3 वर्षों से नेतृत्व करने से पहले, उन्होंने 'दैनिक जागरण' और 'सिटी न्यूज़' जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पत्रकारिता में उनकी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि ने उनके काम करने के तरीके को बेहद व्यावहारिक और तथ्य-आधारित बनाया है।विशेषज्ञता और कार्यक्षेत्र (Expertise & Beats) - वे जटिल राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को सरल भाषा, स्पष्ट तथ्यों और निष्पक्ष तरीके से पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं। उनकी पत्रकारिता की मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है:राजनीतिक कवरेज: लोकसभा चुनावों और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की ग्राउंड और डेस्क रिपोर्टिंग।कानूनी और संसदीय खबरें: संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों की नियमित और रियल-टाइम कवरेज।खोजी पत्रकारिता: ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ रिपोर्टिंग के जरिए अंदरूनी खबरों की पड़ताल।विश्वसनीयता और डिजिटल योगदान (Trust & Authority) - सटीक और प्रामाणिक ख़बरों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें पाठकों के बीच एक विश्वसनीय पत्रकार बनाती है। डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम को बेहतर बनाने और फेक न्यूज़ से लड़ने की दिशा में, अजय कुमार गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

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